पहले अगेती, फिर मध्यम, अंत में देर वाली: किस्म के हिसाब से कटाई का सही क्रम

मिल का गेट खुलते ही गाँव में एक ही सवाल गूँजता है। परची हाथ में है, ट्रॉली खड़ी है, मजदूर टोली भी तैयार है। फिर भी किसान सोचता है कि पहले कौन सा खेत काटा जाए। रास्ते के पास वाला, या जो किस्म सबसे पहले पकी है। इसी एक फैसले पर पूरे सीजन का वजन और चीनी का हिसाब टिका होता है।
हर किस्म एक ही दिन नहीं पकती। कोई नवंबर में ही चीनी से भर जाती है, कोई जनवरी तक रंग दिखाती है और कोई फरवरी के बाद ही तैयार होती है। जो किसान इस फर्क को समझकर क्रम बनाता है, उसका गन्ना सही समय पर मिल पहुँचता है। सुविधा के हिसाब से काटने वाले को पका गन्ना देर से और कच्चा गन्ना जल्दी काटने का नुकसान उठाना पड़ता है।
किस्मों को तीन टोलियों में बाँटिए
पहला काम खेतों की सूची बनाना है। हर खेत के सामने किस्म का नाम, बुवाई की तारीख और पौधा है या पेड़ी, यह लिख लीजिए। फिर किस्मों को तीन टोलियों में बाँट दीजिए। अगेती, मध्यम और देर से पकने वाली। यही बँटवारा कटाई क्रम की रीढ़ बनेगा।
अगेती किस्मों में चीनी जल्दी चढ़ती है। पश्चिमी और मध्य यूपी में सबसे ज्यादा बोई जाने वाली अगेती किस्म Co 0238 इसका उदाहरण है। इसके प्रजनकों के अनुसार 300 दिन की उम्र पर इसके रस में करीब 18 प्रतिशत सुक्रोज मिलता है, जो मार्च अप्रैल तक करीब 20 प्रतिशत तक पहुँच जाता है। इसे आखिर तक खड़ा रखना समझदारी नहीं है, क्योंकि खड़ा गन्ना जितना रुकेगा, वजन घटने का खतरा उतना बढ़ेगा।
मध्यम किस्में सीजन के बीच में तैयार होती हैं। इनका चीनी स्तर शुरुआत में अगेती किस्मों से पीछे रहता है, लेकिन समय के साथ बराबरी पर आ जाता है। इन्हें अगेती किस्मों के बाद काटिए। देर से पकने वाली किस्मों को सबसे आखिर में रखिए, क्योंकि इन्हें जल्दी काटने पर चीनी का नुकसान तय है।
नई किस्मों पर भी यही नियम लागू होता है। सीतापुर की एक किसान गोष्ठी में विशेषज्ञों ने Co 0118, CoS 13231, CoS 13235 और CoLk 14201 जैसी उन्नत किस्मों का रकबा बढ़ाने की सलाह दी थी। बीज लेते समय ही किस्म का पकने का वर्ग पूछ लीजिए।
हाथ के मीटर से पक्का फैसला लीजिए
किस्म का वर्ग अंदाजे से नहीं, जांच से पक्का होता है। हैंड रिफ्रैक्टोमीटर नाम का छोटा यंत्र हथेली में आ जाता है और खेत में ही रस की ब्रिक्स बता देता है। गन्ने के ऊपरी, बीच के और निचले हिस्से की ब्रिक्स अलग अलग देखिए। तीनों में फर्क बहुत कम रह जाए तो गन्ना पकने के करीब है।
जांच एक ही गन्ने पर मत कीजिए। खेत के अलग अलग कोनों से चार पाँच गन्ने चुनिए, क्योंकि सूखे कोने का गन्ना और हरे कोने का गन्ना एक जैसा नहीं होता। ज्यादातर गन्नों की ब्रिक्स अच्छी आए तो खेत तैयार है। फर्क ज्यादा हो तो कुछ दिन और रुकिए।
ब्रिक्स जांच परची के इंतजार से मत जोड़िए। परची मिलने से एक दो हफ्ते पहले ही जांच शुरू कर दीजिए, ताकि पता चल जाए कि कौन सा खेत पहले तैयार होगा। हड़बड़ी में किया गया फैसला अक्सर गलत खेत को पहले कटवा देता है।
पेड़ी का हिसाब अलग से लगाइए
पौधे और पेड़ी का क्रम एक साथ मत गिनिए। पेड़ी की उम्र अलग तरीके से गिनी जाती है, क्योंकि पिछली कटाई के बाद उसकी बढ़वार दोबारा शुरू होती है। इसलिए पेड़ी वाले खेत की सूची अलग बनाइए और उसकी किस्म के वर्ग के हिसाब से ही नंबर लगाइए। पेड़ी को सिर्फ इसलिए पहले मत काटिए कि वह पुराना खेत है।
जिस खेत की पिछली कटाई देर से हुई थी, उसकी पेड़ी भी देर से बढ़ी होगी। नंबर तय करते समय पिछली कटाई की तारीख भी देख लीजिए।
हफ्तेवार योजना कागज पर उतारिए
क्रम तय हो जाए तो उसे हफ्तों में बाँट दीजिए। अगेती खेत पहले हफ्ते में, मध्यम खेत बीच के हफ्तों में और देर वाली किस्म आखिरी दौर में। हर खेत के साथ मजदूर टोली, ट्रॉली और केंद्र पर तौल का समय भी लिख लीजिए।
योजना में दो तीन दिन का अंतराल जरूर छोड़िए। बारिश, ट्रॉली की खराबी या केंद्र पर भीड़ से कटाई रुक सकती है। बिना अंतराल के एक दिन की रुकावट पूरा क्रम बिगाड़ देती है।
केंद्र की दूरी भी क्रम में भूमिका निभाती है। दूर के केंद्र वाले खेत की कटाई ऐसे दिन रखिए जब ट्रॉली और मजदूर दोनों पूरे हों। दूर के खेत में कटाई शुरू होने के बाद उसे बीच में रोकना महँगा पड़ता है, क्योंकि कटा गन्ना खेत में पड़ा रहे तो वजन घटता है।
ये गलतियाँ क्रम बिगाड़ देती हैं
सबसे आम गलती सुविधा के हिसाब से काटना है। रास्ते के पास वाला खेत पहले, दूर वाला बाद में। इस तरीके में किस्म का पकना पीछे छूट जाता है। दूसरी गलती सारे खेत एक साथ काटकर ट्रॉली की लाइन में लगा देना है। कटा गन्ना दो तीन दिन खेत में पड़ा रहे तो वजन का नुकसान तय है।
तीसरी गलती पड़ोसी की देखा देखी करना है। पड़ोसी ने खेत काट लिया तो किसान भी काट देता है, भले ही उसकी किस्म अलग हो और अभी पकी न हो। चौथी गलती गेहूँ की बुवाई की जल्दी में गन्ना काटना है। गेहूँ के लिए अगेती खेत पहले खाली कीजिए, ताकि दोनों फसलों का समय सध जाए।
कटाई का सही क्रम कोई बड़ा खर्चा नहीं माँगता। कागज, किस्म की जानकारी और ब्रिक्स जांच, बस यही तीन चीजें चाहिए। सीजन की शुरुआत में एक दिन निकालकर योजना बना लीजिए। वजन बचेगा, चीनी का स्तर सही रहेगा और गेहूँ की बुवाई भी समय पर हो जाएगी।
मुख्य बातें
- अगेती किस्म पहले, मध्यम बीच में और देर से पकने वाली किस्म सबसे आखिर में काटिए, सुविधा के हिसाब से नहीं।
- ब्रिक्स जांच से पकने की पुष्टि कीजिए, खेत के अलग अलग कोनों से चार पाँच गन्नों की जांच करके फैसला लीजिए।
- पेड़ी का क्रम अलग से बनाइए और हफ्तेवार योजना में दो तीन दिन का अंतराल जरूर रखिए।
स्रोत: ICAR Sugarcane Breeding Institute, ChiniMandi और उत्तर प्रदेश गन्ना विकास विभाग।
