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गन्ना भुगतान 14 दिन में न मिले तो 15% ब्याज का हक: पैसा मांगने की पूरी प्रक्रिया

✍️ Aamir Raza · 🗓 04 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

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गन्ना भुगतान 14 दिन में न मिले तो 15% ब्याज का हक: पैसा मांगने की पूरी प्रक्रिया

28 सितंबर को शामली में जिलाधिकारी आलोक यादव ने तीनों चीनी मिलों के अधिकारियों को बुलाया था। थानाभवन चीनी मिल के आंकड़े सामने आए तो माहौल बदल गया। पेराई सत्र 2025-26 में इस मिल पर कुल 301.60 करोड़ रुपये का गन्ना मूल्य बनता था, लेकिन किसानों को अब तक सिर्फ 220.23 करोड़ मिले। बाकी 81.37 करोड़ रुपये अभी भी अटके हैं। डीएम ने कड़ी नाराजगी जताई और बकाया का शत-प्रतिशत भुगतान तुरंत करने के निर्देश दिए।

उन्होंने यह भी साफ कहा कि नया पेराई सत्र 2026-27 हर हाल में 15 अक्टूबर 2026 तक शुरू होना चाहिए। (लाइव हिंदुस्तान, 28 सितंबर 2026)

गन्ना तौल कर चला जाता है, मिल चीनी बेचती है, और किसान का पैसा महीनों खाते में नहीं पहुंचता। सवाल सीधा है: जब देरी की कीमत किसान चुकाता है, तो मिलें देरी की कीमत क्यों न चुकाएं? जवाब कानून में है। भुगतान में देरी पर किसानों को 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पाने का कानूनी हक है।

14 दिन का नियम: कानून क्या कहता है

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार ने गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 की समीक्षा करते हुए नया ड्राफ्ट तैयार किया है, जिसमें पुराना नियम जस का तस रखा गया है। चीनी मिल को गन्ना खरीद के 14 दिनों के भीतर किसानों का पूरा भुगतान करना होगा। समय पर भुगतान न होने पर बकाया राशि पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज देना पड़ेगा। (दैनिक जागरण, नई दिल्ली ब्यूरो)

यह नियम सिर्फ कागज पर नहीं है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 23 दिसंबर 2021 के फैसले में कहा था कि 14 दिन के भीतर भुगतान कानूनन अनिवार्य है और देरी पर 15 फीसदी वार्षिक ब्याज देय होगा। (किसान इंडिया)

ब्याज का हिसाब समझिए

यह रकम मिल को मूल भुगतान के ऊपर अलग से देनी होती है। एक मोटा हिसाब देखिए। अगर किसी किसान का एक लाख रुपये का गन्ना मूल्य 30 दिन देरी से मिला, तो 15 प्रतिशत वार्षिक दर से करीब 1,233 रुपये ब्याज बनेगा। देरी तीन महीने की हो, तो रकम करीब 3,700 रुपये तक पहुंच जाएगी। देरी जितनी लंबी, ब्याज उतना ही ज्यादा।

व्यवहार में मिलें यह ब्याज अपने आप नहीं देतीं। किसान को इसकी मांग लिखित में उठानी पड़ती है।

2025-26 का कितना पैसा मिल चुका, कितना बाकी

किसान तक (टीवी9) की रिपोर्ट के अनुसार पेराई सत्र 2025-26 में 94.86 प्रतिशत से अधिक गन्ना मूल्य का भुगतान पूरा हो चुका है, और प्रदेश की 102 चीनी मिलों ने शत-प्रतिशत भुगतान कर दिया है। 23 सहकारी चीनी मिलों ने 2,820.89 करोड़ रुपये चुकाए, जबकि राज्य चीनी निगम की तीनों मिलों ने 543.51 करोड़ रुपये का भुगतान किया। (किसान तक, हिंदी इंडियाटाइम्स)

लेकिन बचा हुआ पांच प्रतिशत भी छोटा नहीं। थानाभवन जैसी कुछ मिलों पर बकाया करोड़ों में है, और इन्हीं मिलों के किसानों को सबसे ज्यादा इंतजार करना पड़ता है।

पैसा मांगने की पूरी प्रक्रिया

शिकायत में 14 दिन के नियम और 15 प्रतिशत ब्याज के प्रावधान का जिक्र जरूर करें। अधिकारियों को यह बताना जरूरी है कि आपको अपना हक पता है।

1. तौल रसीद और पर्ची संभालकर रखें। मिल ने गन्ना किस तारीख को तौला, इसी से 14 दिन की गिनती शुरू होती है। यही आपका सबसे मजबूत सबूत है।

2. जिला गन्ना अधिकारी के पास लिखित शिकायत दें। तौल रसीद की कॉपी के साथ डीसीओ कार्यालय में आवेदन दें।

3. टोल-फ्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। किसान कॉल सेंटर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 चौबीसों घंटे चलता है। एसएमएस शॉर्टकोड 51969 भी है।

4. enquiry.caneup.in पर ऑनलाइन ग्रीवेंस दर्ज करें। टोकन नंबर से उसका स्टेटस ट्रैक करें। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर भी शिकायत की जा सकती है।

शिकायत से पहले ई-गन्ना ऐप या पोर्टल पर भुगतान की स्थिति चेक करें, यह जानना जरूरी है कि कौन-सी पर्ची का पैसा आया और कौन-सी अटकी है।

पेराई सत्र शुरू होने में अब गिनती के दिन बचे हैं। रिकॉर्ड साफ रहेगा, तो बकाया मांगने में हिचक भी नहीं होगी।

मुख्य बातें

  • शामली के डीएम ने थानाभवन मिल को 81.37 करोड़ रुपये का बकाया तुरंत चुकाने के निर्देश दिए और 15 अक्टूबर तक नया पेराई सत्र शुरू करने को कहा।
  • गन्ना तौल के 14 दिन के भीतर भुगतान न होने पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का कानूनी हक बनता है।
  • शिकायत जिला गन्ना अधिकारी, टोल-फ्री 1800-121-3203, एसएमएस 51969, enquiry.caneup.in ग्रीवेंस या मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर दर्ज की जा सकती है।

स्रोत: दैनिक जागरण, नई दिल्ली ब्यूरो; किसान तक (टीवी9), 18 सितंबर 2026; हिंदी इंडियाटाइम्स; किसान इंडिया; लाइव हिंदुस्तान, 28 सितंबर 2026

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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