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गन्ने से गुड़-खांडसारी का धंधा: 10 किलो गुड़ प्रति क्विंटल, मुनाफा बढ़ाने के 5 रास्ते

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 04 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने से गुड़-खांडसारी का धंधा: 10 किलो गुड़ प्रति क्विंटल, मुनाफा बढ़ाने के 5 रास्ते

मिल का पेराई सत्र शुरू होने से पहले गांव में एक किसान के पास पेड़ी का गन्ना खड़ा था। मिल की पर्ची अभी नहीं आई थी, और सरसों की बुवाई के लिए नकदी चाहिए थी। उसने कुछ गन्ना गांव के कोल्हू पर बेच दिया। दाम मिल के भाव से कम नहीं मिला, पैसा उसी दिन हाथ में आ गया। मिल से भुगतान का इंतजार हफ्तों खिंच सकता है, कोल्हू पर सौदा उसी दिन निपटता है।

गुड़ का हिसाब: एक क्विंटल गन्ने से कितना गुड़

करीब 100 किलो गन्ने से 10 किलो के आसपास गुड़ निकलता है। किस्म, रस की मिठास और कोल्हू की पेराई क्षमता से यह आंकड़ा थोड़ा ऊपर नीचे होता है, पर बजट बनाने के लिए 10 किलो का अनुमान काफी है।

इसे रुपये में बदलकर देखें। उत्तर प्रदेश में 2025-26 सत्र के लिए अगेती गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) 400 रुपये प्रति क्विंटल रहा है। APMC आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2025 में मुजफ्फरनगर मंडी में गुड़ का औसत भाव करीब 3,900 रुपये प्रति क्विंटल रहा, यानी 10 किलो गुड़ करीब 390 रुपये का बैठता है।

यह तुलना एक बात साफ करती है। गुड़ बनाकर बेचना अपने आप ज्यादा मुनाफा नहीं देता, क्योंकि पेराई, ईंधन, मजदूरी और ढुलाई का खर्च भी जुड़ता है। फायदा वहां है जहां किसान खुद कोल्हू चलाता है, या जहां मिल की पर्ची और तौल में देरी से फसल अटकी है।

कोल्हू, पावर क्रशर और खांडसारी में फर्क

गुड़ और खांडसारी एक ही गन्ने से बनते हैं, पर नियमों में दोनों अलग हैं। छोटे स्तर पर पावर क्रशर से गुड़ बनाने वाली इकाइयों को खांडसारी लाइसेंस व्यवस्था से छूट रही है। पर जनवरी 2025 के बदलाव के बाद नई पावर क्रशर और खांडसारी इकाइयों के लिए चीनी मिल से दूरी 7.5 किलोमीटर से बढ़ाकर 15 किलोमीटर कर दी गई है।

खांडसारी बनाना एक कदम आगे का काम है। इसके लिए गन्ना विभाग के पोर्टल पर आवेदन होता है, जिसमें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अनापत्ति प्रमाणपत्र और आबकारी विभाग में पंजीयन लगता है। लाइसेंस वाली इकाइयों को किसानों को भुगतान नकद की बजाय ऑनलाइन करना अनिवार्य है। नीति का मौजूदा दौर 2025-26 पेराई सत्र तक है, इसलिए नई इकाई लगाने से पहले जिले के गन्ना अधिकारी से मौजूदा नियम पूछ लें। केंद्र सरकार ने 500 टन प्रतिदिन क्षमता वाली इकाइयों पर मिलों जैसी भुगतान शर्तें भी लागू की हैं।

मंडी कहां बेचें: मुजफ्फरनगर की नवीन गुड़ मंडी

गुड़ बेचने की सबसे बड़ी मंडी मुजफ्फरनगर की नवीन गुड़ मंडी है, जिसकी गिनती एशिया की सबसे बड़ी गुड़ मंडियों में होती है। उत्तर प्रदेश सरकार ने गुड़ को एक जिला एक उत्पाद योजना में भी शामिल किया है। यहां चाकू गुड़, खुरपा, शक्कर, लड्डू, रसकट और बूरा बिकता है।

मंडी की एक सच्चाई भी जान लें। 90 के दशक में यहां हर साल करीब 92 हजार मन गुड़ आता था, जो अब घटकर 5 से 7 हजार मन रह गया है। चालू सीजन में रोज करीब 1500 मन गुड़ पहुंच रहा है। आवक घटने के बावजूद भाव पिछले साल से करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल ऊपर हैं। कारोबारियों के अनुसार बिना केमिकल वाले गुड़ और बर्फी गुड़ की मांग बढ़ रही है, और मुजफ्फरनगर के गुड़ को जीआई टैग भी मिल चुका है।

मुनाफा बढ़ाने के 5 रास्ते

गुड़ का धंधा सिर्फ पेराई का काम नहीं है। मुनाफा पेराई के बाद लिए गए फैसलों से बनता है।

पहला रास्ता गुणवत्ता है। बिना केमिकल, साफ बर्तन में बना गुड़ मंडी में अलग भाव पाता है। सफेद करने के लिए केमिकल मिलाने से बचें, क्योंकि खरीदार अब इसे पहचानने लगा है।

दूसरा रास्ता पैकिंग और ब्रांड है। खुला गुड़ मंडी भाव पर बिकता है, पर वजन और बनाने की तारीख के साथ साफ पैकेट में बेचा गया गुड़ दुकानदार को ज्यादा मार्जिन देता है। पैकेटबंद सामान के लिए एफएसएसएआई पंजीयन लेना होता है।

तीसरा रास्ता बेचने का सही समय है। सीजन की शुरुआत में आवक ज्यादा होने से भाव नरम रहता है, आवक घटने पर भाव सुधरता है। जो किसान गुड़ को नमी से बचाकर कुछ हफ्ते रख सकता है, वह बेहतर दाम पाता है।

चौथा रास्ता वैल्यू एडिशन है। सादे गुड़ के अलावा शक्कर, मसाला गुड़, मूंगफली या तिल वाला गुड़ छोटे पैक में दुकानों और शहर के ग्राहकों तक पहुंचता है। पहले एक उत्पाद से शुरू करें।

पांचवां रास्ता सीधी बिक्री है। मंडी के अलावा स्थानीय दुकानों, साप्ताहिक बाजार और शहरों के किराना कारोबारियों से सीधा संपर्क रखें। मंडी का भाव जानना इसलिए जरूरी है ताकि सीधी बिक्री में भी सही दाम मांगा जा सके।

शुरू करने से पहले चार सावधानी

पहली, गन्ने की उपलब्धता तय करें। अपना गन्ना और आसपास के किसानों से मिलने वाला गन्ना गिन लें। खांडसारी लाइसेंस में पिछले तीन साल की उपलब्धता भी देखी जाती है। दूसरी, जगह चुनने से पहले जिले के गन्ना कार्यालय से मिल से दूरी की पुष्टि करा लें। तीसरी, ईंधन और मजदूरी का तालमेल संभालें। भट्ठी में खोई ही ईंधन बनती है, इसलिए पेराई और भट्ठी का तालमेल बिगड़ा तो खर्च बढ़ जाता है। चौथी, भुगतान का हिसाब लिखित रखें। पर्ची, तौल और भुगतान का रिकॉर्ड छोटे कोल्हू वाले के लिए भी जरूरी है।

गुड़ और खांडसारी का धंधा रातोंरात अमीर बनाने का फॉर्मूला नहीं है। यह उन किसानों के लिए है जो मिल के भरोसे के साथ कमाई का दूसरा रास्ता भी बनाना चाहते हैं। छोटा शुरू करें, साफ गुड़ बनाएं और मंडी का भाव जानते रहें।

मुख्य बातें

  • करीब 100 किलो गन्ने से 10 किलो के आसपास गुड़ निकलता है, इसलिए मुनाफा पेराई खर्च और बेचने के दाम के फर्क से तय होता है।
  • नई खांडसारी और पावर क्रशर इकाई के लिए मिल से 15 किलोमीटर की दूरी का नियम है, और खांडसारी के लिए लाइसेंस, प्रदूषण अनापत्ति और ऑनलाइन भुगतान जरूरी है।
  • मुजफ्फरनगर मंडी में बिना केमिकल वाले साफ गुड़ की मांग बढ़ रही है, इसलिए गुणवत्ता और पैकिंग ही बेहतर दाम का सबसे सीधा रास्ता है।

स्रोत: ईटीवी भारत (मुजफ्फरनगर नवीन गुड़ मंडी, अक्तूबर 2026), रूरल वॉयस (खांडसारी लाइसेंसिंग नीति में जनवरी 2025 के बदलाव), चिनीमंडी (उत्तर प्रदेश खांडसारी लाइसेंसिंग नीति), एगमार्कनेट/एपीएमसी मंडी आंकड़े।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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