गन्ने की पर्ची से पेमेंट तक: 1 डायरी में पूरा हिसाब, बकाया कभी नहीं छूटेगा

मुजफ्फरनगर के एक किसान ने पिछले सीजन में 14 ट्रॉली गन्ना मिल को दिया। पेमेंट आया तो लगा कि कुछ कम है, लेकिन कितना कम, किस पर्ची का, यह कोई बता नहीं पाया। पर्चियां कहीं पड़ी थीं, कुछ धुल गई थीं, कुछ का नंबर ही याद नहीं रहा। मिल के दफ्तर में जवाब मिला कि रिकॉर्ड लेकर आओ, और रिकॉर्ड था ही नहीं। यह कहानी किसी एक किसान की नहीं है। पर्ची, तौल और पेमेंट का हिसाब न रखने की कीमत हर साल हजारों किसान चुकाते हैं, बिना यह जाने कि उनका कितना पैसा अटका है।
गन्ने का हिसाब किताब मुश्किल काम नहीं है। कंप्यूटर या महंगा ऐप नहीं चाहिए, एक मोटी कॉपी, एक पेन और हर पर्ची पर पांच मिनट काफी हैं। यह आदत डालने वाला किसान सीजन पूरा होने पर ठीक ठीक बता सकता है कि कितना गन्ना दिया, कितना पैसा बना, कितना मिला और कितना बाकी है।
डायरी के पांच हिस्से, बस इतना ही चाहिए
डायरी को पांच हिस्सों में बांट लें। सट्टा और खेत का हिस्सा: रकबा, किस्म, समिति, मिल और गन्ना कोड। खर्च का हिस्सा: बीज, खाद, दवा, सिंचाई, मजदूरी, ट्रॉली, हर खर्च की तारीख और रकम। पर्ची और तौल का हिस्सा: पर्ची नंबर, तारीख, केंद्र और वजन। पेमेंट का हिस्सा: किस तारीख को कितना पैसा आया, किस पर्ची के बदले। शिकायत का हिस्सा: किससे बात हुई, कब हुई, क्या जवाब मिला।
नया पेज शुरू करते समय सबसे ऊपर सीजन लिखें, जैसे 2026-27, और हर साल की डायरी अलग रखें। पुरानी डायरी संभालकर रखने से साल दर साल तुलना हो जाती है कि रकबा बढ़ा या घटा और किस मिल का पेमेंट सबसे देर से आया।
पर्ची मिलते ही पहला काम: नंबर नोट करें
उत्तर प्रदेश में गन्ना पर्ची का सिस्टम अब ऑनलाइन है। सर्वे, सट्टा, कैलेंडर और पर्ची जारी करने का काम स्मार्ट गन्ना किसान सिस्टम से होता है। पर्ची मोबाइल पर एसएमएस से मिलती है और ई-गन्ना ऐप पर भी दिखती है। caneup.in पोर्टल पर किसान अपना कैलेंडर, अनुमानित उत्पादन और पर्चियों का ब्योरा देख सकता है।
पर्ची मिलते ही उसका नंबर, तारीख और केंद्र डायरी में लिख लें। एसएमएस डिलीट हो जाता है, मोबाइल बदल जाता है, डायरी में लिखा नंबर रहता है। नंबर बदलने पर उसे गन्ना पर्यवेक्षक के जरिए तुरंत सिस्टम में अपडेट कराएं, क्योंकि पर्ची उसी रजिस्टर्ड नंबर पर आती है। गलत नंबर पर पर्ची न पहुंची तो गन्ना समय पर नहीं जाएगा और सूखने का नुकसान होगा।
कैलेंडर पर भी नजर रखें। सीजन से पहले दिखाए गए प्री-कैलेंडर में रकबा या उत्पादन गलत दिखे तो किसान सभा के जरिए आपत्ति दर्ज कराएं और उसकी तारीख डायरी में नोट करें।
तौल के दिन: पर्ची से वजन मिलाएं
तौल केंद्र से मिली तौल पर्ची को उसी दिन शाम को डायरी की एंट्री से मिलाना सबसे जरूरी काम है। कई बार तौल पर्ची ट्रॉली वाले के पास रह जाती है। वजन कम लगे या कटौती दिखे तो उसी दिन केंद्र पर पूछें, हफ्ते बाद न गवाह मिलेगा, न रिकॉर्ड।
रिजेक्ट या कटौती पर कारण, बताने वाले का नाम और तारीख लिखें। यही नोट बाद में शिकायत की बुनियाद बनता है। हर ट्रॉली की एंट्री अलग लाइन में करें।
पेमेंट मिलते ही: बैंक एंट्री से मिलान करें
पेमेंट सीधे बैंक खाते में डीबीटी से आता है। पैसा आते ही बैंक एंट्री को डायरी की पर्ची लिस्ट से मिलाएं और हर पेमेंट के सामने लिखें कि यह किन पर्चियों का पैसा है। इससे सीजन के बीच में ही पता चल जाता है कि कितनी पर्चियों का पैसा अटका है।
कानून के हिसाब से मिल को गन्ना खरीद के 14 दिन के अंदर भुगतान करना होता है और देरी पर ब्याज का प्रावधान है। बिना रिकॉर्ड के किसान यह साबित ही नहीं कर पाता कि कौन सी पर्ची का भुगतान कितने दिन लेट हुआ। इसलिए हर पर्ची के सामने दो तारीखें लिखें, गन्ना देने की और पैसा मिलने की।
पेमेंट अटके तो शिकायत की शुरुआत समिति और मिल स्तर से करें। गन्ना विभाग के टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी शिकायत दर्ज हो सकती है। फोन पर मिला शिकायत नंबर डायरी में लिख लें, उसी से फॉलोअप होगा।
खर्च का हिसाब: असली मुनाफा यहीं दिखता है
ज्यादातर किसान जानते हैं कि गन्ना बेचकर कितना पैसा आया, लेकिन कितना खर्च हुआ, यह कम ही जानते हैं। खाद की हर बोरी, दवा की हर बोतल, सिंचाई का डीजल या बिजली खर्च, मजदूरी का हर भुगतान तारीख के साथ लिखें। सीजन पूरा होने पर कुल खर्च को कुल क्विंटल से भाग दें तो प्रति क्विंटल लागत निकल आती है।
दाम का हिसाब उसी दर से लगाएं जो आपकी पर्ची या मिल के नोटिस पर दर्ज है। पुराने सीजन की दर नए सीजन पर लागू करना गलत नतीजा देगा। 2025-26 में यूपी में अगेती किस्म का राज्य परामर्श मूल्य 400 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य का 390 रुपये रहा था। हर सीजन की दर डायरी में अलग से लिखें।
सीजन खत्म होने पर: एक पेज का क्लोजिंग हिसाब
सीजन के आखिर में एक पेज पर पांच आंकड़े लिखें: कुल गन्ना, कुल बना पैसा, मिला पैसा, बाकी पैसा और कुल खर्च। यही पांच आंकड़े अगले सीजन की योजना की बुनियाद हैं। किसी मिल का पेमेंट हर साल लेट आता हो तो सट्टा बदलने का फैसला इन्हीं पर होगा, और जिस मद में खर्च हर साल बढ़ रहा हो, बचत की योजना उसी पर बनेगी।
डायरी को पानी और धूल से बचाकर रखें। जो किसान पर्ची, तौल और पेमेंट का हिसाब डायरी में रखता है, उसे मिल के सामने कभी खाली हाथ नहीं जाना पड़ता।
मुख्य बातें
- पर्ची मिलते ही उसका नंबर, तारीख और केंद्र डायरी में लिखें, एसएमएस पर भरोसा न रखें।
- हर ट्रॉली की तौल पर्ची उसी दिन डायरी से मिलाएं और कटौती का कारण नोट करें।
- पेमेंट की हर एंट्री पर्चियों से मिलाएं, 14 दिन की देरी और बकाया रकम खुद सामने आ जाएगी।
स्रोत: cane.up.gov.in और caneup.in पोर्टल पर उपलब्ध किसान सेवाएं, ई-गन्ना ऐप से जुड़ी विभागीय जानकारी, गन्ना भुगतान के 14 दिन के नियम और 2025-26 के राज्य परामर्श मूल्य से जुड़ी प्रकाशित खबरें।
