गन्ना पैसा अटका? 1,936 करोड़ की लड़ाई से सीखो, भुगतान दिलवाने के 5 रास्ते

बिजनौर के एक किसान की पर्ची 22 दिन पहले निकली थी। गन्ना तौल केंद्र से मिल पहुंच गया, पर्ची की रसीद जेब में है, लेकिन खाते में अब तक एक रुपया नहीं आया। दशहरा बीत गया, दिवाली सामने है और घर का खर्च सिर पर। वह मिल के चक्कर लगा रहा है, हर बार वही जवाब: “हो जाएगा।” यह कहानी यूपी के हजारों किसानों की है।
इस कहानी का दूसरा पहलू यह है कि ऐसे ही अटके पैसों की लड़ाई कोर्ट तक गई और जीती गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 31 अगस्त 2026 को दर्ज किया कि वसूली प्रमाणपत्रों के तहत मिलों से 1,936 करोड़ रुपये की वसूली बाकी है। इसमें 1,087 करोड़ मूल बकाया और 849.5 करोड़ ब्याज था। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि ब्याज के नाम पर “एक पैसा भी वसूल नहीं किया गया”। फिर 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की चुनौती खारिज कर दी और कहा कि 14 दिन में भुगतान और देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज किसानों के लिए अनिवार्य सुरक्षा है, जो उन्हें कर्ज के जाल से बचाती है।
यानी लड़ाई लड़ी जा सकती है। नीचे वही तरीका है, पांच रास्ते, जिस क्रम में इन्हें अपनाना चाहिए।
सबसे पहले: कागज संभालो, फिर शिकायत
शिकायत से पहले अपना सबूत मजबूत करो। पर्ची की रसीद, तौल केंद्र की प्रिंटेड रसीद, कैलेंडर/सट्टे की प्रति, मोबाइल पर आया एसएमएस और बैंक खाते का ब्योरा, सब एक जगह रखो। तौल के समय कांटे का शून्य वजन, प्रिंटेड रसीद पर वाहन संख्या और वजन, तीनों मिला लो। कागज बिना शिकायत आधी होती है।
रास्ता 1: टोल-फ्री कॉल सेंटर पर फोन
गन्ना विभाग का टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 गन्ना खरीद-बिक्री से जुड़ी हर समस्या के लिए है। पर्ची, सट्टा, कैलेंडर और सर्वे से जुड़ी दिक्कत हो तो ईआरपी कंपनी का नंबर 1800-103-5823 भी चलता है। पेराई सीजन (अक्टूबर से मई) में यह कॉल सेंटर चौबीसों घंटे काम करता है। फोन पर कॉल अधिकारी आपका नाम, पता, किसान कोड, गांव कोड और समस्या नोट करेगा। शिकायत जिला स्तर के अधिकारी को भेजी जाएगी और निपटारे की सूचना आपको एसएमएस से मिलेगी। सबसे बड़ा फायदा: आपकी शिकायत का रिकॉर्ड बन जाता है, जो आगे काम आता है।
रास्ता 2: ऑनलाइन शिकायत, e-Ganna से
caneup.in पोर्टल पर शिकायत निवारण कॉलम में शिकायत दर्ज की जा सकती है। e-Ganna ऐप पर भी शिकायत का विकल्प है। ऑनलाइन दर्ज शिकायत का फायदा यह है कि उसका नंबर आपके पास रहता है और अधिकारी उसे एक तय समय में सुलझाने के लिए बाध्य है। मुख्यालय के अधिकारी शिकायतों के निपटारे की रोजाना निगरानी करते हैं। अगर फोन पर बात नहीं बनी, तो लिखित ऑनलाइन शिकायत अगला मजबूत कदम है।
रास्ता 3: किसान सहायता केंद्र और जिला गन्ना अधिकारी
विभाग ने पूरे प्रदेश में 451 किसान सहायता केंद्र बनाए हैं। सहारनपुर क्षेत्र में 56, मेरठ में 57, मुरादाबाद में 72, बरेली में 55, लखनऊ में 66, अयोध्या में 35, देवीपाटन में 37, गोरखपुर में 30 और देवरिया में 43 केंद्र हैं। यहां घोषणा-पत्र भरने और समिति की सदस्यता जैसे कामों में मुफ्त मदद मिलती है। अपने जिले के गन्ना अधिकारी से मिलकर लिखित में शिकायत दो। लिखित शिकायत का असर फोन वाली शिकायत से ज्यादा होता है, क्योंकि उस पर अधिकारी को जवाब देना पड़ता है।
रास्ता 4: वसूली प्रमाणपत्र का रास्ता
अगर मिल महीनों से भुगतान नहीं कर रही, तो वसूली प्रमाणपत्र (आरसी) का रास्ता खुलता है। बकाया राशि की वसूली भूमि राजस्व के बकाए की तरह की जा सकती है, यानी मिल की संपत्ति पर कार्रवाई संभव है। इलाहाबाद हाईकोर्ट का 1,936 करोड़ वाला मामला इसी रास्ते का उदाहरण है। कोर्ट ने यह भी पकड़ा था कि अधिकारियों ने 15 प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत ब्याज पर आरसी जारी कर दी थी, जिस पर फटकार लगी। इसका मतलब साफ है: आपका ब्याज घटाया नहीं जा सकता। इस रास्ते के लिए गन्ना आयुक्त कार्यालय तक शिकायत पहुंचानी पड़ती है।
रास्ता 5: भाव का हक, FRP से कम पर गन्ना नहीं
यह रास्ता शिकायत से पहले जानना जरूरी है। 2026-27 सीजन के लिए केंद्र सरकार ने उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर लागू है। 9.5 प्रतिशत से कम रिकवरी वाली मिलों में भी किसान को 338.3 रुपये से कम नहीं मिलेगा। यह भाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू है। एक बात स्पष्ट रहे: 2026-27 के लिए यूपी के राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। जब तक एसएपी घोषित नहीं होता, मिलें एफआरपी से कम पर गन्ना नहीं खरीद सकतीं।
याद रखने वाली बात
पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास पेराई की तैयारी में हैं। नया सीजन शुरू होने से पहले पुराना बकाया निकलवाना आसान होता है, क्योंकि इस समय प्रशासन का ध्यान भी मिलों पर होता है। शिकायत क्रम से करो: फोन, फिर ऑनलाइन, फिर लिखित, फिर आरसी। हर कदम पर कागज संभालो। और हां, देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज आपका हक है, इसे मांगने में झिझक मत करो।
मुख्य बातें
- भुगतान 14 दिन में मिलना कानूनन जरूरी है, देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज किसान का हक है।
- शिकायत के लिए 1800-121-3203 (विभाग) और 1800-103-5823 (पर्ची/सट्टा/कैलेंडर) टोल-फ्री नंबर 24x7 उपलब्ध हैं।
- 1,936 करोड़ के बकाए पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश बताते हैं कि वसूली प्रमाणपत्र का रास्ता काम करता है।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (9 अक्टूबर 2026), द बार बुलेटिन (9 अक्टूबर 2026), द हिंदू बिजनेसलाइन (मई 2026), चिनीमंडी
