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मजदूर नहीं मिल रहे तो हार्वेस्टर से कटवाएँ गन्ना: ₹55/क्विंटल दर और 6% करदा

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 30 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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मजदूर नहीं मिल रहे तो हार्वेस्टर से कटवाएँ गन्ना: ₹55/क्विंटल दर और 6% करदा

परची हाथ में है, केंद्र का समय नजदीक आ रहा है और खेत में गन्ना खड़ा है। मजदूरों को फोन किया तो किसी ने हाँ नहीं की, किसी ने अगले हफ्ते का समय दिया। यह हाल इस पेराई सीजन में अकेले एक गाँव का नहीं है। मजदूरों की कमी और बढ़ती मजदूरी ने कटाई को गन्ने की खेती का सबसे अनिश्चित काम बना दिया है। ऐसे में केन हार्वेस्टर अब सिर्फ बड़े किसानों की चीज नहीं रह गई है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में समितियों और मिलों ने इस सीजन में पहली बार हार्वेस्टर से कटाई शुरू कराई है।

मशीन खेत में करती क्या है

केन हार्वेस्टर गन्ने की कटाई, पत्तियों की सफाई और गन्ने को टुकड़ों में काटने का काम एक साथ करता है। हाथ से कटाई में ये तीनों काम अलग-अलग होते हैं, इसलिए एक दिन में कई एकड़ गन्ना कट जाता है, जबकि मजदूरों से उतना काम कई दिन लेता है। पीलीभीत में गन्ना विकास परिषद ने इस सीजन सेल्फ प्रोपेल्ड केन हार्वेस्टर खरीदा है और एक पेराई सत्र में करीब 450 एकड़ गन्ने की कटाई का लक्ष्य रखा है। अंबेडकरनगर में भी इस सीजन पहली बार केन हार्वेस्टर से कटाई कराई जा रही है, जहाँ किसान बुकिंग के आधार पर इसका उपयोग कर सकेंगे।

दर कितनी है और खर्च परची से कैसे कटता है

बहराइच जिले के जरवलरोड में सहकारी गन्ना विकास समिति की बैठक में हार्वेस्टर से कटाई की दर ₹55 प्रति क्विंटल तय की गई है और करदा कटौती छह प्रतिशत निर्धारित की गई है। इच्छुक किसानों को ₹10 के स्टांप पर विभागीय प्रपत्र के माध्यम से अनुबंध कराना होता है। अनुबंध के बाद हार्वेस्टर सेंटर से परची जारी होती है और कटाई का खर्च किसान की गन्ना परची से काट लिया जाता है। करदा छह प्रतिशत सीधा वजन से कटता है, इसलिए सिर्फ दर मत देखें, करदे के बाद मिलने वाला वजन भी हिसाब में रखें।

किन खेतों में मशीन चलेगी, किनमें नहीं

हर खेत मशीन के लायक नहीं होता। पीलीभीत में कार्यशाला के दौरान किसानों को साफ कहा गया कि मशीन के सुचारु संचालन के लिए चार फीट की कतार दूरी रखनी होगी और ट्रेंच विधि से गन्ने की बुवाई करनी होगी। पुरानी पद्धति से बोए गए संकरे कतार वाले खेतों में मशीन ठीक से नहीं चल पाती। खेत के किनारे मशीन के घूमने की जगह भी चाहिए और रास्ता इतना चौड़ा हो कि मशीन और ट्रॉली दोनों पहुँच सकें। गिरा हुआ गन्ना मशीन के लिए सबसे मुश्किल काम है, ऐसे खेत में मशीन ज्यादा गन्ना छोड़ देती है। छोटा खेत हो तो मशीन बुलाना महँगा पड़ सकता है, क्योंकि आने-जाने का खर्च उसी खेत पर पड़ता है।

बुकिंग कैसे कराएँ

अभी ज्यादातर जिलों में हार्वेस्टर समिति या मिल के जरिए मिल रहा है। बहराइच में किसानों को पारले परसेंडी या आईपीएल जरवलरोड चीनी मिल के प्रबंधक से संपर्क करना बताया गया है। अंबेडकरनगर में गन्ना समिति की ओर से एक केन हार्वेस्टर उपलब्ध कराया गया है, जो बुकिंग के आधार पर चलेगा।

बुकिंग के लिए परची का समय पहले से पता होना जरूरी है। मशीन की माँग ज्यादा होती है, इसलिए परची मिलते ही समिति में नाम दर्ज करा दें। बुकिंग के वक्त तीन बातें लिखित में तय कर लें: कटाई की दर, करदा और कटाई के बाद खेत में बची पत्तियों का क्या होगा। मौखिक भरोसे पर मशीन मत बुलाएँ। ₹10 के स्टांप वाला अनुबंध इसी काम आता है।

मशीन खरीदना या किराए पर लेना

एक हार्वेस्टर की कीमत एक करोड़ रुपये से ऊपर जाती है। यह रकम किसी एक किसान के बस की बात नहीं है। मशीन का रखरखाव, डीजल, चालक और मरम्मत का खर्च साल भर चलता है, जबकि काम सिर्फ पेराई सीजन में होता है। लखीमपुर खीरी में पहली बार आ रहे हार्वेस्टर को किसानों को अनुदान पर उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है, लेकिन अनुदान की राह भी लंबी है।

सरकार की ओर से कस्टम हायरिंग सेंटर का रास्ता है। कृषि यंत्रीकरण की योजना के तहत मशीनों की खरीद पर 40 से 50 प्रतिशत तक की सहायता का प्रावधान है और कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना पर भी सहायता मिलती है। उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के पोर्टल पर समय-समय पर यंत्रों की बुकिंग खुलती है। गाँव के चार-पाँच किसान मिलकर या समिति के जरिए एक सेंटर बनाना, अकेले मशीन खरीदने से ज्यादा व्यावहारिक है।

महाराष्ट्र से सबक

महाराष्ट्र में मशीन से गन्ना कटाई का औसत 30 प्रतिशत से अधिक हो चुका है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह अभी शुरुआती दौर में है। लातूर की एक मिल ने 2025-26 के सत्र में लगभग शत-प्रतिशत गन्ना कटाई हार्वेस्टर से कराई है। वहाँ कतार की दूरी और ट्रेंच विधि अपनाने के बाद मशीन आम हो गई। उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए संकेत साफ है: अगले साल ट्रेंच विधि से बुवाई करने वाले ही मशीन का पूरा लाभ उठा पाएँगे।

बुकिंग से पहले की जाँच सूची

मशीन बुलाने से पहले खेत की कतार दूरी नाप लें। चार फीट से कम हो तो ऑपरेटर को बता दें। परची पर दर्ज किस्म और केंद्र का नाम मिला लें, क्योंकि हार्वेस्टर सेंटर से जारी परची तौल का आधार बनेगी। कटाई वाले दिन खेत के रास्ते पर ट्रॉली और मशीन की आवाजाही के लिए जगह खाली रखें। कटाई के बाद खेत में जाकर देखें कि कितना गन्ना छूटा है। अगर छूटा गन्ना ज्यादा लगे तो उसी वक्त ऑपरेटर से बात करें। अनुबंध की प्रति अपने पास रखें। शिकायत के लिए गन्ना विभाग का टोल फ्री नंबर 1800-121-3203 मोबाइल में सेव करके रखना भी जरूरी है।

मुख्य बातें

  • बहराइच में हार्वेस्टर कटाई की दर ₹55 प्रति क्विंटल और करदा छह प्रतिशत तय है, खर्च गन्ना परची से कटता है।
  • मशीन के लिए चार फीट की कतार दूरी और ट्रेंच विधि की बुवाई जरूरी है, गिरे हुए गन्ने में मशीन कमजोर पड़ती है।
  • अकेले मशीन खरीदना एक करोड़ से ऊपर का सौदा है, समिति या कस्टम हायरिंग सेंटर से किराए पर लेना छोटे किसान के लिए सही रास्ता है।

स्रोत: अमर उजाला (पीलीभीत, बहराइच), न्यूज18 (लखीमपुर खीरी), रूरल वॉइस, पीआईबी (कृषि यंत्रीकरण योजना)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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