चूहा मार चारा की 1:49 वाली विधि: 3 दिन की तैयारी, एक ही रात में छुटकारा

सुबह खेत पहुंचे और देखा कि मेढ़ के पास दर्जनों गन्ने तिरछे कटे पड़े हैं। खेत ऊपर से हरा-भरा दिख रहा था, पर जमीन के पास तनों पर दांतों के निशान थे। यह नजारा अक्टूबर से फरवरी के बीच गन्ने की पट्टी के हर गांव में आम है। चूहे गन्ने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान इन्हीं महीनों में पहुंचाते हैं, जब गन्ना परिपक्व होता है और उसमें रस की मात्रा सबसे ज्यादा होती है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुमान के मुताबिक खड़े गन्ने में कृंतकों यानी चूहों से 5 से 15 प्रतिशत तक उपज का नुकसान हो सकता है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि नुकसान रात को होता है और किसान को सुबह पता चलता है।
ज्यादातर किसानों की शिकायत होती है: चूहा मार दवा रखी थी, पर चूहों ने खाया ही नहीं, या खाया तो असर नहीं किया। सच यह है कि गलती चूहे की नहीं, विधि की होती है। जहरीला चारा लगाने की एक तयशुदा वैज्ञानिक विधि है: 1:49 का अनुपात, 3 दिन की तैयारी और शाम को लगाने का सही क्रम। इसे सही से करें तो जिंक फॉस्फाइड जैसा तीव्र विष खाए जाने के 24 घंटे के भीतर असर दिखाता है।
पहले समझिए: चारा क्यों फेल होता है
चूहे समझदार जानवर हैं। उन्हें पहली बार कोई नया खाद्य पदार्थ दिया जाए तो वे उसे तुरंत नहीं खाते, पहले थोड़ा चखते हैं और शरीर पर असर देखते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में “बेट शाइनेस” कहते हैं। जिंक फॉस्फाइड तीव्र विष है, यानी एक ही खुराक में असर करने वाला। अगर चूहे ने बिना आदत के सीधा जहर वाला चारा खाया और असहजता महसूस हुई, तो वह दोबारा उसे छूएगा भी नहीं। इसीलिए कृषि वैज्ञानिक प्री-बेटिंग की सलाह देते हैं: जहर डालने से पहले 2-3 दिन तक सादा चारा खिलाइए, ताकि चूहा उस स्वाद का आदी हो जाए।
दूसरी गलती है गलत अनुपात: ज्यादा दवा मिली तो चूहा चारा छूएगा नहीं, कम मिली तो असर नहीं होगा। तीसरी गलती है दिन में चारा रखना, चूहे रात में सक्रिय होते हैं, इसलिए शाम ढले रखा ताजा चारा ही सबसे कारगर होता है।
चारा बनाने की सही विधि (1:49 अनुपात)
सामग्री: जिंक फॉस्फाइड पाउडर (80 प्रतिशत वाला) 1 भाग, दरदरा पिसा दाना (गेहूं या बाजरा) 49 भाग और थोड़ा मीठा या सरसों का तेल। यानी 1 किलो दवा में करीब 49 किलो दाना मिलाएं। तेल से चारा चूहे को ज्यादा आकर्षक लगता है।
बनाने का तरीका: पहले दाने में तेल मिला लें, फिर जिंक फॉस्फाइड पाउडर डालकर सूखा मिश्रण बनाएं। दस्ताने जरूर पहनें ताकि पाउडर शरीर में न जाने पाए। चारा सूखा और ताजा होना चाहिए, गीला या पुराना चारा चूहा नहीं खाएगा। सक्रिय बिल गिनकर उसी हिसाब से चारा बनाएं, करीब 1 किलो तैयार चारा लगभग 200 बिलों के लिए पर्याप्त है।
3 दिन की तैयारी: प्री-बेटिंग
पहले 2-3 दिन बिना जहर वाला सादा चारा (वही दाना, वही तेल, बस जिंक फॉस्फाइड के बिना) शाम को बिलों के पास रखें, ताकि चूहों को वहां चारा उठाने की आदत पड़ जाए। तीसरे-चौथे दिन उसी जगह जहरीला चारा रखेंगे तो चूहे बिना शक के खा लेंगे। जल्दबाजी में सीधा जहर वाला चारा रखना ही सबसे ज्यादा फेल होता है।
लगाने का तरीका: शाम को, बिल के अंदर
सिर्फ जीवित बिलों पर चारा रखें, जिनके मुंह साफ हों और आसपास ताजा मिट्टी या बीट के दाने दिखें। पुराने बिलों पर चारा रखना बर्बादी है। विधि इस प्रकार है:
- शाम ढलते समय बिल के मुंह के पास कागज या पॉलीथिन पर एक चम्मच चारा रखें।
- बांस की डंडी की मदद से चारे को बिल के अंदर गहराई तक डालें, ताकि चूहा उसे बाहर न खींच पाए।
- बिल का मुंह घास और मिट्टी से बंद कर दें। इससे चूहा चारा खाने पर मजबूर होता है और दूसरे जानवरों के लिए खतरा भी कम रहता है।
सुबह मरे चूहों को इकट्ठा करके मिट्टी में गहरा दबा दें। खुले में पड़े मृत चूहों से कुत्ते, बिल्ली या चील जैसे शिकारियों को जहर लगने का खतरा रहता है।
दूसरा चरण: जो बच गए, उनके लिए ब्रोमैडियोलोन
शोध में पाया गया है कि जिंक फॉस्फाइड (2 प्रतिशत) के बाद ब्रोमैडियोलोन (0.005 प्रतिशत) का चारा लगाने से नियंत्रण सबसे प्रभावी होता है। ब्रोमैडियोलोन धीमा असर करने वाला विष है, जो चारे से परहेज करने वाले चूहों पर भी काम करता है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के खेत परीक्षणों में इसी क्रम की सिफारिश है: पहले जिंक फॉस्फाइड, फिर ब्रोमैडियोलोन। यानी 10-15 दिन के अंतर पर दूसरा चरण भी जरूरी है।
सुरक्षा के नियम: जान से ज्यादा कीमती कुछ नहीं
जिंक फॉस्फाइड इंसानों और पालतू पशुओं के लिए भी खतरनाक है, इसलिए:
- चारा बच्चों और पशुओं की पहुंच से पूरी तरह दूर रखें। बिलों में बंद करके रखने से खतरा काफी घटता है।
- बनाते समय दस्ताने पहनें, मुंह और नाक ढकें। तैयार चारे को घर में खाद्य सामग्री के पास कभी न रखें।
- बिना विशेषज्ञ सलाह के मात्रा न बढ़ाएं, क्योंकि ज्यादा दवा चारे को बेकार कर देती है।
अकेले नहीं, पूरे गांव के साथ करें
चूहा एक खेत का नहीं, पूरे इलाके का दुश्मन है। आपने अपने खेत के चूहों को मार दिया, पर पड़ोसी के खेत से वे कुछ ही हफ्तों में वापस आ जाएंगे। कृषि विशेषज्ञों का साफ कहना है कि कृंतक नियंत्रण सामूहिक अभियान के रूप में चलाने पर सबसे अच्छा नतीजा देता है। गांव के किसान एक ही हफ्ते में मिलकर प्री-बेटिंग और चारा अभियान चलाएं, मेढ़ों की सफाई करें और बिल नष्ट करें। चीनी मिल क्षेत्र या गन्ना समिति के स्तर पर अभियान चले तो असर कई गुना बढ़ जाता है।
मुख्य बातें
- जिंक फॉस्फाइड का जहरीला चारा 1:49 अनुपात (1 भाग दवा, 49 भाग दरदरा दाना, थोड़ा तेल) में बनाएं, 1 किलो चारा करीब 200 बिलों के लिए पर्याप्त है।
- जहर से पहले 2-3 दिन सादा चारा खिलाएं (प्री-बेटिंग), फिर शाम को सक्रिय बिलों में चारा गहरा डालकर मुंह मिट्टी से बंद करें।
- 10-15 दिन बाद ब्रोमैडियोलोन (0.005%) का दूसरा चरण चलाएं, मरे चूहों को मिट्टी में दबाएं और पूरे गांव में एक साथ अभियान करें।
स्रोत: आईसीएआर/पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृंतक प्रबंधन शोध, कृषि विश्वविद्यालय विस्तार सामग्री और कृषि विशेषज्ञों की सिफारिशें (News18 हिंदी, कृषि जागरण)।
