कटाई से 40 दिन पहले का कैलेंडर: ब्रिक्स 18+ पर काटो, चीनी प्रतिशत खुद बढ़ेगा

पेराई सीजन शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। हर साल यही होता है। मिल का गेट खुलता है, ट्रॉलियों की लाइन लगती है, और जिसके खेत का गन्ना सबसे पहले कटता है, वही सबसे ज्यादा खुश दिखता है। पर क्या जल्दी कटाई हमेशा फायदे का सौदा है? किसान संगठन इस बार 15 नवंबर से पहले पेराई शुरू न करने की मांग कर रहे हैं, और उनकी दलील सीधी है: कच्चे गन्ने की पेराई से उपज और चीनी की रिकवरी दोनों घटती है। नुकसान किसान का भी है और मिल का भी।
इस गाइड में कोई लंबा सिद्धांत नहीं। कटाई से ठीक 40 दिन पहले शुरू होने वाला एक कैलेंडर है। इस पर चले तो आपका गन्ना ब्रिक्स 18 से ऊपर के परिपक्व स्तर पर कटेगा, और रस में चीनी का प्रतिशत अपने आप बेहतर होगा।
पहले समझें: चीनी प्रतिशत का हिसाब-किताब
गन्ने के रस में जो मीठापन है, वही चीनी है। रस में घुले कुल ठोस पदार्थों को ब्रिक्स कहते हैं, और उसमें असली चीनी के हिस्से को सुक्रोज। मिल जब 100 क्विंटल गन्ना पेरती है, तो उससे कितनी चीनी निकलती है, इसी को शुगर रिकवरी कहते हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज के मुताबिक 2024-25 में यूपी की 122 मिलों की औसत रिकवरी 9.75 प्रतिशत रही। परिपक्व गन्ना इस औसत से ऊपर रहता है, कच्चा नीचे।
एक सच्चाई ईमानदारी से जान लीजिए। यूपी में किसान को भुगतान वजन पर मिलता है, चीनी प्रतिशत पर नहीं। फिर भी फिक्र बनती है, क्योंकि पका गन्ना भारी होता है। रस गाढ़ा होने से डंठल का वजन बढ़ता है, और वजन ही पर्ची की रकम तय करता है। जो किसान कोल्हू पर गुड़ बनाते हैं, उन्हें ज्यादा चीनी वाले गन्ने से हर क्विंटल पर ज्यादा गुड़ मिलता है। यह सीधा मुनाफा है।
कच्चा गन्ना काटने की तीन महंगी गलतियां
पहली गलती: पर्ची के दबाव में जल्दी कटाई। इंडेंट मिलते ही दरांती चल जाती है। गन्ना हरा और डंठल मोटा दिखे, तो पका मान लिया जाता है। पर अंदर चीनी अभी बन ही रही होती है। दो हफ्ते की जल्दी कटाई अधूरी पकी फसल देती है।
दूसरी गलती: कटाई तक पानी देते रहना। बढ़वार में पानी जीवन है, पकने के समय वही पानी दुश्मन बन जाता है। ज्यादा पानी पर पौधा फिर बढ़ने लगता है और जमा चीनी नई बढ़वार में खर्च हो जाती है। रस पतला, चीनी कम।
तीसरी गलती: देर से यूरिया देना। कटाई के नजदीक नाइट्रोजन से पौधा हरा तो रहता है, पर पकता नहीं। हरी पत्ती देखकर किसान खुश होता है, पर रस में चीनी की जगह पानी बढ़ रहा होता है।
इन तीनों गलतियों का इलाज एक ही है: कटाई का सही समय और उससे पहले का सही प्रबंधन। वही यह 40-दिन का कैलेंडर है।
खेत में परिपक्व गन्ना पहचानने के दो पक्के तरीके
कैलेंडर पर चलने से पहले परिपक्वता पहचानना सीख लीजिए, क्योंकि आखिरी फैसला खेत में ही होगा।
छोटा-सा यंत्र है: रस की एक बूंद डालो और ब्रिक्स पढ़ लो। कृषि विज्ञान केंद्रों की सलाह के मुताबिक ब्रिक्स 18 या उससे ऊपर आने पर गन्ना कटाई के लिए परिपक्व माना जाता है। खेत के 3-4 अलग हिस्सों से डंठल लेकर जांचें, एक जगह का नंबर काफी नहीं।
दूसरा तरीका आंख और कान का है, जो बुजुर्ग किसान आज भी इस्तेमाल करते हैं। जब नीचे वाली पत्तियां सूखकर लटकने लगें और डंठल ठोकने पर धातु जैसी खनक दे, तो समझो गन्ना पक गया। यह मीटर जितना सटीक नहीं, पर खेत में तुरंत अंदाजा लगाने के काम आता है।
40 दिन का कटाई कैलेंडर
मान लीजिए आपकी कटाई 20 नवंबर को होनी है, तो 10 अक्टूबर से यह कैलेंडर शुरू होता है। अपनी तारीख के हिसाब से दिन गिन लीजिए।
कटाई से 40 से 30 दिन पहले: आखिरी पानी का फैसला। यह सबसे अहम मोड़ है। भारी-दोमट मिट्टी में कटाई से 3-4 सप्ताह पहले आखिरी सिंचाई दें, हल्की बलुई मिट्टी में 15 दिन पहले तक चल जाता है। इसके बाद खेत को सूखने दें। हल्का सूखा मिलेगा तो पौधा बढ़वार रोककर चीनी जमा करने लगेगा। नाइट्रोजन वाली खाद अब पूरी तरह बंद। बीच में तेज बारिश हो जाए तो सूखने की गिनती बारिश के बाद से फिर शुरू करें।
कटाई से 15 दिन पहले: खेत का निरीक्षण दौरा। पूरे खेत में घूमकर देखें। सूखी-पीली पत्तियां हटा दें, ताकि धूप डंठल तक पहुंचे। कीट या रोग का धब्बा दिखे तो गन्ना पर्यवेक्षक से सलाह लें। पेड़ी की फसल में यह दौरा और भी जरूरी है।
कटाई से 7 दिन पहले: ब्रिक्स जांच और कटाई का क्रम। रिफ्रैक्टोमीटर निकालिए और खेत के अलग-अलग हिस्सों से ब्रिक्स नापिए। 18 से ऊपर है तो हरी झंडी। अब कटाई का क्रम तय करें: जल्दी पकने वाली किस्में पहले काटें, देर से पकने वाली बाद में। जैसे Co 0238 जैसी अगेती किस्में जल्दी पकती हैं, इन्हें पहले निपटाएं। जो खेत सबसे ज्यादा पका है, वही सबसे पहले कटेगा। पर्ची और इंडेंट की तारीख इसी क्रम से मिलाने की कोशिश करें।
कटाई का दिन: साफ और ताजा गन्ना। गन्ना जड़ के पास से काटें, ऊपर का हरा अगोला अलग कर दें। मिट्टी लगी हो तो झाड़ लें। मिल को साफ गन्ना जाएगा तो तौल में कटौती की गुंजाइश कम होगी।
गुड़ बनाने वालों के लिए खास बात
कोल्हू चलाने वालों के लिए यह कैलेंडर दोगुना कीमती है। कटा गन्ना जितनी देर खेत में पड़ा रहता है, उसकी चीनी उतनी घटती है। नियम बनाइए: कटाई के 24 घंटे के अंदर गन्ना कोल्हू पहुंच जाए। ताजा गन्ने का रस गाढ़ा होता है और हर क्विंटल से ज्यादा गुड़ निकलता है।
मुख्य बातें
- कटाई से 3-4 सप्ताह पहले आखिरी सिंचाई दें और नाइट्रोजन बंद कर दें, ताकि पौधा बढ़वार छोड़कर चीनी जमा करे।
- ब्रिक्स 18+ पर गन्ना काटें; रिफ्रैक्टोमीटर न हो तो सूखी लटकती पत्तियां और धातु जैसी आवाज से परिपक्वता पहचानें।
- अगेती किस्में पहले काटें, गुड़ के लिए गन्ना 24 घंटे के अंदर कोल्हू पहुंचाएं।
स्रोत: नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (2024-25 पेराई आंकड़े, चिनीमंडी), कृषि जागरण (परिपक्वता जांच), गांव जंक्शन (सिंचाई प्रबंधन), बिजनेस स्टैंडर्ड हिंदी (पेराई समय पर किसान संगठनों की मांग)।
