1 एकड़ स्प्रे: ड्रोन 7 मिनट में, मजदूर 6 घंटे में — खर्च और पानी की पूरी तुलना

अक्टूबर का महीना है। गन्ना ऊंचा हो चुका है, पत्ती घनी है, और कीट की शिकायत भी आने लगी है। खेत में घुसकर स्प्रे करने की सोचते ही दो दिक्कतें सामने आती हैं। पहला, मजदूर मिलता नहीं। दूसरा, 6-8 फीट ऊंचे गन्ने के अंदर पीठ पर टंकी लादकर चलना जानलेवा मेहनत है। ऐसे में कई किसान ड्रोन से छिड़काव की ओर देख रहे हैं। सवाल बस एक है: ड्रोन वाकई सस्ता और कारगर है, या सिर्फ शोर है?
इस गाइड में दोनों की सीधी तुलना है, अखबारों और सरकारी रिकॉर्ड के आंकड़ों पर। आखिर में आप खुद तय कर पाएंगे कि आपके खेत के लिए क्या बेहतर है।
समय: 7 मिनट बनाम 6 घंटे
सबसे बड़ा फर्क समय का है। कृषि विभाग की स्कीम के तहत चल रही ड्रोन सेवा में एक एकड़ का स्प्रे 5 से 7 मिनट में पूरा हो जाता है। आंध्र प्रदेश के किसानों के अनुभव में भी ड्रोन करीब 10 मिनट में एक एकड़ निपटा देता है।
अब मजदूर की तरफ देखिए। कृषि इंजीनियरिंग के एक शोध के मुताबिक हाथ से चलने वाले नैपसैक स्प्रेयर से एक मजदूर 6 घंटे की मेहनत में करीब 0.4 हेक्टेयर, यानी लगभग एक एकड़, कवर कर पाता है। मतलब एक एकड़ के लिए मजदूर का पूरा दिन। दवा घोलना, टंकी भरना और थकान के ब्रेक इसमें अलग।
कीट के हमले में 2-3 दिन की देरी भी भारी पड़ती है। ड्रोन से पूरा खेत एक ही दिन में निपट जाता है।
पानी: 10 लीटर बनाम 150 लीटर
दूसरा बड़ा फर्क पानी का है। ड्रोन एक एकड़ पर सिर्फ 10 लीटर पानी में दवा घोलकर छिड़कता है। वहीं पंजाब कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिशों के मुताबिक नैपसैक स्प्रेयर से एक एकड़ में 125 से 150 लीटर पानी लगता है। यानी पानी की बचत 90 प्रतिशत से भी ज्यादा।
जहां ट्यूबवेल का पानी महंगा है या खेत दूर है, वहां यह बचत सीधे जेब में दिखती है।
खर्च: बाजार रेट और सरकारी स्कीम के रेट
अब सबसे अहम सवाल, जेब पर क्या असर पड़ता है। बाजार में ड्रोन ऑपरेटर आमतौर पर 400 से 800 रुपये प्रति एकड़ लेते हैं। रेट इलाके, फसल और ऑपरेटर के हिसाब से बदलता है, इसलिए बुकिंग से पहले दो-तीन ऑपरेटरों से भाव जरूर लें।
सरकारी स्कीमों में रेट काफी कम है। बिहार में वनस्पति संरक्षण विभाग की स्कीम में ड्रोन से छिड़काव का आधिकारिक रेट 419 रुपये प्रति एकड़ तय है, और 50 प्रतिशत अनुदान के बाद किसान की जेब से सिर्फ 210 रुपये निकलते हैं। गुजरात के वडोदरा में 500 रुपये प्रति एकड़ अनुदान मिलता है, किसान सिर्फ 100 रुपये देता है। हरियाणा में भी किसानों को 100 रुपये प्रति एकड़ पर ड्रोन स्प्रे की सुविधा मिली है।
ये सब्सिडी वाले रेट हर राज्य में एक जैसे नहीं हैं। यूपी में आपके जिले में क्या स्कीम चल रही है, जिला कृषि अधिकारी के कार्यालय से पता करें।
दवा की बचत: 25 से 40 प्रतिशत तक
ड्रोन से दवा का छिड़काव एक जैसा होता है। हाथ से स्प्रे में कहीं ज्यादा, कहीं कम दवा पड़ जाती है। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक ड्रोन से कीटनाशक और खाद की खपत 25 से 40 प्रतिशत तक घट जाती है। ड्रोन नैनो यूरिया और नैनो डीएपी जैसे तरल इनपुट के साथ भी पूरी तरह काम करता है।
गन्ने में इसका एक और फायदा है। जब फसल 6-8 फीट ऊंची हो जाती है, तो मजदूर खेत के अंदर ठीक से घुस नहीं पाता। बीच की कतारें छूट जाती हैं, वहीं कीट पनपता है। ड्रोन ऊपर से उड़कर पूरे खेत में एक जैसा छिड़काव करता है, कोई कतार नहीं छूटती।
ड्रोन बुक कैसे करें
ड्रोन की कीमत करीब 10 लाख रुपये है, 40 प्रतिशत अनुदान पर घटकर करीब 6 लाख रह जाती है। फिर भी ज्यादातर किसानों के लिए किराए पर सेवा लेना ही समझदारी है।
बुकिंग के तीन रास्ते हैं। पहला, जिले के कृषि विज्ञान केंद्र या कस्टम हायरिंग सेंटर से संपर्क करें। दूसरा, नमो ड्रोन दीदी योजना वाली महिला समूहों से किराए पर सेवा लें, जानकारी ब्लॉक के आजीविका मिशन कार्यालय से मिलेगी। तीसरा, निजी ड्रोन ऑपरेटर, जिनका नंबर कृषि विभाग के कार्यालय या खाद-बीज की दुकानों पर मिल जाता है।
एक सावधानी जरूरी है। ड्रोन उड़ाने वाले के पास डीजीसीए का रिमोट पायलट लाइसेंस होना चाहिए। बिना प्रशिक्षित ऑपरेटर से स्प्रे करवाना दवा की बर्बादी भी है और हादसे का खतरा भी।
नमो ड्रोन दीदी: 80 प्रतिशत तक अनुदान
केंद्र सरकार की नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन की कीमत का 80 प्रतिशत तक, अधिकतम 8 लाख रुपये, केंद्रीय सहायता मिलती है। 15 दिन का ड्रोन पायलट प्रशिक्षण भी पैकेज में शामिल है। लक्ष्य 15,000 महिला समूहों तक ड्रोन पहुंचाना है। इन समूहों से गांव के आसपास ही सस्ती स्प्रे सेवा मिल सकती है।
कब ड्रोन न कराएं
हर चीज की सीमा होती है। तेज हवा चल रही हो तो ड्रोन से दवा बहकर पड़ोसी के खेत में जा सकती है। बारिश के ठीक पहले या बाद में स्प्रे का असर कम होता है। बहुत छोटे और बिखरे हुए टुकड़ों में ऑपरेटर आने से मना भी कर सकता है, क्योंकि उसे भी एक बार में कई एकड़ का काम चाहिए।
ऐसे में गांव के 4-5 किसान मिलकर एक साथ बुकिंग करें। ऑपरेटर को एक ही जगह 10-15 एकड़ का काम मिलेगा तो रेट भी कम लगेगा और आपका काम भी जल्दी होगा।
मुख्य बातें
- ड्रोन 5-7 मिनट में एक एकड़ स्प्रे करता है, सिर्फ 10 लीटर पानी में; मजदूर को उसी काम में करीब 6 घंटे और 125-150 लीटर पानी लगता है।
- बाजार रेट 400-800 रुपये प्रति एकड़ है, पर बिहार, गुजरात और हरियाणा जैसी स्कीमों में किसान सिर्फ 100-210 रुपये देता है; अपने जिले की स्कीम कृषि अधिकारी से पता करें।
- नमो ड्रोन दीदी योजना में महिला समूहों को 80 प्रतिशत तक अनुदान पर ड्रोन मिलते हैं; गांव में ही सस्ती स्प्रे सेवा के लिए ब्लॉक कार्यालय से संपर्क करें।
स्रोत: trendkia.com, thenewsmill.com, deccanchronicle.com (ड्रोन रेट व समय); pib.gov.in (नमो ड्रोन दीदी योजना); agronomyjournals.com (नैपसैक स्प्रेयर कार्यक्षमता); pau.edu (प्रति एकड़ पानी की मात्रा)।
