कटाई के 24 घंटे में गन्ना मिल पहुंचेगा, अब ट्रकों पर GPS से रहेगी लाइव नजर
कटाई के बाद ट्रक क्रय केंद्र से चला तो दो दिन बाद मिल पहुंचा। दो दिन धूप में पड़ा गन्ना सूखा, वजन घटा और तौल में कटौती किसानों की जेब से निकली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों किसानों की यह शिकायत अब विभाग की फाइलों से निकलकर तकनीक की ओर बढ़ रही है। गन्ना विकास विभाग इस पेराई सत्र से ढुलाई व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल करने जा रहा है। क्रय केंद्र से चीनी मिल के गेट तक हर वाहन की लोकेशन अब GPS से पल-पल ट्रैक होगी।
क्या है नई व्यवस्था
विभाग ने व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लागू करने की तैयारी कर ली है। इसके तहत गन्ना क्रय केंद्रों से चीनी मिल तक गन्ना ले जाने वाले सभी वाहनों की लाइव ट्रैकिंग होगी। एक केन्द्रीय कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा, जहां अधिकारी गन्ने से लदे वाहनों की आवाजाही पर 24 घंटे निगरानी रख सकेंगे।
रियल-टाइम ट्रैकिंग का सीधा मतलब है कि कोई वाहन रास्ते में बेवजह रुका, अनधिकृत ठहराव किया या निर्धारित मार्ग से भटका, तो कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी को तुरंत भनक लग जाएगी। अभी तक ढुलाई के दौरान चालकों की लापरवाही का कोई ठोस हिसाब नहीं मिलता था। किसान का गन्ना देरी से पहुंचता था और नुकसान उसी की झोली में गिरता था।
कटाई के 24 घंटे में मिल तक पहुंच का लक्ष्य
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा वादा समयबद्ध आपूर्ति है। विभाग ने लक्ष्य रखा है कि कटाई के 24 घंटे के भीतर गन्ना चीनी मिल तक पहुंच जाए। खेत से गन्ने की कटाई के बाद मिल तक पहुंचने में अक्सर काफी समय लग जाता है। इस दौरान धूप और हवा के संपर्क में रहने से गन्ना सूखने लगता है और उसका वजन घटता है। वजन घटने का सीधा असर तौल पर पड़ता है। किसान की मेहनत की फसल हल्की होकर तुलती है और भुगतान भी उतना ही कम मिलता है।
विभाग का मानना है कि समय पर परिवहन से गन्ने की ताजगी और प्राकृतिक वजन बना रहेगा। इससे किसानों को वजन में होने वाली कटौती और आर्थिक नुकसान से राहत मिलेगी।
अधिकारियों का कहना
उप गन्ना आयुक्त हरपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गन्ना एवं चीनी आयुक्त की मंशा है कि चीनी उद्योग की कार्यप्रणाली आधुनिक बने और किसान खुशहाल हो। इसी क्रम में गन्ना विकास विभाग ने गन्ना ढुलाई वाहनों की डिजिटल निगरानी की पहल की है।
गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने भी इस डिजिटल व्यवस्था पर मुहर लगाई थी। उनके मुताबिक केन्द्रीय कंट्रोल रूम से अधिकारियों की 24 घंटे की निगरानी से गन्ना आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता बढ़ेगी। रियल-टाइम ट्रैकिंग से वाहनों के रास्ते में अनावश्यक रुकने, अनधिकृत ठहराव और संभावित हेराफेरी पर नजर रखी जा सकेगी।
विभाग का दावा है कि प्रदेश भर में यह पहली बार हो रहा है कि गन्ने की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को डिजिटल तकनीक से जोड़कर ढुलाई प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा रहा है।
किसान पर क्या असर पड़ेगा
इस बदलाव का सीधा फायदा गन्ना किसानों की जेब पर दिखेगा। पहली बात, तौल में होने वाली कटौती घटेगी। गन्ना समय पर मिल पहुंचेगा तो सूखने से वजन नहीं घटेगा। दूसरी बात, ढुलाई में होने वाली हेराफेरी और बेवजह की देरी पर लगाम लगेगी। चालक का ट्रक कहां रुका और कितनी देर, इसका पूरा ब्योरा रिकॉर्ड में रहेगा।
तीसरी बात, पारदर्शिता। क्रय केंद्र से मिल गेट तक गन्ने की पूरी यात्रा अब नक्शे पर दिखेगी। किसानों को यह कहने का आधार मिलेगा कि उनका गन्ना फलां समय क्रय केंद्र से चला और मिल इतनी देर में पहुंचा। देरी की जवाबदेही तय होगी।
क्या करना होगा किसानों को
किसानों को इसके लिए कुछ अलग से नहीं करना है। यह पूरी व्यवस्था विभाग और मिल प्रबंधन के स्तर पर लागू होगी। हां, जब नई व्यवस्था इस पेराई सत्र में चालू हो जाए तो किसान अपनी पर्ची और तौल के रिकॉर्ड पर पहले से ज्यादा नजर रखें। अगर गन्ना समय पर नहीं पहुंचे या तौल में कटौती दिखे तो समिति और जिला गन्ना अधिकारी के पास शिकायत का ठोस आधार होगा।
गन्ना ढुलाई अब कागज और भरोसे की व्यवस्था से निकलकर स्क्रीन की व्यवस्था में आ रही है। ट्रक कहां है, यह सवाल अब फोन पर नहीं, कंट्रोल रूम के नक्शे पर जवाब मिलेगा। किसानों के लिए यह छोटा नहीं, बल्कि बड़ा बदलाव है। क्योंकि ढुलाई में बचता हर किलो सीधे उनकी कमाई से जुड़ा है।
मुख्य बातें
- इस पेराई सत्र से क्रय केंद्र से मिल गेट तक गन्ना ढुलाई वाहनों की GPS से लाइव ट्रैकिंग होगी।
- कटाई के 24 घंटे के भीतर गन्ना मिल पहुंचाने का लक्ष्य; सूखने से वजन घटने की समस्या से किसानों को राहत मिलेगी।
- केन्द्रीय कंट्रोल रूम से 24 घंटे निगरानी, अनधिकृत ठहराव और हेराफेरी पर लगेगी रोक।
स्रोत: हिन्दुस्तान (विशाल शुक्ला), न्यूज़ट्रैक (31 अगस्त 2026)
