गन्ना फसल पर भारी बारिश की मार: शाहजहांपुर में 150 टीमें सर्वे में जुटीं

इस हफ्ते गन्ने के खेत का चक्कर लगाने वाले हर किसान के मन में एक ही सवाल है: क्या तीन दिन की इस मूसलाधार बारिश ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया है? जवाब मिलना शुरू हो गया है, और खबर अच्छी नहीं है। शुक्रवार से रविवार तक लगातार बरसी बारिश ने पूर्वी यूपी के कई जिलों में गन्ने के खेतों को पानी-पानी कर दिया है।
भारत मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी थी कि बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) के चलते यूपी में भारी से बहुत भारी बारिश होगी। यह सिस्टम 25 सितंबर को आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा के तट से टकराकर उत्तर-पश्चिम की ओर बढ़ा। इसके बाद राज्य के 59 जिले अलर्ट पर रखे गए। मौसम विभाग ने चेतावनी दी कि 26 सितंबर को पूर्वी यूपी में बहुत भारी बारिश होगी और 27 सितंबर को गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश का दौर चलेगा।
शाहजहांपुर: डूबे खेत देख भावुक हुए डीएम
सबसे चिंताजनक तस्वीर शाहजहांपुर से सामने आई है। लगातार बारिश और खन्नौत व गर्रा नदियों के बढ़ते जलस्तर ने जिले के किसानों की कमर तोड़ दी है। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, जिला मजिस्ट्रेट धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने खुद नदियों के निचले इलाकों का स्थलीय निरीक्षण किया और बाढ़ चौकियों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान खेतों में बर्बाद हुए धान और गन्ने की फसल को देखकर डीएम भावुक हो गए। उन्होंने पीड़ित किसानों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है। नुकसान का तेजी से आकलन करने के लिए लेखपाल से लेकर एसडीएम और एडीएम स्तर तक के अधिकारियों को आदेश जारी किए गए हैं। पूरे जिले में डेढ़ सौ से अधिक राजस्व टीमें खेतों में उतरकर सर्वे कर रही हैं। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रभावित किसानों को 24 घंटे के भीतर राहत और मुआवजा राशि पहुंचाई जाए।
यह वही जिला है जहां गन्ना बेल्ट का एक बड़ा हिस्सा पड़ता है। खेतों में पानी भरे रहने से गन्ने की जड़ों में सड़न का खतरा बढ़ जाता है, खासकर उन खेतों में जहां पेड़ी (रटून) रखी गई है।
IMD का अलर्ट: खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं
मौसम विभाग की चेतावनी में सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच समेत आसपास के इलाकों में अत्यंत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया था। कई अन्य जिलों को ऑरेंज और येलो अलर्ट श्रेणी में रखा गया। विभाग ने अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) और जलभराव की चेतावनी भी दी थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रेड अलर्ट वाले जिलों में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए और जिलाधिकारियों को चौकसी बरतने के निर्देश दिए। प्रशासन को बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में खास सतर्कता रखने को कहा गया है। आंकड़े डराने वाले हैं: द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, 26 सितंबर को राज्य में सामान्य से 19 गुना ज्यादा बारिश हुई, 63 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई और 100 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त हुए।
कुशीनगर में हालात और गंभीर हैं। गंडक बैराज से 5 लाख 15 हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज होने के बाद नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ा और खड्डा इलाके के कई गांव बाढ़ के पानी से घिर गए। राहत कार्यों के लिए NDRF, PAC और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं और कम्युनिटी किचन चलाए जा रहे हैं।
किसान क्या करें: खेत का पानी सबसे पहले निकालें
मौसम विभाग और कृषि विशेषज्ञों की किसानों के लिए सलाह साफ है। लगातार बारिश और तेज हवाओं का असर गन्ना, धान और मक्का समेत खरीफ की कई फसलों पर पड़ सकता है। खेतों में भरा पानी सबसे बड़ा दुश्मन है, इसलिए:
- खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था तुरंत करें। नालियां और जलनिकासी के रास्ते साफ रखें ताकि पानी ज्यादा देर तक ठहरा न रहे।
- तेज हवाओं के दौरान सिंचाई बिल्कुल न चलाएं। लंबी फसलों को गिरने से बचाने के उपाय करें।
- जिस खेत में गन्ना गिर (लॉज) गया है, उसे जल्द से जल्द बांधकर सीधा करने की कोशिश करें। गिरे गन्ने में कीट-रोग का खतरा बढ़ जाता है।
- नए पौधों और बागवानी फसलों को सहारा दें। केले, पपीते और आम के नए पौधों को खास ध्यान की जरूरत है।
आकाशीय बिजली के दौरान खुले खेत, पेड़ और जलस्रोतों से दूरी बनाए रखें। पक्के मकान के अंदर रहना सबसे सुरक्षित विकल्प है।
मुआवजे के लिए ये काम न भूलें
जिन किसानों की फसल बारिश या बाढ़ में खराब हुई है, उनके लिए राहत की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि बिजली गिरने और अत्यधिक वर्षा से हुए नुकसान का तुरंत आकलन कर प्रभावित परिवारों को 24 घंटे के भीतर सहायता पहुंचाई जाए। मानव हानि या पशु हानि होने पर नियमानुसार मुआवजा देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
मुआवजा पाने के लिए किसान को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। अपने खेत की खराब फसल की फोटो खींचकर रखें, जिसमें तारीख दिखे। अपने लेखपाल या ग्राम प्रधान को नुकसान की जानकारी लिखित में दें। शाहजहांपुर जैसे जिलों में राजस्व टीमें खुद सर्वे कर रही हैं, लेकिन अपनी तरफ से शिकायत दर्ज कराना हमेशा फायदेमंद रहता है। फसल बीमा कराया है तो बीमा कंपनी को 72 घंटे के भीतर सूचना देना न भूलें।
मुख्य बातें
- तीन दिन की रिकॉर्ड बारिश से पूर्वी यूपी के गन्ना खेतों में पानी भरा; शाहजहांपुर में डीएम के आदेश पर 150 से अधिक राजस्व टीमें फसल सर्वे में जुटीं।
- IMD ने 59 जिलों में अलर्ट जारी किया था; रेड अलर्ट वाले जिलों में स्कूल बंद, 63 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज।
- किसानों के लिए सबसे जरूरी काम: खेत से अतिरिक्त पानी निकालें, जलनिकासी दुरुस्त रखें और तेज हवा में सिंचाई रोकें।
स्रोत: News18 हिंदी (27 सितंबर 2026), मनीकंट्रोल हिंदी, द हिंदू (26 सितंबर 2026), ABP Live (26 सितंबर 2026), टॉप इंडियन न्यूज़
