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कच्चा गन्ना भेजा तो कटौती पक्की: कटाई का सही समय तय करने के 6 नियम

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 23 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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कच्चा गन्ना भेजा तो कटौती पक्की: कटाई का सही समय तय करने के 6 नियम

पश्चिमी यूपी के खेतों में इस वक्त एक ही चर्चा है। पेराई शुरू होने वाली है, मिल से पर्ची की बात चल रही है, और हर किसान के मन में वही पुराना सवाल: गन्ना अभी काट दूं या दो-तीन हफ्ते रुकूं? पड़ोसी ने काटना शुरू कर दिया, मजदूर भी हफ्ते भर बाद मिलने मुश्किल होंगे, लेकिन डर यह कि कहीं कच्चा गन्ना भेज दिया तो मिल में कटौती न लग जाए।

यह डर बेबुनियाद नहीं है। कच्चे गन्ने में चीनी कम होती है और खराब या कच्चे गन्ने पर मिलें कटौती लगा देती हैं। दूसरी तरफ जरूरत से ज्यादा देर तक खेत में खड़ा गन्ना भी नुकसान देता है, वजन घटता है और पाला पड़ गया तो खेल ही खत्म।

नियम 1: किस्म का कैलेंडर पकड़ो, पड़ोसी का नहीं

सबसे बड़ी गलती यहीं होती है। पड़ोसी ने काट दिया तो हमने भी काट दिया। जबकि हर किस्म के पकने का अपना समय होता है।

मोटा हिसाब यह है: अगेती किस्में पहले पकती हैं, इन्हें नवंबर-दिसंबर में काटना ठीक रहता है। मध्यंती किस्में जनवरी-फरवरी में, और पछेती किस्में मार्च-अप्रैल तक अपना पूरा रस देती हैं। अगर आपने अगेती बोई है और फरवरी तक इंतजार किया, या पछेती दिसंबर में काट दी, तो दोनों हाल में नुकसान आपका है।

बीज लेते वक्त किस्म का नाम और उसकी अवधि कागज पर नोट कर लो। कटाई का महीना उसी दिन तय हो जाता है, जिस दिन बुवाई होती है। मिल का सट्टा और पर्ची भी इसी कैलेंडर के हिसाब से मांगो।

नियम 2: आंखों से परिपक्वता पढ़ना सीखो

मीटर हर किसान के पास नहीं होता, लेकिन आंखें सबके पास हैं। पके गन्ने के कुछ साफ संकेत होते हैं।

नीचे की पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती हैं, जबकि ऊपर का हिस्सा हरा रहता है। गन्ने को अंगुली से ठोककर देखो, पके गन्ने में हल्की गूंज जैसी आवाज आती है। एक गांठ तोड़कर रस चखो, पके गन्ने का रस गाढ़ा मीठा लगता है।

यह पुरानी किसान-विद्या है, पर आज भी काम करती है।

नियम 3: ब्रिक्स मीटर से हिसाब पक्का करो

अगर हैंड रिफ्रैक्टोमीटर मिल जाए तो सोने पे सुहागा। यह छोटा सा यंत्र गन्ने के रस में चीनी की मात्रा बताता है, जिसे ब्रिक्स कहते हैं। आम तौर पर 18 ब्रिक्स से ऊपर का रस पके गन्ने का माना जाता है।

सही तरीका यह है: सुबह के समय खेत के 3-4 अलग-अलग हिस्सों से गन्ना तोड़ो, हर एक का रस निकालकर जांचो और औसत निकालो। एक ही गन्ने की जांच पर फैसला मत करो, क्योंकि खेत के एक कोने का गन्ना दूसरे से अलग हो सकता है। धूप निकलने के बाद दोपहर में जांच करने से रीडिंग थोड़ी अलग आती है, इसलिए समय एक जैसा रखो।

मीटर न हो तो गन्ना विकास विभाग के फील्ड स्टाफ या मिल के केन इंस्पेक्टर से जांच करवाने को कह सकते हो। पर्ची से पहले यह एक जांच कटौती से बचने का सबसे सस्ता बीमा है।

नियम 4: कटा गन्ना खेत में मत सड़ाओ

कटाई का समय तय करना आधी लड़ाई है, बाकी आधी यह है कि कटा गन्ना कितनी जल्दी मिल पहुंचे। कटा हुआ गन्ना सांस लेता रहता है, उसका वजन और रस दोनों घटते हैं। जितनी देर वह खेत या ट्रॉली में पड़ा रहेगा, तौल में उतना ही घटेगा।

इसलिए कटाई तभी शुरू करो जब पर्ची पक्की हो और ट्रॉली तैयार हो। एक बार कटाई शुरू हो जाए तो उसे बीच में रोककर 4-5 दिन मत छोड़ो। कटाई की रफ्तार उतनी ही रखो जितनी मिल तक पहुंचाने की क्षमता हो।

नियम 5: काटो सही तरीके से, सफाई के साथ

मिल में कटौती की एक बड़ी वजह गंदा गन्ना होता है। सूखी पत्तियां, मिट्टी, जड़ का गंदा हिस्सा, ये सब तौल में आते हैं और मिल इन्हें काटती है।

गन्ने को जमीन के बिल्कुल पास से काटो, क्योंकि चीनी सबसे ज्यादा नीचे के हिस्से में होती है। ऊपर का कच्चा, हरा सिरा अलग कर दो। सूखी पत्तियां खेत में ही झाड़ दो, मिल तक मत पहुंचाओ। बंधाई साफ-सुथरी हो ताकि तौल के समय कोई बहाना न बने।

यह काम मेहनत वाला लगता है, पर हिसाब सीधा है। साफ गन्ने पर कटौती का सवाल ही नहीं उठता, और तौल में जो दिखता है वही बिकता है।

नियम 6: मौसम को भी कैलेंडर में रखो

दिसंबर-जनवरी में पाला पड़ने का खतरा रहता है। पाला पड़े गन्ने का रस खराब होने लगता है, इसलिए पाला संभावित इलाकों में पछेती किस्म की कटाई को बहुत आखिर तक मत खींचो।

इसी तरह तेज हवा में गिरा हुआ गन्ना जल्दी काटो। गिरे गन्ने में नमी घुसती है और वजन घटता है। अगर खेत का कुछ हिस्सा गिर गया है, तो उसे पहले काटकर निकालो।

बारिश के बाद गीले खेत में ट्रॉली फंसती है, इसलिए मौसम का अनुमान देखकर कटाई के 2-3 दिन पहले ही ट्रैक्टर-ट्रॉली का इंतजाम कर लो।

किसान के लिए सीधा हिसाब

सच यह है कि चीनी की रिकवरी का हिसाब मिल का है, किसान का हिसाब वजन और कटौती का है। सही समय पर काटा, साफ-सुथरा गन्ना समय पर मिल पहुंचा दो, तो तौल पूरी मिलेगी, कटौती नहीं लगेगी और भुगतान में अड़चन नहीं आएगी। गलत समय पर काटा गन्ना चाहे जितना हो, हर क्विंटल पर नुकसान देता है।

इस सीजन में कटाई शुरू करने से पहले इन 6 नियमों को एक बार अपने खेत पर लागू करके देखो। पर्ची, किस्म और मौसम, तीनों का मेल बैठ गया तो समझो आधी फसल की कीमत वहीं पक्की हो गई।

मुख्य बातें

  • अगेती किस्म नवंबर-दिसंबर, मध्यंती जनवरी-फरवरी और पछेती मार्च-अप्रैल में काटो; पड़ोसी को देखकर फैसला मत करो।
  • 18 ब्रिक्स से ऊपर का रस और पीली-सूखी निचली पत्तियां पके गन्ने की निशानी हैं; मीटर न हो तो केन इंस्पेक्टर से जांच करवाओ।
  • कटा गन्ना जल्दी मिल पहुंचाओ, जमीन के पास से काटो और सूखी पत्तियां खेत में ही साफ करो, कटौती से बचोगे।

स्रोत: DeHaat कृषि सलाह (गन्ना खेती परामर्श), Krishi Jagran फसल कैलेंडर (गन्ना पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज), यूपी गन्ना विकास विभाग की सामान्य सिफारिशें।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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