खेती गाइड

शरद बुवाई के 100 दिन: खाली गैप ही उपज का सबसे बड़ा चोर, भरने का सही समय

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 13 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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शरद बुवाई के 100 दिन: खाली गैप ही उपज का सबसे बड़ा चोर, भरने का सही समय

अक्टूबर की सुबह है। आपने बुवाई के बीस दिन बाद खेत में पहला चक्कर लगाया। कहीं-कहीं तीन-तीन इंच के पौधे सिर उठा रहे हैं, और कहीं कतार के बीच दो-दो हाथ की जगह एकदम खाली पड़ी है। यहीं खड़े-खड़े आपके दिमाग में सवाल उठता है — ये खाली जगह अपने आप भर जाएगी या कुछ करना पड़ेगा?

खाली जगह अपने आप नहीं भरती। और फसल के इस दौर में खाली जगह का मतलब है कम पौधे, कम कल्ले, और कटाई के दिन कम तौल। अच्छी बात यह है कि बुवाई के बाद पहले 100 दिन अगर सही तरीके से संभाल लिए जाएं, तो बिना कोई महंगी दवा डाले खेत का पूरा गणित सुधर जाता है। यह गाइड उसी 100 दिनों का फील्ड कैलेंडर है।

दिन 10 से 15: अंकुरण की पहली जांच

बुवाई के दस से पंद्रह दिन बाद खेत में चलें और देखें कि कहां-कहां पौधे फूटे हैं। अच्छे बीज से 15 से 20 दिन में अंकुरण पूरा हो जाना चाहिए। जांच का तरीका आसान है — तीन-चार अलग कतारों में दस मीटर का फीता बिछाकर फूटे पौधे गिन लें।

जहां प्रति मीटर 8 से 10 पौधे फूटे हैं, वहां सब ठीक है। जहां गिनती 5-6 से नीचे है, वहां गैप बन रहा है। कोई कतार पूरी खाली दिखे तो कारण समझें — मिट्टी सूख गई थी, बुवाई गहरी हो गई, या बीज कमजोर था। बीज की तैयारी पर हमारा बीज उपचार गाइड भी पढ़ें।

दिन 15 से 25: गैप फिलिंग — खाली जगह भरने का सही तरीका

कृषि सलाह एक ही बात दोहराती है — खाली जगहों में पहले से अंकुरित गन्ने के पैडों (सेट्स) से गैप फिलिंग करें। सूखे सेट लगाने का कोई फायदा नहीं; वे देर से फूटेंगे और फसल असमान हो जाएगी।

बुवाई के साथ ही खेत के किसी कोने में या बोरे में कुछ सेट अलग से अंकुरित करके रख लें। बुवाई के 25वें दिन तक इन्हें खाली जगहों में 3-4 सेंटीमीटर गहरा दबाकर लगाएं और तुरंत हल्की सिंचाई दें। पॉलीबैग में पहले से उगाए पौधों से भी गैप भरा जा सकता है। काम हमेशा सुबह या शाम करें। दिन 30 के बाद लगाए पौधे पुरानी फसल की छाया में दबकर कमजोर रह जाते हैं।

दिन 30 से 60: रोगिंग — बीमार पौधों को उखाड़ें

अंकुरण के बाद खेत में कुछ पौधे बाकी फसल से अलग दिखते हैं। दो लक्षण सबसे खतरनाक हैं — घास जैसा पतला पौधा जिसके नीचे से ढेर सारी घास जैसी पत्तियां निकल रही हों (घासी शूट), और पौधे के बीच से काली चाबुक जैसी डंडी (कंडुवा)।

ऐसे पौधे दिखते ही जड़ समेत उखाड़कर खेत से दूर नष्ट करें। इन्हें काटकर खेत में छोड़ना या चारे में मिलाना गलती है, क्योंकि रोग अगले साल के बीज में भी पहुंच जाता है। रोगिंग का खर्च शून्य है, लेकिन यही काम अगले सीजन की फसल बचाता है।

दिन 60 से 90: थिनिंग — जरूरत से ज्यादा कल्ले हटाएं

टिलरिंग के दौर में एक पौधे से कई कल्ले निकलते हैं। कुछ कल्ले मोटे और ताकतवर होते हैं, कुछ पतले और देर से निकले कमजोर। अगर सारे कल्लों को बढ़ने दिया जाए तो फसल घनी हो जाती है, हवा और धूप अंदर नहीं पहुंचती, और पतले गन्नों की संख्या बढ़ जाती है।

देर से निकले कमजोर और पतले कल्लों को हाथ से हटाते रहें। मजबूत कल्लों को जगह मिलेगी तो वे मोटे होंगे और वजन बढ़ेगा। गन्ने में कमाई कल्लों की गिनती से नहीं, मोटे और वजनी गन्नों की गिनती से होती है।

पानी का कैलेंडर: शरद बुवाई में सिंचाई का हिसाब

शरदकालीन गन्ने में करीब 20 दिन पर एक सिंचाई करने की सलाह दी जाती है, मिट्टी की नमी देखकर अंतराल घटाया-बढ़ाया जा सकता है। बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई अंकुरण के लिए जरूरी है। शुरुआत के 35 से 100 दिनों के दौरान खेत में नमी बनी रहनी चाहिए — सूखी मिट्टी में न अंकुरण होगा, न कल्ले निकलेंगे।

जिन किसानों के पास पानी सीमित है, वे एकान्तर नालियों में सिंचाई करें — यानी एक नाली छोड़कर अगली में पानी दें। इससे आधे पानी में काम चल जाता है। एक बात का और ध्यान रखें — खेत में पानी ठहरने न दें। जलभराव गन्ने की जड़ों को उतना ही नुकसान पहुंचाता है जितना सूखा।

खरपतवार: पहली गुड़ाई का सही समय

गन्ने का अंकुरण देर से होता है, इसलिए खरपतवार कई बार गन्ने से पहले ही उग आते हैं। कृषि सलाह के अनुसार बुवाई के 25 से 30 दिनों के अंतराल पर निंदाई-गुड़ाई करनी चाहिए। बुवाई के तुरंत बाद खरपतवारनाशी का छिड़काव भी किया जा सकता है।

हर सिंचाई के बाद हल्की गुड़ाई करने से दो फायदे होते हैं — खरपतवार मरते हैं और मिट्टी में हवा जाती है। बुवाई के करीब 45वें दिन हाथ से एक अच्छी निराई कर लें। इस एक निराई का असर पूरी फसल पर दिखता है।

पहली टॉप ड्रेसिंग: कब और कैसे

गैप फिलिंग और निराई के बाद पौधों को ताकत देने की बारी आती है। सिंचाई के बाद नमी वाली मिट्टी में नाइट्रोजन की पहली टॉप ड्रेसिंग जड़ के पास करें और फिर हल्की गुड़ाई कर दें, ताकि खाद मिट्टी में मिल जाए। गीली मिट्टी में डाली गई खाद का असर सूखी मिट्टी की तुलना में कहीं ज्यादा होता है।

खाद की मात्रा हमेशा मिट्टी जांच के हिसाब से तय करें। अंदाजे से ज्यादा यूरिया डालना पौधों को हरा तो करता है, लेकिन गन्ने को पतला और रोग के प्रति कमजोर भी बनाता है। संतुलित खाद का मतलब है सही मात्रा, सही समय और सही जगह।

मुख्य बातें

  • बुवाई के 10-15 दिन बाद अंकुरण जांच करें और 15-25 दिन के बीच अंकुरित सेटों से गैप फिलिंग पूरी करें।
  • बीमार पौधों (घासी शूट, कंडुवा) को जड़ समेत उखाड़कर खेत से बाहर नष्ट करें; देर से निकले कमजोर कल्ले हटाते रहें।
  • शरद बुवाई में करीब 20 दिन पर सिंचाई, 25-30 दिन पर पहली निंदाई, और नमी वाली मिट्टी में पहली टॉप ड्रेसिंग करें।

स्रोत: कृषि जागरण — शरदकालीन गन्ने की वैज्ञानिक खेती (सिंचाई, खरपतवार प्रबंधन); ट्रैक्टर जंक्शन — गन्ने से अधिक पैदावार के तरीके (गैप फिलिंग, एकान्तर नाली सिंचाई); गांव जंक्शन — गन्ने की बुवाई से कटाई तक गाइड (25वें दिन गैप भरना, 45वें दिन निराई)।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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