15 अक्टूबर से पेराई: हर ट्रॉली की ढुलाई सस्ती करने के 7 उपाय

शामली के जिलाधिकारी आलोक यादव ने जिले की तीनों चीनी मिलों, थानाभवन, शामली और ऊन को साफ निर्देश दिए हैं कि हर हाल में 15 अक्टूबर 2026 तक पेराई सत्र 2026-27 शुरू कर दिया जाए। मुजफ्फरनगर की आठों मिलों में भी अक्टूबर के पहले हफ्ते तक तैयारियां पूरी करने के आदेश हैं, इस बार सत्र पिछले साल से करीब 15 दिन पहले शुरू होगा। करीब सवा दो लाख किसानों को गन्ना आपूर्ति कैलेंडर भी बांटे जा चुके हैं।
मतलब साफ है। बस कुछ दिनों में खेतों से ट्रैक्टर-ट्रॉलियां मिलों की ओर दौड़ने लगेंगी। गन्ने का भाव तो तय है, लेकिन खेत से क्रय केंद्र और फिर मिल तक पहुंचाने का डीज़ल, ड्राइवर की मज़दूरी और लदान का खर्च किसान की जेब से निकलता है। नीचे दिए गए 7 उपायों से हर ट्रॉली की ढुलाई का खर्च घटाया जा सकता है।
1. सबसे नज़दीकी केंद्र के लिए समय पर आपत्ति दर्ज कराएं
गन्ना किस केंद्र पर देना है, यह विभाग तय करता है, पर दूर या गलत केंद्र मिलने पर किसान आपत्ति दर्ज करा सकता है। बागपत के हजूराबाद गढ़ी गांव के किसानों ने 2026-27 सत्र के लिए अपने क्रय केंद्र को दौराला चीनी मिल से जोड़ने की मांग समिति सचिव से की है। किसानों का कहना है कि उन्हें दिया गया बिनौली केंद्र गांव से 9 से 10 किलोमीटर दूर है। अपने आपूर्ति कैलेंडर में केंद्र का नाम ज़रूर जांचें। केंद्र दूर हो या गलत मिल से जुड़ा हो तो समिति में आपत्ति दें, क्योंकि क्रय केंद्र से मिल तक की ढुलाई पर नियमानुसार किसान के गन्ना मूल्य से ही कटौती होती है। केंद्र जितना दूर, कटौती उतनी ज़्यादा।
2. ट्रॉली हमेशा फुल लोड करके चलाएं
आधी भरी ट्रॉली में भी ट्रैक्टर का डीज़ल लगभग उतना ही जलता है जितना पूरी भरी में। ट्रॉली को उसकी पूरी क्षमता तक भरें। दो बार में आधा-आधा गन्ना ले जाने पर एक ही काम में दोगुना डीज़ल और ड्राइवर का दोगुना समय खर्च होगा। कटाई की योजना इस तरह बनाएं कि ट्रॉली एक बार में पूरी भरे। पड़ोस के खेत से थोड़ा गन्ना मिलाकर ट्रॉली पूरी करना भी आधी ट्रॉली दौड़ाने से सस्ता पड़ता है।
3. पर्ची के हिसाब से कटाई करें, ट्रॉली को लाइन में न सड़ाएं
कटा हुआ गन्ना हर बीतते दिन के साथ नमी खोता है और उसका वज़न घटता है। कुशीनगर के पडरौना में ढाढ़ा चीनी मिल के बबुइया हरपुर बी क्रय केंद्र पर किसानों ने ट्रांसपोर्टर की शिकायत की थी। समय पर गाड़ियां न मिलने से ट्रॉलियां 6-7 दिन तक अटकी रहीं, गन्ना सूखा और वज़न घटा। इसलिए कटाई तभी करें जब आपकी आपूर्ति का नंबर नज़दीक हो। पर्ची से हफ्तों पहले काटकर रखा गन्ना वज़न घटाकर आपकी जेब पर ही वार करता है।
4. पड़ोसियों के साथ साझा ढुलाई अपनाएं
जिन किसानों का गन्ना कम है या जिनके पास अपना ट्रैक्टर नहीं है, वे 2-3 पड़ोसी किसानों के साथ मिलकर एक ट्रैक्टर-ट्रॉली बुक कर सकते हैं। डीज़ल और ड्राइवर का खर्च बंट जाने से प्रति क्विंटल ढुलाई लागत आधी से भी कम हो जाती है। शर्त सिर्फ इतनी है कि सबकी पर्ची का समय आसपास हो और गन्ना एक ही केंद्र पर जाना हो। कई गांवों में किसान पहले से यह तरीका अपना रहे हैं।
5. लदान-उतरान का कोई शुल्क बिल्कुल न दें
उत्तर प्रदेश के गन्ना आयुक्त के निर्देश साफ हैं। राज्य के 45 गन्ना उत्पादक जिलों में मिल क्रय केंद्रों पर किसानों से गन्ने के लदान या उतरान का कोई शुल्क नहीं लिया जा सकता। फिर भी केंद्र पर कोई इस नाम पर पैसा मांगे तो देने के बजाय जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। यह छोटी रकम लगती है, लेकिन पूरे सत्र में हर ट्रॉली पर जुड़कर यह हज़ारों रुपये बन जाती है।
6. धुंध के सीज़न में सुरक्षा को खर्च-बचत समझें
दिसंबर-जनवरी की घनी धुंध में गन्ने से लदी ट्रॉलियों के हादसे हर साल होते हैं। गन्ना विभाग ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और ट्रकों पर पीली-लाल फ्लोरोसेंट पट्टी और ट्रॉली के पीछे लाल झंडी लगाना अनिवार्य किया है। एक भी हादसा पूरे सीज़न की कमाई पर पानी फेर सकता है। धुंध में सुबह जल्दी या देर शाम की ढुलाई से बचें और रफ्तार धीमी रखें। सुरक्षित पहुंचा गन्ना ही असली बचत है।
7. दोहरी ढुलाई और दोहरी मज़दूरी से बचें
गन्ना पहले घर या खलिहान लाना, वहां उतारना और फिर दोबारा लादकर केंद्र पहुंचाना, यह दोहरी ढुलाई सबसे बड़ा छिपा खर्च है। हर बार की लदाई-उतराई में मज़दूरी लगती है और गन्ना टूटता-छिलता है जिससे वज़न घटता है। सीधा नियम बनाएं। खेत से कटाई के साथ ही ट्रॉली भरे और सीधे क्रय केंद्र पहुंचे। महाराष्ट्र में इस सीज़न से पहले ही गन्ना मज़दूरों ने कटाई और ढुलाई की दरों में 100 प्रतिशत बढ़ोतरी की मांग कर दी है। मज़दूरी बढ़ रही है, इसलिए हर अतिरिक्त बार की लदाई आपकी जेब और हल्की करेगी।
मुख्य बातें
- 15 अक्टूबर 2026 से यूपी में पेराई सत्र 2026-27 शुरू हो रहा है, ढुलाई की योजना अभी से बनाएं।
- नज़दीकी क्रय केंद्र, फुल लोड ट्रॉली और पर्ची के हिसाब से कटाई से प्रति क्विंटल ढुलाई लागत सबसे ज़्यादा घटती है।
- मिल क्रय केंद्रों पर लदान-उतरान शुल्क देना नियम विरुद्ध है, मांगा जाए तो जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें।
स्रोत: दैनिक जागरण (मुजफ्फरनगर), रॉयल बुलेटिन (शामली), टाइम्स ऑफ इंडिया, लाइव हिंदुस्तान (बागपत, कुशीनगर), चीनी मंडी, जागरण बिज़नेस डेस्क
