7 क्विंटल बीज से एक एकड़ गन्ना बुवाई: 25 दिन में आंगन में तैयार करें 10,000 पौधे

अक्टूबर का महीना चल रहा है और शरदकालीन गन्ने की बुवाई का समय सिर पर है। लेकिन गाँवों में जाकर देखिए, आधे किसानों के खेत अभी खाली ही नहीं हुए। कहीं धान खड़ा है, कहीं आखिरी सिंचाई बाकी है। पारंपरिक बुवाई का नियम सीधा है: खेत खाली होगा, तब बुवाई होगी। इसलिए हर साल कई किसान देर से बुवाई के लिए मजबूर होते हैं और उपज का नुकसान झेलते हैं।
अब दूसरी तस्वीर देखिए। गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक, सिंगल बड यानी बडचिप नर्सरी तकनीक से एक एकड़ की रोपाई के लिए करीब 10,000 पौधे काफी होते हैं। और इन 10,000 पौधों के लिए बीज गन्ना सिर्फ 7 से 8 क्विंटल लगता है। पारंपरिक तीन-आंख वाले टुकड़ों की बुवाई में इतनी ही जमीन पर 20 से 25 क्विंटल बीज खप जाता है। मतलब बीज का खर्च करीब दो-तिहाई तक घट जाता है। अंकुरण 90 प्रतिशत से ज्यादा मिलता है, और नर्सरी तैयार होने में 25 से 30 दिन लगते हैं।
यानी खेत खाली होने का इंतजार किए बिना, घर के आंगन में नर्सरी लगाकर बुवाई की तैयारी अभी से शुरू की जा सकती है। नीचे 25 दिन का सप्ताह-दर-सप्ताह कैलेंडर है, जिसे इसी सीजन में अपनाया जा सकता है।
सप्ताह 1: चिप काटिए, ट्रे में लगाइए
सबसे पहले बीज गन्ना चुनें। 8 से 10 महीने पुराना, मोटा और रसीला डंठल लें, जिसकी आंखें उभरी हुई हों। लाल सड़न या उकठा लगा डंठल बिल्कुल न लें। आंख के ऊपर-नीचे 2 से 3 सेंटीमीटर डंठल छोड़ते हुए बडचिप काटें। बडचिप कटर, हैकसॉ ब्लेड या तेज चाकू चलेगा, बस आंख पर कट या दबाव न पड़े।
काटे हुए चिप्स को बाविस्टिन जैसे अनुशंसित फफूंदनाशी के घोल में डुबोकर उपचार करें। इससे बीज से लगने वाली बीमारियों का खतरा काफी घट जाता है। उपचार के बाद चिप्स को प्रो-ट्रे में लगाएं। ट्रे में कोकोपीट या वर्मीकंपोस्ट भरें, ताकि नमी बनी रहे। ट्रे को घर के आंगन या किसी खाली जगह में रखकर ऊपर से पुआल की मल्चिंग कर दें। छोटी सी जगह में सैकड़ों पौधे तैयार हो जाते हैं।
एक एकड़ के लिए करीब 10,000 पौधे चाहिए, इसलिए 10 से 15 प्रतिशत अतिरिक्त चिप लगाएं। खराब अंकुरण वाली जगह की भरपाई नर्सरी में ही हो जाएगी, खेत में गैप-फिलिंग की झंझट खत्म।
सप्ताह 2-3: अंकुरण और छंटाई
इन दो हफ्तों में चिप्स से अंकुर निकलने लगेंगे। ट्रे में हल्की नमी बनाए रखें। ज्यादा पानी न दें, कीचड़ से चिप सड़ सकता है। जो चिप अंकुरित न हो या रोगी दिखे, उसे निकाल दें। नर्सरी की यही खासियत है कि कमजोर पौधा खेत तक पहुंचता ही नहीं। हर पौधे को बराबर जगह, धूप और पोषण मिलता है, इसलिए बाद में कल्ले भी एकसमान निकलते हैं।
इस दौरान खेत की तैयारी भी शुरू कर दें। गहरी जुताई करें और रोटावेटर चलाकर मिट्टी भुरभुरी बना लें। शोध संस्थान की सलाह के मुताबिक 3 फीट की दूरी पर कूड तैयार करें।
सप्ताह 4: रोपाई का समय
25 से 30 दिन में पौधे 4 से 5 पत्ती वाले हो जाते हैं। यही रोपाई का सही समय है। पौधों को कूड में 1.5 फीट की आपसी दूरी पर रोपें। रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करना अनिवार्य है, ताकि जड़ें मिट्टी पकड़ लें। व्यवस्थित दूरी पर रोपे पौधों से फसल घनी और एकसमान होती है।
ध्यान रहे, 35 दिन से ज्यादा पुराना पौधा न रोपें। ज्यादा बड़ा पौधा रोपाई का झटका ठीक से नहीं झेल पाता और उसकी बढ़वार धीमी पड़ जाती है।
गणित साफ: बीज, पौधे और दूरी एक नज़र में
गन्ना शोध संस्थान के प्रसार अधिकारियों के मुताबिक, सामान्य विधि में प्रति हेक्टेयर 50 से 60 क्विंटल बीज खर्च होता है, जबकि बडचिप विधि में 17 से 18 क्विंटल बीज ही पर्याप्त है। एक हेक्टेयर के लिए मात्र 25,000 पौधों की जरूरत पड़ती है, जो एक एकड़ में करीब 10,000 बैठते हैं। अंकुरण 90 प्रतिशत से अधिक रहता है, और बीज गुणन की क्षमता पुरानी विधि के 10 गुना के मुकाबले करीब 100 गुना तक होती है। यह फर्क ही इस तकनीक की असली ताकत है।
सबसे आम 3 गलतियां, जिनसे बचें
पहली गलती है खराब बीज का चुनाव। सूखी, सिकुड़ी या काली पड़ी आंख से पौधा नहीं बनेगा। नर्सरी में जो आंख लगेगी, वही पौधा खेत जाएगा, इसलिए बीज में कंजूसी न करें।
दूसरी गलती है ट्रे में ज्यादा पानी देना। बडचिप को नमी चाहिए, कीचड़ नहीं। पानी जमा हुआ तो चिप सड़ जाएगा।
तीसरी गलती है रोपाई में देरी। “थोड़ा और बड़ा हो जाए” के चक्कर में पौधा बूढ़ा हो जाता है। 25 से 30 दिन का पौधा सबसे फुर्तीला होता है।
आपकी जेब पर इसका असर
बडचिप नर्सरी का सबसे सीधा फायदा बीज की बचत है। जो गन्ना बीज में खपता था, वह अब मिल को जाएगा और उसका भुगतान आपकी जेब में आएगा। दूसरा फायदा है एकसमान फसल। चुने हुए स्वस्थ पौधे रोपने से खेत में खाली जगह नहीं रहती, कल्ले बराबर निकलते हैं और कटाई के समय फसल एक जैसी तैयार होती है। शरद बुवाई के लिए यह तकनीक खास तौर पर कारगर है, क्योंकि नर्सरी खेत खाली होने से पहले तैयार हो जाती है और बुवाई में देरी नहीं होती।
मुख्य बातें
- एक एकड़ के लिए सिर्फ 7-8 क्विंटल बीज से करीब 10,000 पौधे तैयार करें; पारंपरिक विधि में 20-25 क्विंटल बीज लगता है।
- 25-30 दिन में आंगन की प्रो-ट्रे नर्सरी तैयार; कूड की दूरी 3 फीट और पौधे से पौधे की दूरी 1.5 फीट रखें।
- बाविस्टिन से बीज उपचार करें, 35 दिन से पुराना पौधा न रोपें और रोपाई के तुरंत बाद सिंचाई करें।
स्रोत: स्थानीय18/News18 हिंदी में गन्ना शोध संस्थान (शाहजहांपुर) के प्रसार अधिकारियों की सलाह पर प्रकाशित रिपोर्टें; चित्र: गाँव कनेक्शन।
