9% से कम रिकवरी पर मिल नहीं चलेगी: गन्ने में चीनी परता का हिसाब समझें

कुछ दिन पहले बरकातपुर चीनी मिल में गन्ने की रिकवरी जांची गई। आंकड़ा सिर्फ 6 प्रतिशत आया। मिल के संयुक्त अध्यक्ष नरपत सिंह ने साफ कहा, 9 प्रतिशत से कम रिकवरी पर मिल नहीं चलाई जा सकती। पेराई सीजन सिर पर है और खेतों में पानी अभी भरा है। आखिर गन्ने में मिठास बनती कैसे है, और जिस “चीनी परता” की बात हर पेराई सीजन से पहले होती है, उसका मतलब क्या है।
गन्ने में मिठास बनती कैसे है
बिजनौर के नगीना स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि विज्ञानी डॉ. केके सिंह बताते हैं कि गन्ने में दो पदार्थ होते हैं, सुक्रोज और ग्लूकोज। ग्लूकोज पौधे के काम आता है और सुक्रोज से मिठास बनती है। चीनी भी इसी सुक्रोज से निकलती है।
अब बारिश का असर समझें। लगातार बरसात से खेत में पानी भरता है और धूप नहीं निकलती। पौधा पत्ती से अपना खाना नहीं बना पाता, तो अपने अंदर जमा सुक्रोज की ही खपत करने लगता है और रिकवरी घट जाती है। सामान्य गन्ने में करीब 70 प्रतिशत पानी, 10-12 प्रतिशत बगास, तीन से चार प्रतिशत शीरा और 11 प्रतिशत सुक्रोज होता है। अतिवर्षा वाले खेतों में पानी 80 प्रतिशत तक पहुंच जाता है और सुक्रोज घट जाता है।
यही वजह है कि सितंबर के आखिरी हफ्ते की तीन दिन की भारी बारिश के बाद मिल प्रशासन ने रिकवरी की जांच आठ-दस दिन टाल दी है। गन्ना अभी कच्चा है।
चीनी परता यानी पोल प्रतिशत का मतलब
चीनी परता को तकनीकी भाषा में “पोल इन केन” यानी पोल प्रतिशत कहा जाता है। यह बताता है कि गन्ने की डंडी में कुल कितना सुक्रोज मौजूद है। पेराई से पहले हर मिल अपने क्षेत्र के गन्ने की रिकवरी जांचती है। जिस किस्म की चीनी परता ज्यादा होती है, उसी के बीज की मांग बाजार में बनी रहती है। सिर्फ वजन देखकर किस्म चुनना अधूरा फैसला है। वजन के साथ पोल प्रतिशत भी देखना चाहिए।
29 सितंबर की बैठक: 4 नई किस्मों को मंजूरी
चीनी परता की यही कसौटी किस्मों की मंजूरी में भी लागू होती है। गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में 29 सितंबर को हुई बीज गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में चार नई किस्मों को खेती के लिए अनुमोदित किया गया। वैज्ञानिकों ने इनकी उपज, पोल प्रतिशत और अन्य विशेषताओं के आंकड़े समिति के सामने रखे।
पहली किस्म को.शा.23232 गन्ना शोध परिषद शाहजहांपुर ने विकसित की है। औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर, जो मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। नवंबर, जनवरी और मार्च में पोल प्रतिशत क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.31 पाया गया। पेड़ी उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर और लाल सड़न के प्रति रोगरोधी।
दूसरी किस्म को.लख.21201 भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ की देन है। औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर यानी को.0238 के लगभग बराबर, लेकिन पोल इन केन 13.94 प्रतिशत जो मानक किस्म के 13.71 से बेहतर है। लाल सड़न के प्रति उच्च प्रतिरोध क्षमता, पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अनुमोदन।
बाकी दो किस्में मध्य और देर से पकने वाली हैं। को.शा.19235 की औसत उपज 87.58 टन प्रति हेक्टेयर, जो मानक किस्म को.शा.767 से 11.81 प्रतिशत अधिक है। इसका पोल प्रतिशत नवंबर से मार्च तक 11.89 से बढ़कर 13.74 पहुंचा। को.शा.18232 ने 92.38 टन प्रति हेक्टेयर उपज दी, जो मानक किस्म से 26.51 प्रतिशत ज्यादा है, और पेड़ी उपज 82.06 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज हुई।
किस्म चुनते समय किसान क्या देखें
सबसे पहले नवंबर से मार्च तक का पोल प्रतिशत देखें। जो किस्म पेराई के पूरे दौर में स्थिर और ऊंची चीनी परता देती है, वही मिल तक पहुंचने में देरी होने पर भी नुकसान कम कराती है। दूसरी बात, अपने क्षेत्र की पेराई अवधि से किस्म का पकने का समय मिलाएं। अगेती किस्म नवंबर-दिसंबर और मध्य-देर वाली फरवरी-मार्च की पेराई के लिए बेहतर रहती है।
तीसरी बात, लाल सड़न जैसी बीमारियों के प्रति प्रतिरोध क्षमता जरूर पूछें। को.0238 के अनुभव ने सिखाया है कि एक बार बीमारी फैली तो अच्छी किस्म भी कुछ सीजन में दम तोड़ देती है। और बीज हमेशा गन्ना समिति या शोध परिषद के अधिकृत स्रोत से लें। सस्ता और बिना प्रमाण का बीज अक्सर पुरानी या अस्वीकृत किस्म का होता है।
पेराई सीजन की तैयारियां जोरों पर
इस बीच मिलों में नए पेराई सत्र की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। लखीमपुर खीरी की सरजू सहकारी चीनी मिल बेलरायां में 15 नवंबर 2026 से 8 अप्रैल 2027 तक पेराई की योजना है। 144 दिन के इस सत्र में 70 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई और 11 प्रतिशत रिकवरी के अनुमान के साथ करीब 7.70 लाख क्विंटल चीनी का लक्ष्य है। बरकातपुर मिल ने 16 अक्टूबर को पेराई शुरू करने की संभावित तिथि दी थी, पर बारिश के बाद यह तारीख आगे बढ़ सकती है।
जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल के मुताबिक खेतों में पानी भरने का असर पैदावार और रिकवरी दोनों पर पड़ेगा। किसानों के लिए संदेश साफ है। पेराई से पहले अपने गन्ने की पकने की स्थिति जांचें और अगली बुआई के लिए किस्म चुनते समय वजन के साथ चीनी परता को भी तराजू पर रखें।
मुख्य बातें
- बिजनौर में बारिश के बाद गन्ने की रिकवरी जांच में सिर्फ 6% आई, 9% से कम रिकवरी पर मिल नहीं चल सकती।
- 29 सितंबर की उप समिति बैठक में 4 नई किस्मों को.शा.23232, को.शा.19235, को.शा.18232 और को.लख.21201 को मंजूरी मिली।
- किस्म चुनते समय नवंबर से मार्च तक का पोल प्रतिशत, पकने का समय, रोग प्रतिरोध और प्रमाणित बीज जरूर देखें।
स्रोत: किसान तक (1 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण, बिजनौर (29 सितंबर 2026), चिनीमंडी
