गन्ने से थाली-कटोरी: लखीमपुर का ₹3,080 करोड़ प्लांट अक्टूबर में, 2,000 से ज्यादा रोजगार

लखीमपुर खीरी के किसान ने आज तक अपना गन्ना चीनी मिल को बेचा और बदले में चीनी या एथनॉल बनते देखा। इस अक्टूबर से उसी गन्ने से एक नई चीज़ बनने की तैयारी है: थाली, कटोरी, स्ट्रॉ और पानी की बोतल। देश का पहला बड़े पैमाने का बायोपॉलिमर प्लांट गोला गोकर्णनाथ के कुंभी चीनी मिल परिसर में बनकर लगभग तैयार है। अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर 2026 में इसे चालू कर दिया जाएगा।
यह खबर सिर्फ एक फैक्ट्री की नहीं है। जिले के किसान परिवारों के लिए इसका मतलब है गन्ने का नया खरीदार और युवाओं के लिए हजारों नौकरियां।
20 अगस्त को हुआ DM का निरीक्षण, तैयारी आखिरी चरण में
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने 20 अगस्त 2026 को निर्माणाधीन प्लांट का निरीक्षण किया था। प्लांट के अधिकारियों ने उन्हें पूरे कैंपस का लेआउट दिखाया और उत्पादन की अलग-अलग अवस्थाएं समझाईं। जिलाधिकारी ने खुद वह प्रक्रिया देखी जिसमें गन्ना पहले चीनी में बदलेगा और फिर वही चीनी PLA यानी पॉलीलैक्टिक एसिड में तब्दील होगी।
शिलान्यास 22 फरवरी 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था। शुरुआती निवेश का अनुमान ₹2,850 करोड़ था, जो अब ₹3,080 करोड़ पहुंच चुका है।
80,000 टन सालाना: सब कुछ एक ही कैंपस में
इस प्लांट की सबसे बड़ी खासियत इसका एकीकृत कैंपस है। लखीमपुर खीरी के खेतों का गन्ना आएगा, उसी से चीनी बनेगी और फिर उसी चीनी से PLA तैयार होगा। कच्चा माल कहीं बाहर से नहीं मंगाना पड़ेगा।
सालाना 80,000 टन PLA बनाने का लक्ष्य है, और पूरी प्रक्रिया 100% नवीकरणीय ऊर्जा पर चलेगी। आम प्लास्टिक की तुलना में इसके उत्पादन से 68% कम ग्रीनहाउस गैसें निकलती हैं। तैयार उत्पाद (स्ट्रॉ, कटलरी, फूड ट्रे, बोतल, कैरी बैग) तीन से छह महीने में प्राकृतिक रूप से गल जाते हैं।
पर्यावरण की एक और गारंटी “जीरो लिक्विड डिस्चार्ज” व्यवस्था है। इसके तहत प्लांट का कोई भी तरल कचरा नदी-नालों में नहीं छोड़ा जाएगा। चीनी मिलों के प्रदूषण को लेकर आसपास के किसानों की जो चिंता रहती है, उसके लिहाज से यह अहम बिंदु है।
रोजगार का हिसाब: प्लांट में 250, क्लस्टर में 2,000 से ज्यादा
किसान परिवारों के युवाओं के लिए सबसे ठोस खबर रोजगार वाली है। प्लांट में करीब 250 सीधे रोजगार बनेंगे: उत्पादन, अनुसंधान और संचालन में। शुरुआती योजना में यह संख्या 225 थी, जो बढ़कर करीब 250 पहुंच गई है। इसके अलावा मूल्य-श्रृंखला में 2,000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार का अनुमान है।
इतना ही नहीं। कंपनी कुंभी में ही एक बायोप्लास्टिक क्लस्टर भी विकसित कर रही है, जहां 20 से ज्यादा MSME इकाइयां PLA को तैयार उत्पादों (स्ट्रॉ, कटलरी, सैशे, फिल्म, पैकेजिंग) में बदलेंगी। तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर युवाओं और महिलाओं के कौशल विकास पर भी काम होगा।
PLA के कचरे को बायोगैस और खाद में भी बदला जा सकेगा। यानी प्लांट से निकला कचरा खेत की मिट्टी तक वापस पहुंचेगा।
किसान के हिस्से में क्या आएगा
अब सबसे बड़ा सवाल इससे किसान की फसल या भुगतान को क्या फायदा होगा? दो बातें गौर करने लायक हैं।
पहली, प्लांट का कच्चा माल लखीमपुर खीरी के खेतों से आएगा। यानी गन्ने का एक नया, बड़ा और स्थायी खरीदार जिले के भीतर ही तैयार होगा। स्थानीय मांग बढ़ने से मिलों के बीच गन्ने के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, और किसान की सौदेबाजी की स्थिति मजबूत होगी।
दूसरी, बलरामपुर चीनी मिल्स के पास कमाई का तीसरा बड़ा स्रोत जुड़ेगा। अब तक गन्ने की खपत मुख्यतः चीनी और एथनॉल में होती थी। PLA तीसरा उपयोग बनेगा। तीनों उत्पादों की मांग अलग-अलग चक्रों में रहती है। बकाया भुगतान से जूझते किसानों के लिए मिल की मजबूत वित्तीय स्थिति ही सबसे बड़ी गारंटी होती है।
एक ईमानदार बात भी जान लीजिए
PTI की खबर में लिखा है — प्लांट के “अक्टूबर में चालू होने की संभावना” है, यानी यह अधिकारियों का लक्ष्य है, पत्थर की लकीर नहीं। बड़े औद्योगिक प्लांटों में कुछ हफ्तों की देरी आम बात है। फिर भी निर्माण काफी हद तक आगे बढ़ चुका है, और जिला प्रशासन खुद तैयारियों पर नजर रखे हुए है।
किसानों के लिए अच्छी खबर यह है कि गन्ने का नया बाज़ार अब दूर की कल्पना नहीं, वह कुंभी की जमीन पर खड़ा दिख रहा है।
मुख्य बातें
- कुंभी (गोला गोकर्णनाथ) में ₹3,080 करोड़ का देश का पहला बड़ा PLA बायोपॉलिमर प्लांट, अक्टूबर 2026 में चालू होने की उम्मीद।
- सालाना 80,000 टन क्षमता, 100% नवीकरणीय ऊर्जा, जीरो लिक्विड डिस्चार्ज; गन्ना, चीनी और PLA एक ही कैंपस में।
- प्लांट में करीब 250 सीधे और क्लस्टर-मूल्य श्रृंखला में 2,000 से ज्यादा रोजगार; किसानों को गन्ने का नया स्थायी खरीदार।
स्रोत: PTI (इकोनॉमिक टाइम्स, द हिंदू बिजनेसलाइन, 21 अगस्त 2026), GKToday, बिजनेस स्टैंडर्ड, कंस्ट्रक्शन वर्ल्ड।
