मिल का पेमेंट अटका तो डेयरी संभाले: गन्ने के साथ 2-10 पशुओं से हर महीने नकद कमाई की गाइड

शाम को दूध की कैन डेयरी समिति पर पहुंचती है और दूध का पैसा उसी समय खाते में जुड़ जाता है। वहीं गन्ने की ट्रॉली मिल तक जाती है, पर पर्ची का भुगतान महीनों इंतजार कराता है। गन्ना साल में एक बार बड़ी रकम देता है, डेयरी हर दिन नकद आय देती है। इस गाइड में उसी जोड़ी का पूरा हिसाब है, कितनी लागत, कितनी सरकारी मदद, गन्ने की पत्ती से चारा कैसे और गोबर से खाद कैसे।
डेयरी से रोज़ नकद, गन्ने से सालाना आय: यह जोड़ी क्यों काम करती है
गन्ने की खेती में सबसे बड़ी परेशानी नकद-प्रवाह की है। बीज, खाद, मजदूरी पर पैसा हर महीने लगता है, जबकि भुगतान चीनी मिल की गति से आता है। डेयरी इस गैप को भरती है। दो से चार पशु घर की रोज़ की आमदनी बना देते हैं, बीज का भुगतान अटका हो तब भी दूध की बिक्री से खाद-डीजल का इंतजाम चलता रहता है।
दूसरा फायदा चारे का है। गन्ने की कटाई के बाद खेत में जो पत्ती और ट्रैश बचता है, वह पशुओं के चारे का बड़ा हिस्सा बन सकता है, जिसे अक्सर जलाना पड़ता है। तीसरा फायदा खाद का है। गोबर से बनी खाद गन्ने के खेत में रासायनिक खाद की जरूरत कम करती है।
2 से 10 पशुओं की छोटी डेयरी: लागत और सरकारी मदद
बड़ी डेयरी जरूरी नहीं है। NABARD की डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) के तहत 2 से 10 दुधारू पशुओं की छोटी इकाई को भी मदद मिलती है। 10 पशुओं की इकाई की इकाई लागत 7 लाख रुपये मानी गई है। इस पर सामान्य वर्ग के उद्यमी को परियोजना लागत की 25 प्रतिशत बैक-एंडेड पूंजीगत सब्सिडी मिलती है, और SC/ST उद्यमी को 33.33 प्रतिशत। प्रति पशु सब्सिडी की सीमा 17,500 रुपये (SC/ST के लिए 23,300 रुपये) तय है।
यह सब्सिडी सीधे बैंक से जुड़ी है। किसान बैंक में प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ ऋण के लिए आवेदन करता है, NABARD सब्सिडी की राशि सीधे फाइनेंसिंग बैंक को जारी करता है, जो ऋण की राशि में समायोजित होती है। पशुपालन विभाग और NABARD दोनों इस योजना के क्रियान्वयन में हैं। शुरुआत से पहले अपने जिले के पशु चिकित्सक या नजदीकी बैंक शाखा से योजना की मौजूदा स्थिति जरूर जांच लें, नियम समय-समय पर बदलते हैं।
गन्ने की पत्ती और ट्रैश: मुफ्त का चारा, सही तरीके से
एक हेक्टेयर गन्ने की कटाई के बाद करीब 8 से 10 टन पत्ती-ट्रैश खेत में बचता है। यह मात्रा दो-चार पशुओं के कई महीनों के चारे का काम कर सकती है। लेकिन सीधी पत्ती पशु को पूरी पोषण नहीं देती। शोध के अनुसार गन्ने के ट्रैश में कच्चा प्रोटीन करीब 3 प्रतिशत होता है, जो पशु के लिए काफी कम है।
यहीं यूरिया उपचार काम आता है। 4 प्रतिशत यूरिया से उपचारित गन्ने के ट्रैश में कच्चा प्रोटीन 3 प्रतिशत से बढ़कर करीब 12 प्रतिशत हो जाता है। यही तरीका पशु-विज्ञान अनुसंधान में दर्ज है। एक और प्रचलित तरीका गन्ने के अगोल (टॉप) का साइलेज है, जिसमें 1 प्रतिशत यूरिया, 0.5 प्रतिशत नमक और 2 प्रतिशत शीरे के साथ साइलेज बनाया जाता है। चेन्नई के पशु-चिकित्सा अनुसंधान में यह साइलेज खिलाने से बछियों और गायों के प्रजनन स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पाया गया।
एक सावधानी जरूरी है। पशु-विस्तार नेटवर्क के अनुसार फसल अवशेष अकेले पशु का पूरा आहार नहीं बन सकते, उनमें नाइट्रोजन, खनिज और विटामिन की कमी रहती है। इसलिए उपचारित पत्ती के साथ हरा चारा और जरूरत के अनुसार दाना भी दें। नेपियर घास या बरसीम जैसी हरी चारा फसल खेत की मेड़ पर लगाई जा सकती है।
गोबर से वर्मीकम्पोस्ट: खाद खर्च में राहत
पशुओं का गोबर गन्ने के खेत की सेहत के लिए सोना है। दुधारू पशु इकाई के साथ वर्मीकम्पोस्ट इकाई लगाने की लागत 25,200 रुपये मानी गई है, जिस पर 6,300 रुपये (SC/ST के लिए 8,400 रुपये) की सब्सिडी सीमा DEDS में तय है। गोबर से बनी कंपोस्ट गन्ने के खेत की मिट्टी की जीवंतता बढ़ाती है और रासायनिक खाद की मात्रा धीरे-धीरे कम करने में मदद करती है।
जो किसान तुरंत वर्मीकम्पोस्ट नहीं लगाना चाहते, वे गोबर की साधारण कंपोस्ट खेत में डालकर भी शुरुआत कर सकते हैं। गन्ने की पेड़ी फसल में कंपोस्ट का असर खास दिखता है। गोबर का यह उपयोग डेयरी और गन्ने की कड़ी को पूरी तरह बंद कर देता है। चारा खेत से, खाद गोबर से, दूध से नकद आय, और गन्ने से सालाना बड़ी रकम।
शुरुआत के 5 व्यवहारिक कदम
पहला कदम चारे की गणना है। अपने पशुओं की संख्या के हिसाब से गन्ने की पत्ती कितने दिन चलेगी, यह तय करें और बचे दिनों के लिए हरा चारा बोने की योजना बनाएं। दूसरा कदम पशु का चुनाव है। मुर्रा नस्ल की भैंस पश्चिमी यूपी में सबसे प्रचलित है, खरीद से पहले पशु चिकित्सक से जांच जरूर कराएं।
तीसरा कदम दूध की बिक्री का ठिकाना है। गांव की डेयरी समिति या दूध संघ से बिक्री का रास्ता पहले से तय होना चाहिए। चौथा कदम ऋण और सब्सिडी का कागज़ी काम है, DEDS के लिए बैंक में प्रोजेक्ट रिपोर्ट के साथ आवेदन करें। पांचवां कदम टीकाकरण और साफ-सफाई का नियमित चक्र है।
एक बात ध्यान रहे। डेयरी से जो रोज़ की नकद आय आएगी, उसका एक हिस्सा अलग रखकर गन्ने की अगली फसल की तैयारी में लगाएं। यही वह नकद-प्रवाह है जो मिल के भुगतान के इंतजार को आसान बनाता है।
मुख्य बातें
- गन्ने के भुगतान के इंतजार में डेयरी रोज़ नकद आय देती है, 2 से 10 पशुओं की छोटी इकाई से शुरुआत हो सकती है
- DEDS में 25 प्रतिशत (SC/ST को 33.33 प्रतिशत) सब्सिडी और प्रति पशु 17,500 रुपये की सीमा तय है, ऋण बैंक से जुड़ा है
- गन्ने की पत्ती का यूरिया उपचार प्रोटीन को करीब 3 से 12 प्रतिशत तक बढ़ा देता है, लेकिन अकेला चारा नहीं बनता, हरे चारे के साथ दें
स्रोत: NABARD डेयरी उद्यमिता विकास योजना (DEDS) दिशा-निर्देश; AESA Network Good Practices-22 (Sugarcane Trash for Livestock Feeding); मद्रास पशु-चिकित्सा महाविद्यालय अनुसंधान (SCTS साइलेज)
