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कटा गन्ना 72 घंटे में 7-10% वजन घटा लेता है: शोध के आंकड़े और बचाव के 5 आसान उपाय

✍️ Aamir Raza · 🗓 22 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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कटा गन्ना 72 घंटे में 7-10% वजन घटा लेता है: शोध के आंकड़े और बचाव के 5 आसान उपाय

सोचिए, आपकी ट्रॉली में 100 क्विंटल गन्ना लदा है। मिल का नंबर न आने की वजह से वह गन्ना तीन दिन वहीं पड़ा रह जाता है। वैज्ञानिक शोध कहता है कि इन 72 घंटों में उस गन्ने का 7 से 10 प्रतिशत वजन गायब हो सकता है। यानी 100 क्विंटल में से 7 से 10 क्विंटल गन्ना बिना काटे ही “घट” गया।

भुगतान तो वजन के हिसाब से मिलता है। पेराई सत्र 2025-26 के भाव (अगेती गन्ना 400 रुपये प्रति क्विंटल) से हिसाब लगाएं, तो यह 2,800 से 4,000 रुपये की सीधी चोट है। यह नंबर हवा में नहीं उड़ाया गया है। भारत के गन्ना वैज्ञानिकों के शोध (PMC में छपी समीक्षा) यही बताते हैं। पेराई सत्र 2026-27 बस शुरू होने वाला है, इसलिए यह जानकारी हर किसान के काम की है।

कटाई के बाद गन्ने के भीतर चलता है “उल्टा” काम

गन्ना खेत में खड़ा हो तो चीनी बनाता रहता है। लेकिन कटते ही उसके भीतर उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। पौधा अब भी “सांस” लेता है, और कटे सिरों और पत्तियों से नमी तेजी से उड़ती है। इसी के साथ गन्ने में मौजूद एंजाइम चीनी को तोड़ना शुरू कर देते हैं। कटे सिरे काले पड़ने लगते हैं और रस में डेक्सट्रान नाम का चिपचिपा पदार्थ बनता है।

दूसरी तरफ धूप और हवा गन्ने को सुखाती हैं। गन्ना गेहूं या धान जैसा अनाज नहीं, जिसे काटकर हफ्तों रखा जा सके। जितनी देर कटा गन्ना खेत, ट्रॉली या ट्रक में पड़ा रहता है, उतना ही वजन और चीनी दोनों घटते हैं।

आंकड़े: घंटे-दर-घंटे नुकसान

PMC की शोध समीक्षा (सोलोमन और अन्य वैज्ञानिकों के अध्ययन) के मुताबिक, भारत में खुले में रखा गन्ना औसतन हर दिन 0.98 से 1.6 प्रतिशत वजन खोता है। 72 घंटे बाद यह नुकसान 7 से 10 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, और 96 घंटे में 17 प्रतिशत तक जा सकता है।

सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि नुकसान 24 घंटे के भीतर भी मापने लायक होता है। एकेडेमिया पर प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि भंडारण के पहले दिन से ही वजन में उल्लेखनीय कमी शुरू हो जाती है। आंध्र प्रदेश के पेरुमल्लापल्ले कृषि अनुसंधान केंद्र के अध्ययन में यह भी सामने आया कि कटाई के 48 घंटे बाद रस में सुक्रोज, शुद्धता और सीसीएस घटने लगते हैं।

वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार, भारत जैसे देशों में जहां भुगतान वजन के आधार पर होता है, किसानों को हर टन गन्ने पर 2 से 3 अमेरिकी डॉलर का नुकसान होता है। यानी देरी की कीमत सीधे किसान की जेब से निकलती है।

सर्दी की कटाई में राहत, पर अक्टूबर-नवंबर में सावधानी

शोध में एक उम्मीद की किरण भी है। सर्दियों में कटे गन्ने का नुकसान गर्मियों के मुकाबले बहुत कम होता है। एक अध्ययन में 7 दिन रखने के बाद सर्दी में कटे गन्ने का वजन सिर्फ 2.92 प्रतिशत घटा, जबकि गर्मी में कटे गन्ने का 25.3 प्रतिशत।

लेकिन यूपी में अक्टूबर-नवंबर की धूप अभी तेज होती है। शोध यह भी बताता है कि टुकड़ों में कटा गन्ना पूरे गन्ने के मुकाबले ज्यादा वजन खोता है। इसलिए सत्र की शुरुआत में गन्ने को छाया में रखना और पूरे डंठल भेजना खास जरूरी है।

वजन बचाने के 5 आसान उपाय

1. पर्ची का कैलेंडर देखकर ही काटें। सबसे बड़ा नुकसान तब होता है जब गन्ना काट तो लिया, पर मिल से पर्ची या इंडेंट नहीं आया। ई-गन्ना ऐप पर अपना कैलेंडर पहले देखें, उसी के हिसाब से कटाई की तारीख तय करें।

2. कटा गन्ना पत्ती से ढककर रखें। अध्ययन में पाया गया कि 10 दिन बाद पत्ती से ढके गन्ने में चीनी 12.97 प्रतिशत बची, जबकि खुले में रखे गन्ने में सिर्फ 10.87 प्रतिशत। तुरंत सप्लाई न हो सके तो गन्ने को छांव वाली जगह रखें।

3. सुबह काटें, जल्दी भेजें। सुबह का कटा गन्ना धूप से कम सूखता है। कोशिश करें कि सुबह काटा गन्ना उसी दिन या अगले दिन क्रय केंद्र पहुंच जाए।

4. टुकड़ों में न काटें। शोध कहता है कि कटे हुए टुकड़ों से नमी ज्यादा उड़ती है। पूरा डंठल जितना हो सके, साबुत रखें।

5. नजदीकी क्रय केंद्र चुनें। ट्रॉली में गन्ना घंटों धूप में रहता है। सुबह जल्दी निकलें ताकि गन्ना जल्दी तौले।

इस सत्र की तारीखें: मिलें कब चलेंगी

अमर उजाला की सीतापुर से 10 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला प्रशासन की समीक्षा बैठक में बताया गया कि मौसम अनुकूल रहने पर अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह के बीच मिलों में पेराई शुरू होने की संभावना है। वहां मिलों में मरम्मत का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

सरकारी स्तर पर भी यही संकेत हैं। 14 अक्टूबर को चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग ने बताया कि अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से मिलों का संचालन शुरू हो जाएगा, जिससे नवंबर में नए सत्र 2026-27 की चीनी बाजार में आने लगेगी। यानी पर्ची आने में अब ज्यादा दिन नहीं हैं।

मुख्य बातें

  • कटाई के 72 घंटे में गन्ना 7-10% वजन खो देता है, हर दिन करीब 1-1.6% की कमी होती है।
  • चीनी की मात्रा 48 घंटे के बाद घटना शुरू होती है; टुकड़ों में कटा और धूप में खुला गन्ना सबसे ज्यादा घटता है।
  • पर्ची के कैलेंडर के हिसाब से काटें, कटा गन्ना पत्ती से ढककर छांव में रखें और सुबह काटकर जल्दी भेजें।

स्रोत: PMC/नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन (गन्ना शोध समीक्षा); एकेडेमिया (कटाई-पश्चात नुकसान अध्ययन); अमर उजाला, सीतापुर (10 अक्टूबर 2026); चिनीमंडी (9 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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