Co-0238 की जगह Karan-20: नई गन्ना किस्म से 144.6 टन/हेक्टेयर की उम्मीद

पश्चिमी यूपी के जिन किसानों ने सालों से Co-0238 लगाया, वे अब खेत में खड़े होकर यही सवाल पूछ रहे हैं: इसमें लाल सड़न लग गया, अब बोएं क्या? इसका जवाब वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कोयंबटूर स्थित गन्ना प्रजनन संस्थान ने Co-20016 नाम की नई किस्म तैयार की है, जिसे Karan-20 भी कहा जा रहा है।
छह साल में 126.4 से 89.5 लाख टन: आंकड़ा जो डराता है
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। 2019-20 में यहां 126.4 लाख टन चीनी बनी थी, जो 2025-26 तक घटकर 89.5 लाख टन रह गई। छह साल में करीब 30 प्रतिशत की गिरावट। इसकी सबसे बड़ी वजह वह किस्म है जो कभी वंडर किस्म कहलाती थी, Co-0238 (करण 4)। इस किस्म में रेड रॉट यानी लाल सड़न नाम की फफूंद बीमारी इतनी तेजी से फैली कि पैदावार गिरती चली गई।
इसका असर राज्य की करीब 120 चीनी मिलों पर भी पड़ा। मिलों में पहुंचने वाले गन्ने की कुल मात्रा छह साल में पांचवें हिस्से से ज्यादा घट गई। पिछले सत्र में 121 मिलों ने पेराई शुरू की थी, लेकिन 112 को गन्ने की कमी से समय से पहले बंद करना पड़ा।
किसान पर सीधा असर: कम तौल, मिलें जल्दी बंद
आंकड़े दूर की बात लग सकते हैं, लेकिन किसान पर असर सीधा है। Co-0238 में लाल सड़न लगने से उपज घटती है। उपज घटी तो मिल तक गन्ना कम पहुंचा। शामली की ऊन मिल को मार्च में ही, करीब दो हफ्ते पहले, पेराई बंद करनी पड़ी। मिल जल्दी बंद हो जाए तो देर से पर्ची कटाने वाले किसान का गन्ना खेत में ही सूखता रह जाता है। गन्ना विकास विभाग के आंकड़े बताते हैं कि मिलों को मिलने वाला गन्ना 937.63 लाख टन से घटकर 874.51 लाख टन रह गया।
एक अच्छी खबर भी है। चीनी की रिकवरी 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 10.2 प्रतिशत हुई, जो महाराष्ट्र से भी ज्यादा है। यानी जो गन्ना मिल पहुंचा, उसमें चीनी की मात्रा बेहतर थी।
Karan-20 कितनी बेहतर: तीन साल के परीक्षण के आंकड़े
अब नई किस्म की बात। अगस्त 2023 में इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) ने ICAR के गन्ना प्रजनन संस्थान के साथ मिलकर Co-20016 और Co-21012 के परीक्षण शुरू किए थे। तीन साल तक चले इन परीक्षणों में दो बार नया गन्ना और एक बार पेड़ी फसल की जांच हुई। महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश की कुल 16 मिलों में यह परीक्षण हुए, जिनमें त्रिवेणी, बलरामपुर, डीसीएम श्रीराम, मवाना, अवध, धामपुर, केएम शुगर और सेकसारिया बिसवां जैसी यूपी की बड़ी मिलें शामिल थीं।
नतीजे उत्साहजनक हैं। Co-20016 की तीन साल की औसत पैदावार 144.6 टन प्रति हेक्टेयर रही, जबकि Co-0238 की 116.4 टन प्रति हेक्टेयर। दस महीने की फसल में गन्ने के रस में चीनी की मात्रा भी Co-20016 में 18.7 प्रतिशत रही, जो Co-0238 के 18.3 प्रतिशत से ज्यादा है। ISMA के महानिदेशक दीपक बल्लानी के मुताबिक दोनों किस्मों के परीक्षण के नतीजे काफी उत्साहजनक हैं।
किसान के लिए इसका सीधा मतलब है: प्रति हेक्टेयर करीब 28 टन ज्यादा उपज।
रिलीज कब होगी: अक्टूबर की बैठक पर नजर
27 मई को AICRP के तहत गन्ने पर काम करने वाली वैरायटी आइडेंटिफिकेशन कमेटी ने Co-0238 की जगह Co-20016 को चुना है। अब यह केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति के सामने रखी जाएगी, जिसकी बैठक अक्टूबर में होने की उम्मीद है। मंजूरी के बाद किसान इसे वसंत (फरवरी-मार्च), ग्रीष्म (अप्रैल-मई) या शरद (मध्य सितंबर से मध्य नवंबर) की बुवाई में लगा सकेंगे।
ध्यान रहे, अभी शरदकालीन बुवाई का मौसम चल रहा है। लेकिन रिलीज की औपचारिक प्रक्रिया और शुद्ध बीज किसानों तक पहुंचने में समय लगेगा। ऐसे में किसी बीज विक्रेता के “Karan-20” के नाम पर महंगा बीज बेचने के झांसे में न आएं। नई किस्म का बीज हमेशा अपने मिल क्षेत्र के गन्ना अधिकारी से सत्यापित करके ही लें।
अभी से क्या करें: लाल सड़न से फसल बचाने के उपाय
नई किस्म आने तक मौजूदा फसल को बचाना भी जरूरी है। लाल सड़न से ग्रस्त खेत से बीज कभी न लें, क्योंकि रोगी गन्ने की आंख से नया पौधा भी रोगी होगा। खेत में जलभराव न होने दें, नमी में फफूंद तेजी से बढ़ता है।
एक बात और। इस साल बड़ी मात्रा में गन्ना खांडसारी इकाइयों और कोल्हुओं की ओर गया, जिससे मिलों तक पहुंचा गन्ना घटा। किसान के हित में यही है कि सट्टा बंधा गन्ना मिल को ही जाए, ताकि पर्ची और भुगतान की व्यवस्था बनी रहे।
Co-0238 ने एक दशक तक यूपी के किसानों का साथ दिया। अब विज्ञान ने उसका उत्तराधिकारी तैयार कर दिया है। अक्टूबर की बैठक अगर हरी झंडी देती है, तो अगले बुवाई सत्र में खेतों में नई उम्मीद लहलहाएगी।
मुख्य बातें
- यूपी का चीनी उत्पादन 2019-20 के 126.4 लाख टन से घटकर 2025-26 में 89.5 लाख टन रह गया; बड़ी वजह Co-0238 में लाल सड़न बीमारी।
- ICAR की नई किस्म Co-20016 (Karan-20) के तीन साल के परीक्षण में 144.6 टन/हेक्टेयर उपज मिली, Co-0238 से 28 टन ज्यादा; चीनी की मात्रा 18.7%।
- 27 मई को AICRP कमेटी ने Co-0238 की जगह इसे चुना; अक्टूबर में केंद्रीय समिति की बैठक के बाद रिलीज संभव, फिर तीनों बुवाई मौसम में किसान लगा सकेंगे।
स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस (28 सितंबर 2026), जनसत्ता (28 सितंबर 2026), चिनीमंडी/टाइम्स ऑफ इंडिया
