एक वर्मी बेड पर 75% अनुदान: गन्ने के खेत में केंचुआ खाद यूनिट का पूरा हिसाब

गन्ने की बुवाई का खर्च हर साल एक ही सवाल खड़ा करता है: DAP और यूरिया पर पैसा डालें या खेत की मिट्टी को जिंदा रखें? एक रास्ता ऐसा है जिसमें किसान खेत की मेड़ के पास ही खाद की छोटी फैक्ट्री खड़ी कर देता है। केंचुआ खाद की यूनिट। एक बार सही से लगा ली तो हर 45 से 60 दिन में खाद तैयार होती रहती है।
इस गाइड में यूनिट का पूरा हिसाब है: बेड का आकार, केंचुओं की प्रजाति, परतें लगाने की विधि, गन्ने में डालने की मात्रा और यूपी में मिलने वाला अनुदान।
गन्ने के खेत में केंचुआ खाद क्यों
गोबर की साधारण खाद के मुकाबले केंचुआ खाद में पोषक तत्व कई गुना अधिक होते हैं। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक इसमें नाइट्रोजन करीब 5 गुना, फास्फोरस 7 से 8 गुना और पोटाश 11 गुना तक ज्यादा पाया जाता है। इसके अलावा कैल्शियम, मैग्नीशियम, जिंक, तांबा, लोहा जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व और लाभदायक सूक्ष्मजीव भी मौजूद रहते हैं।
गन्ना पोषक तत्वों की खूब भूखी फसल है। सिर्फ रासायनिक खाद वाले खेतों में कुछ साल बाद मिट्टी की जलधारण क्षमता घटती है, पानी जल्दी बह जाता है। केंचुआ खाद मिट्टी की संरचना सुधारती है और पानी रोकने की ताकत बढ़ाती है। पेड़ी में इसका असर साफ दिखता है, क्योंकि तब मिट्टी पहले से थकी होती है।
यूनिट कहां लगाएं, आकार कितना रखें
यूनिट के लिए ऐसी जगह चुनें जहां छांव हो, पानी पास में मिले और बारिश का पानी बेड में न घुसे। पेड़ के नीचे या खपरैल-टीन की छोटी छत के नीचे बेड सबसे अच्छा रहता है।
दो तरीके प्रचलित हैं। पहला, जमीन पर ढेर (windrow) विधि: 10 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 2 फीट ऊंचा बेड बनाएं। दूसरा, गड्ढा विधि: ईंटों से 3 मीटर लंबा, 2 मीटर चौड़ा और 1 मीटर गहरा गड्ढा बनाएं। एक बेड पर करीब 1 किलो वर्मीकल्चर (जिसमें 800 से 1000 केंचुए होते हैं) डाला जाता है। बेड के नीचे जूट की बोरियों की परत बिछा दें, इससे नमी बनी रहती है।
केंचुए कौन से डालें, कहां से लाएं
कम्पोस्ट बनाने के लिए लाल केंचुए की प्रजाति Eisenia foetida सबसे उपयुक्त मानी जाती है। इसके अलावा Eudrilus eugenae और Perionyx excavatus भी इस्तेमाल होती हैं। स्थानीय केंचुओं से काम चल सकता है, लेकिन प्रशिक्षित प्रजाति से खाद जल्दी और एक जैसी गुणवत्ता की बनती है।
केंचुए कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), जिला उद्यान विभाग या भरोसेमंद वर्मी इकाइयों से मिल जाते हैं। खरीदते समय केंचुए जीवित और सक्रिय होने चाहिए।
एक जरूरी सावधानी: बेड में ताजा गोबर कभी न डालें। ताजे गोबर के सड़ने से जो जैविक अम्ल निकलते हैं, वे केंचुओं को मार देते हैं। गोबर कम से कम 15 से 30 दिन पुराना होना चाहिए। कीटनाशक गुण वाली या तेज सुगंध वाले पौधों के अवशेष भी बेड में न डालें।
परतें लगाने का तरीका और 45 दिन का हिसाब
बेड को परतों में भरें। सबसे नीचे 5-6 सेंटीमीटर रेत या बलुई मिट्टी (फालतू पानी निकले), उसके ऊपर 30 सेंटीमीटर धान की पराली या फसल अवशेष (हवा के लिए), फिर 20-30 सेंटीमीटर पुराना गोबर, और सबसे ऊपर थोड़ा सड़ा हुआ जैविक कचरा, पत्तियां और घास-फूस।
अब केंचुए फैलाकर जूट की बोरियों से ढक दें और बोरियों पर नियमित पानी छिड़कें। नमी 60 से 70 प्रतिशत बनाए रखें: मुट्ठी में दबाने पर गांठ बने, पानी न टपके। तापमान 20 से 30 डिग्री आदर्श है। तेज धूप और पाले से बेड बचाएं।
खाद 45 से 60 दिन में तैयार हो जाती है। पहचान: रंग काला और दानेदार, कोई बदबू नहीं। एक क्यारी से 40 से 45 दिन में 30 से 35 किलो कम्पोस्ट मिलता है। खाद हाथ से निकालें, छाया में सुखाकर छान लें। दो महीने में केंचुए करीब दोगुने हो जाते हैं।
गन्ने में कितनी मात्रा, कब डालें
कृषि विशेषज्ञों की सामान्य सिफारिश के अनुसार फसलों में 6 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ केंचुआ खाद डाली जाती है। कुछ स्रोतों में 2 टन प्रति हेक्टेयर की दर भी बताई जाती है, जो लगभग इतनी ही पड़ती है।
डालने का सही समय बुवाई के समय है। खेत तैयार करते समय खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिला दें। पेड़ी में कटाई के बाद गुड़ाई के साथ भी दे सकते हैं। यह रासायनिक खाद का पूरा विकल्प नहीं, पूरक है। नियमित इस्तेमाल से रासायनिक खाद की जरूरत धीरे-धीरे घटती जाती है।
यूपी में अनुदान: कहां मिलेगा, कैसे आवेदन करें
यूपी में वर्मी कम्पोस्ट इकाइयों पर अनुदान की योजनाएं जिला स्तर पर चलती हैं। हाल में शाहजहांपुर में उद्यान विभाग ने वर्मी बेड के लिए आवेदन मांगे थे: एक बेड की लागत करीब 8,000 रुपये मानी गई, जिस पर 75 प्रतिशत अनुदान (6,000 रुपये) दिया जा रहा है। किसान को सिर्फ 2,000 रुपये लगाने होते हैं। आवेदन CSC के माध्यम से पारदर्शी किसान सेवा योजना पोर्टल पर होता है, चयन पहले आओ-पहले पाओ पर।
योजनाएं जिले-दर-जिले अलग होती हैं, इसलिए अपने जिले की स्थिति जिला उद्यान अधिकारी से जरूर पता करें। राज्य के अनुपूरक बजट में वर्मी कम्पोस्ट अनुदान के लिए 50 करोड़ रुपये का प्रावधान भी है।
3 गलतियां जो पूरी मेहनत बर्बाद कर देती हैं
पहली गलती: बेड को बिना छांव के धूप में छोड़ देना। तेज धूप में केंचुए मर जाते हैं और बेड सूखकर बेकार हो जाता है।
दूसरी गलती: जरूरत से ज्यादा पानी डालना। बेड में पानी भर जाए तो हवा नहीं मिलती, सड़ांध आती है और केंचुए ऊपर भागने लगते हैं। पानी हमेशा छिड़काव से दें।
तीसरी गलती: तैयार खाद को धूप में सुखाना। धूप में लाभदायक सूक्ष्मजीव मर जाते हैं, हमेशा छाया में सुखाएं।
मुख्य बातें
- 10x3x2 फीट के बेड या 3x2x1 मीटर के गड्ढे में Eisenia foetida केंचुओं से 45-60 दिन में केंचुआ खाद तैयार होती है।
- गन्ने में 6-8 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से बुवाई के समय मिट्टी में मिलाकर डालें; यह रासायनिक खाद का पूरक है।
- यूपी में वर्मी बेड पर जिला उद्यान विभाग से 75% तक अनुदान मिल सकता है; अपने जिले की योजना जिला उद्यान अधिकारी से पता करें।
स्रोत: ट्रैक्टर जंक्शन (उद्यान विभाग, शाहजहांपुर), कृषि जागरण, किसान इंडिया, देहात, द ट्रिब्यून (कृषि विशेषांक)।
