गन्ना बोने से पहले खेत ऐसे तैयार करें, मिट्टी बोलेगी पैदावार से

अक्टूबर का महीना है। पश्चिमी यूपी के कई जिलों में किसान शरदकालीन गन्ने की बुवाई की तैयारी में लगे हैं। कोई ट्रैक्टर वाला खोज रहा है, कोई गोबर की खाद की ट्रॉली का भाव पूछ रहा है। भीड़ में एक सवाल दबा रह जाता है — खेत तैयार है या बस दिख रहा है?
ज्यादातर किसान बुवाई वाले दिन खेत में उतरते हैं और हल चलवाते हैं। बीज भी पड़ जाता है। लेकिन फसल जब कद नहीं पकड़ती, गन्ना पतला रह जाता है या तौल पर वजन कम निकलता है, तब समझ आता है कि गड़बड़ बीज में नहीं, तैयारी में थी। गन्ने की 80 प्रतिशत जड़ें 60 सेमी गहराई तक जाती हैं। अगर मिट्टी नीचे से कड़ी है, तो जड़ें फैलेंगी कैसे? यही वजह है कि बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी ही आधी फसल तय कर देती है।
सबसे पहले गहरी जुताई — मिट्टी को सांस लेने दो
गन्ने के खेत में काम शुरू करो एक गहरी जुताई से। मिट्टी पलटने वाले हल (MB प्लो) या डिस्क प्लो से कम से कम 20 से 30 सेमी गहरी जुताई करवाओ। इसके बाद 2 से 3 बार साधारण हल चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाओ।
कई किसान सिर्फ ऊपर-ऊपर हल चलवाते हैं। 10-12 सेमी गहरी मिट्टी तो नरम दिखती है, पर नीचे की परत कड़ी रह जाती है। इसे खेतों में ‘हल की तली’ भी कहते हैं। गहरी जुताई इस कड़ी परत को तोड़ती है, पानी अंदर तक जाता है और जड़ों को फैलने की जगह मिलती है।
एक बात और। जुताई के बाद खेत समतल करना मत भूलो। जहां पानी ठहरेगा, वहां गन्ने की जड़ें सड़ेंगी। पाटा लगाकर खेत एकसार कर दो। यह छोटा काम बुवाई के बाद कई बड़ी दिक्कतों से बचाता है।
गोबर की खाद — मिट्टी की ताकत
रासायनिक खाद फसल को ताकत देती है, लेकिन मिट्टी की सेहत गोबर की खाद से बनती है। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान की सिफारिश है कि बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10 टन सड़ी हुई गोबर की खाद डालो। अच्छी तरह सड़ी खाद होनी चाहिए। ताजी खाद में दीमक और बीमारी का खतरा रहता है।
खाद डालने का समय भी तय है। आखिरी जुताई से पहले खाद खेत में फैला दो, फिर हल चलवाओ ताकि खाद मिट्टी में अच्छी तरह मिल जाए। कुछ किसान बुवाई के दिन कूड़ में खाद डालते हैं, पर पूरे खेत में मिलाने का फायदा ज्यादा होता है। मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और रासायनिक खाद का असर भी बेहतर होता है।
जिन खेतों में लगातार रासायनिक खाद पड़ रही है और मिट्टी कड़ी होती जा रही है, वहां गोबर की खाद और भी जरूरी हो जाती है। मिट्टी जिंदा रहेगी, तभी फसल लंबे समय तक पैदावार देगी।
बुवाई से पहले बेसल डोज का गणित
यह वह कदम है जहां सबसे ज्यादा गलती होती है। या तो खाद कम पड़ती है, या गलत समय पर। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों की सिफारिश के मुताबिक बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर बेसल डोज इस तरह रखो — 100 किलो यूरिया, 500 किलो सिंगल सुपर फॉस्फेट, 100 किलो एमओपी (म्यूरेट ऑफ पोटाश), 25 किलो जिंक सल्फेट और 25 किलो रीजेंट।
इन सभी को कूड़ में डालकर मिट्टी में अच्छी तरह मिलाओ, फिर बीज के टुकड़े रखो। याद रखो, फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय ही देनी है। नाइट्रोजन बाद में टॉप ड्रेसिंग में दो से तीन बार में दी जाती है।
जिंक की बात अलग से करनी जरूरी है। यूपी के तराई और पश्चिमी जिलों के कई खेतों में जिंक की कमी पाई जाती है। कमी वाले खेत में जिंक सल्फेट डालना सीधे पैदावार पर असर डालता है। अगर मिट्टी की जांच करवाई है और रिपोर्ट में जिंक कम आया है, तो यह 25 किलो वाली खुराक बिल्कुल मत छोड़ो।
नाली और जल निकासी — छोटी बात, बड़ा फायदा
गन्ना पानी चाहता है, पर पानी में डूबना नहीं चाहता। बुवाई से पहले नालियों की व्यवस्था पक्की कर लो। खेत के चारों ओर और बीच-बीच में निकासी की नाली बनाओ ताकि बरसात या ज्यादा सिंचाई का पानी खेत से बाहर निकल सके।
जो किसान नाली विधि (फरो मेथड) से बुवाई करते हैं, वे बुवाई से एक-डेढ़ महीना पहले ही 20-25 सेमी गहरी नालियां बना लेते हैं। नाली में गोबर की खाद डालकर सिंचाई कर देते हैं, जिससे मिट्टी बैठकर तैयार हो जाती है। यह तरीका दोमट मिट्टी वाले खेतों में बढ़िया काम करता है।
पिछले कुछ सालों में जलभराव से गन्ने की फसल का नुकसान बढ़ा है। बुवाई से पहले 2-3 घंटे निकालकर निकासी की नाली साफ कर लेना, पूरी फसल का बीमा जैसा है।
खरपतवार और जड़ रोग की रोकथाम
खेत तैयार करते समय पुरानी फसल के अवशेष और खरपतवार पूरी तरह साफ करो। पिछली फसल की जड़ें और ठूंठ अगर खेत में रह गए, तो उनमें पनपने वाले रोग नई फसल में फैल सकते हैं।
बीज के टुकड़ों का उपचार भी तैयारी का हिस्सा है। बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक घोल से उपचारित करो। उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान के विशेषज्ञ कार्बेन्डाजिम के 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल से बीज उपचार की सलाह देते हैं। यह छोटा खर्च जड़ सड़न जैसी बीमारियों से फसल को बचाता है।
एक और व्यावहारिक नुस्खा — बुवाई से पहले खेत में हल्की सिंचाई करके खरपतवार उगा लो, फिर हल चलाकर नष्ट कर दो। इसे ‘स्टेल सीडबेड’ तकनीक कहते हैं। बुवाई के बाद खरपतवार का दबाव काफी कम हो जाता है।
मुख्य बातें
- गन्ने की 80% जड़ें 60 सेमी गहराई तक जाती हैं, इसलिए 20-30 सेमी गहरी जुताई और 2-3 बार हल चलाना जरूरी है।
- बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 10 टन सड़ी गोबर की खाद आखिरी जुताई से पहले डालकर मिट्टी में मिलाएं।
- बेसल डोज में 100 किलो यूरिया, 500 किलो एसएसपी, 100 किलो एमओपी, 25 किलो जिंक सल्फेट और 25 किलो रीजेंट प्रति हेक्टेयर कूड़ में डालें।
स्रोत: उत्तर प्रदेश गन्ना शोध संस्थान (News18 हिंदी के माध्यम से), भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ (IISR) की ‘Glimpses of Sugarcane Cultivation’ तकनीकी पुस्तिका, कृषि तक।
