ड्रिप लगाई तो बस आधी जंग जीती: ये 7 काम भूल गए तो आधा पानी फिर बर्बाद

बिजनौर के एक किसान ने पिछले साल डेढ़ एकड़ गन्ने में ड्रिप लगवाई। पहला सीजन कमाल रहा, पानी आधा लगा और गन्ना पहले से मोटा निकला। दूसरे सीजन में खेत का एक हिस्सा सूखने लगा। ड्रिपर से पानी टपक ही नहीं रहा था। फिल्टर महीनों से साफ नहीं हुआ था और लेटरल के अंदर मिट्टी जमकर आखिरी छोर के एमिटर बंद हो चुके थे।
ड्रिप लगाना आधी जंग है। बाढ़ सिंचाई के मुकाबले इससे 40 से 50 प्रतिशत पानी बचता है, फर्टिगेशन से खाद का खर्च 25 से 30 प्रतिशत कम होता है और उपज 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। लेकिन ये फायदे तभी टिकते हैं जब सिस्टम की देखभाल रोज की आदत बन जाए। इस गाइड में वही 7 काम हैं जो ड्रिप को सालों साल नए जैसा रखते हैं।
1. हर रोज के 10 मिनट: फिल्टर और प्रेशर पर नजर
सुबह पंप चलाते ही प्रेशर को स्थिर होने दीजिए, फिर सैंड फिल्टर की बैकवॉश कीजिए, यानी ड्रेन वाल्व खोलकर जमा गंदगी बाहर निकालिए। फिल्टर के आने-जाने वाले पानी के प्रेशर का अंतर 0.5 किलो प्रति वर्ग सेंटीमीटर से ज्यादा बढ़ जाए तो समझिए फिल्टर सफाई माँग रहा है।
सिस्टम को रोज 10 से 15 मिनट चलाइए, भले ही उस दिन पूरी सिंचाई न करनी हो। रोज चलने से पानी में घुले नमक पाइप में जमते नहीं और एमिटर के मुँह खुले रहते हैं। प्रेशर अचानक गिर जाए तो उसे नजरअंदाज मत कीजिए, यह लीकेज या पंप की खराबी का पहला संकेत होता है।
2. हर 15 दिन: स्क्रीन फिल्टर और लेटरल फ्लशिंग
पखवाड़े में एक बार स्क्रीन या डिस्क फिल्टर खोलकर जाली वाला हिस्सा निकालिए और बहते पानी में हाथ से धोइए। तार वाला ब्रश कभी मत इस्तेमाल कीजिए, जाली फट जाएगी और महीन मिट्टी सीधे एमिटर तक पहुँच जाएगी।
उसी दिन लेटरल के आखिरी सिरे खोलकर फ्लशिंग भी कर दीजिए, हर लेटरल को 2 से 5 मिनट तक तेज प्रेशर पर बहने दीजिए जब तक साफ पानी न आने लगे।
3. महीने में एक बार: जाम एमिटर की जाँच और इलाज
एमिटर जाम होता है तो सबसे पहले लेटरल के आखिरी छोर वाला एमिटर बंद होता है, क्योंकि मलबा वहीं जमा होता है। महीने में एक बार खेत में घूमकर आखिरी छोर के ड्रिपर देखिए, कहीं पानी टपक नहीं रहा या धार पतली पड़ गई है, तो उसी जगह रुकिए।
जाम के दो आम कारण होते हैं, नमक का जमाव और काई या बैक्टीरिया की परत। नमक के लिए एसिड ट्रीटमेंट और काई के लिए क्लोरीन ट्रीटमेंट होता है। दोनों कभी एक साथ मत कीजिए, यह सख्त नियम है। तरीका, मात्रा और समय पानी की जाँच और कंपनी की सलाह से तय होता है, अंदाजे से नहीं। बंद ड्रिपर को कील, पिन या हथौड़ी से कभी मत खोलिए, उसका मुँह चौड़ा हो जाएगा और वह लाइन हमेशा के लिए बेकार हो जाएगी।
4. फर्टिगेशन: पानी के साथ खाद देने का सही तरीका
ड्रिप की सबसे बड़ी ताकत यह है कि खाद सीधे जड़ों तक जाती है, लेकिन यही ताकत लापरवाही में नुकसान भी करती है। सिर्फ पूरी तरह पानी में घुलने वाली खाद इस्तेमाल कीजिए, दानेदार खाद बिना घुले रह गई तो एमिटर के अंदर ही जम जाएगी। खाद इंजेक्टर हमेशा फिल्टर के बाद लगाइए, या इंजेक्टर के बाद एक और छोटा स्क्रीन फिल्टर लगाइए।
खाद देने के बाद सिस्टम को साफ पानी से इतनी देर चलाइए कि खाद पूरी लाइन से निकलकर जड़ों तक पहुँच जाए, आधी लाइन में रुकी खाद सड़कर जाम का कारण बनती है। सही फर्टिगेशन से खाद का खर्च 25 से 30 प्रतिशत तक घटता है, गलत से पूरा सिस्टम जाम हो जाता है।
5. सर्दी का शेड्यूल: नवंबर-दिसंबर में पानी कब और कितना
नवंबर में गन्ना पकने लगता है और ठंड बढ़ती है, इस मौसम में पौधे की पानी की जरूरत घट जाती है। ड्रिप से कम पानी में भी जड़ क्षेत्र नम रहता है। सुबह सिंचाई कीजिए, ताकि दिन की धूप में पत्ते सूख जाएँ और ठंड में नमी से बीमारी न फैले।
पाला पड़ने की आशंका वाली रातों से पहले हल्की सिंचाई मदद करती है, क्योंकि नम मिट्टी सूखी मिट्टी के मुकाबले गर्मी ज्यादा देर तक रोकती है। लेकिन खेत में पानी खड़ा मत कीजिए, जड़ें सड़ जाएँगी।
6. वो छोटी गलतियाँ जो सिस्टम खा जाती हैं
चूहे ड्रिप के सबसे बड़े दुश्मन हैं, वे लेटरल कुतर देते हैं और एक छोटा छेद पूरी लाइन का प्रेशर गिरा देता है। ट्रैक्टर या कल्टीवेटर चलाते समय लेटरल के ऊपर से पहिया न जाने दीजिए, पाइप दबकर फट जाएगा।
मरम्मत के बाद सिस्टम को बिना फ्लश किए मत चलाइए, मरम्मत में अंदर गई मिट्टी सीधे एमिटर तक जाएगी। हर मरम्मत के बाद लीक की जाँच कीजिए, छोटा सा रिसाव भी पूरे दिन में सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद कर देता है।
7. सीजन खत्म: समेटना और सँभालकर रखना
सीजन खत्म होने पर लेटरल को समेटकर छाँव में सुरक्षित रखिए। पहले पूरी सिस्टम की फ्लशिंग कीजिए, फिर लाइनें खोलकर पानी निकालिए और पाइपों को बिना मोड़े-तोड़ें रोल कीजिए। धूप में पड़े पाइप कड़े हो जाते हैं और अगले सीजन में टूटने लगते हैं।
सिस्टम सँभालकर रखने वाला किसान अगले सीजन में सिर्फ पाइप बिछाकर काम शुरू कर देता है, जबकि लापरवाह किसान हर साल नया खर्च करता है। ड्रिप एक बार का निवेश है, इसकी असली कीमत इसकी देखभाल से तय होती है।
मुख्य बातें
- रोज 10 मिनट फिल्टर और प्रेशर की जाँच कीजिए, पखवाड़े में स्क्रीन फिल्टर साफ करके लेटरल फ्लश कीजिए, महीने में एक बार आखिरी छोर के एमिटर देखिए।
- एसिड और क्लोरीन ट्रीटमेंट कभी एक साथ मत कीजिए, बंद ड्रिपर को कील या पिन से कभी मत खोलिए, फर्टिगेशन में सिर्फ घुलनशील खाद इस्तेमाल कीजिए।
- सही देखभाल वाला ड्रिप सिस्टम 7 से 10 साल चलता है और 40 से 50 प्रतिशत पानी बचाता है, बिना देखभाल वाला दो-तीन सीजन में ही जाम हो जाता है।
स्रोत: Netafim India, गन्ने में ड्रिप सिंचाई गाइड; Mahakrushi, गन्ने के लिए ड्रिप सिंचाई; IndianIrrigation.com, ड्रिप सिंचाई रखरखाव चेकलिस्ट; Jain Irrigation, ड्रिप सिस्टम रखरखाव निर्देश; IRADA, ड्रिप सिंचाई रखरखाव प्रस्तुति।
