गन्ने से इथेनॉल की खरीद बंद: 1,100 करोड़ लीटर निविदा में मिलों को झटका, भुगतान पर असर

पेराई सीजन शुरू होने से ठीक पहले 16 अक्टूबर को एक ऐसा फैसला आया है, जिसने चीनी मिलों की कमाई का एक बड़ा जरिया ही बंद कर दिया है। सवाल सीधा है: जब मिल की आमदनी घटेगी, तो किसानों का गन्ना भुगतान समय पर मिलेगा या नहीं? जवाब जानने के लिए उस निविदा को समझना होगा, जिसने यह पूरी बहस खड़ी की है।
पांच सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी और नुमालीगढ़ रिफाइनरी ने भारत पेट्रोलियम के जरिए इथेनॉल खरीद की निविदा जारी की है। इथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 यानी 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 के बीच कुल 1,100 करोड़ लीटर (11 अरब लीटर) इथेनॉल खरीदा जाएगा। मकसद पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने यानी ई20 के लक्ष्य को पूरा करना है। खरीद चार तिमाहियों में बंटी है: पहली और दूसरी तिमाही में 300-300 करोड़ लीटर, तीसरी और चौथी में 250-250 करोड़ लीटर।
गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल: खरीद शून्य
निविदा का सबसे बड़ा फैसला यह है कि गन्ने के रस, चीनी, सिरप और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद पर पूरी रोक लगा दी गई है। निविदा दस्तावेज में साफ लिखा है कि सरकार ने इथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में चीनी के इथेनॉल में डायवर्जन को शून्य करने का निर्देश दिया है। इन स्रोतों के इथेनॉल की कोई बोली मांगी ही नहीं गई।
वजह भी दस्तावेज और खबरों में बताई गई है। देश में चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश से उत्पादन घटने का खतरा है, और कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। ऐसे में सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की आपूर्ति को इथेनॉल खरीद से ज्यादा अहमियत दी।
यह पहली बार नहीं है, जब ऐसा हुआ हो। 2023-24 के इथेनॉल सप्लाई ईयर में भी गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल बनाने पर रोक थी, और उस दौरान इन स्रोतों की कीमतें भी नहीं बढ़ाई गई थीं। इस बार भी यही पैटर्न दोहराया गया है।
मक्के के इथेनॉल पर 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती
निविदा में दूसरा बड़ा बदलाव मक्के से बने इथेनॉल के भाव में है। मक्का आधारित इथेनॉल पर मिलने वाला अतिरिक्त इंसेंटिव 5.79 रुपये से घटकर 2.79 रुपये प्रति लीटर रह गया है। इससे असरकारी खरीद भाव 71.86 रुपये से घटकर 68.86 रुपये प्रति लीटर हो गया, यानी करीब 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती। बेसिक भाव 66.07 रुपये प्रति लीटर तय हुआ है।
खास बात यह है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम शुरू होने के बाद यह पहला मौका है, जब तेल कंपनियों ने मक्के से बने इथेनॉल की कीमत घटाई है। दूसरी तरफ सी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल का भाव 57.97 रुपये और टूटे अनाज का 64 रुपये प्रति लीटर पर अपरिवर्तित रखा गया है। एफसीआई के सरप्लस चावल से बने इथेनॉल का भाव 1.82 रुपये बढ़ाकर 60.32 रुपये प्रति लीटर किया गया है।
अनाज आधारित डिस्टिलरी कंपनियां इस कटौती से नाराज हैं, जबकि चीनी उद्योग ने फैसले का स्वागत किया है। उद्योग ने एक चेतावनी भी दी है कि डेडिकेटेड इथेनॉल प्लांटों को तरजीह देने से बचना चाहिए, ताकि चीनी मिलों के साथ भेदभाव न हो।
मिलों की कमाई घटेगी तो भुगतान पर क्या असर पड़ेगा
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य है। 2025-26 में यहां करीब 2,362 लाख टन गन्ना पैदा हुआ और 48 लाख से ज्यादा किसान गन्ना क्षेत्र से जुड़े हैं। उसी सीजन में मिलों ने 32,795 करोड़ रुपये से ज्यादा का गन्ना भुगतान किया। इसलिए यह फैसला यूपी के लाखों किसानों को सीधे छूता है।
किसानों के लिए अच्छी खबर यह है कि उनका कानूनी हक सुरक्षित है। 2026-27 सीजन के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जो 10.25 प्रतिशत बेसिक रिकवरी पर लागू होगा। 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी वाली मिलों में भी किसानों को 338.3 रुपये प्रति क्विंटल न्यूनतम मूल्य मिलेगा। मिलों के लिए यह मूल्य देना कानूनी बाध्यता है।
लेकिन दूसरा पहलू भी देखना जरूरी है। इथेनॉल बीते वर्षों में गन्ना भुगतान में मदद करने वाला मिलों के आय का अहम जरिया था। गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से इथेनॉल का रास्ता बंद होने से मिलों की इथेनॉल कमाई घटेगी और उन्हें मुख्यतः चीनी की बिक्री पर टिकना होगा। जिन मिलों की हालत पहले से कमजोर है, वहां भुगतान में देरी का खतरा बढ़ सकता है।
किसान के लिए काम की बातें
इस पेराई सीजन में तीन चीजों पर नजर रखें। पहला, अपनी तौल पर्ची, भुगतान की स्थिति और मिल के इंडेंट की जानकारी ई-गन्ना ऐप या गन्ना विभाग की वेबसाइट पर नियमित जांचते रहें। दूसरा, देरी या कटौती दिखे तो तुरंत जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, और एसएमएस के लिए 51969 नंबर है। तीसरा, याद रखें कि इस सीजन में 365 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे गन्ना खरीदना मिल के लिए कानून का उल्लंघन है। हक से कम पैसा कभी न लें।
मुख्य बातें
- 16 अक्टूबर की निविदा में 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीद का लक्ष्य, लेकिन गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद शून्य।
- मक्के के इथेनॉल का भाव 3 रुपये प्रति लीटर घटा, इथेनॉल कार्यक्रम में यह पहली कटौती है।
- किसान का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल सुरक्षित, लेकिन मिलों की कमाई घटने से कमजोर मिलों में भुगतान देरी का खतरा।
स्रोत: Reuters, The Hindu, The Hindu BusinessLine
