गन्ने का भाव ₹600 होगा? पेराई से पहले दो जिलों में उठी एक ही मांग

पेराई सत्र 2026-27 की उल्टी गिनती शुरू होते ही गन्ने के भाव को लेकर किसान संगठनों का दबाव तेज हो गया है। गुरुवार, 1 अक्टूबर को एक ही दिन दो जिलों में भारतीय किसान यूनियन टिकैत की बैठकों में एक ही मांग गूंजी। गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल किया जाए।
बुलंदशहर के औरंगाबाद में हुई पंचायत में संगठन के प्रदेश मुख्य महासचिव गुड्डू प्रधान ने साफ कहा कि जब तक भाव ₹600 नहीं होता और 20 अक्टूबर तक गन्ना सत्र शुरू नहीं होता, तब तक किसान चुप नहीं बैठेंगे। किसानों ने आठ सूत्रीय ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन होगा।
औरंगाबाद पंचायत में क्या हुआ
रिपोर्ट के अनुसार पंचायत में किसानों ने थाने तक पदयात्रा निकालने की सूचना दी थी। इसके बाद एसडीएम सदर अंगद यादव कई थानों की फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने एक सप्ताह के भीतर डीएम से वार्ता कराने का आश्वासन दिया, तब जाकर किसान शांत हुए।
पंचायत में जेवर एयरपोर्ट तक प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे के मुआवजे का मुद्दा भी उठा। लेकिन सबसे जोरदार मांग गन्ने के भाव को लेकर रही। किसानों का कहना था कि पेराई सत्र दरवाजे पर है और भाव अभी तक घोषित नहीं हुआ है। यही बात उन्हें सबसे ज्यादा खल रही है।
कांठ में एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
उसी दिन मुरादाबाद के कांठ में भाकियू टिकैत के कार्यकर्ताओं ने उपजिलाधिकारी स्निग्धा चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष चौधरी ऋषिपाल सिंह की मौजूदगी और तहसील अध्यक्ष चौधरी दर्शन सिंह के नेतृत्व में सौंपे गए इस ज्ञापन में एक ही पंक्ति सबसे अहम थी। पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने से पहले गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल घोषित किया जाए।
ज्ञापन में सिर्फ भाव की मांग नहीं थी। पुराने गन्ना भुगतान पर ब्याज दिलाने, गन्ना क्रय केंद्रों पर 18 और 27 क्विंटल की दो वैकल्पिक तौल श्रेणियां लागू करने और मिलों द्वारा प्लेटफार्म बढ़ाने के पुराने वादे पूरे कराने की मांग भी शामिल थी। खबर के मुताबिक ज्ञापन में तेंदुआ हमलों, सड़क और अतिक्रमण जैसे स्थानीय मुद्दे भी उठाए गए।
सिर्फ दो जिलों की बात नहीं
यह ₹600 की मांग अचानक नहीं उठी है। 25 सितंबर को संभल के जुनावई में हुई भाकियू टिकैत की पंचायत में जिला प्रवक्ता पुरेंद्र सिंह यादव ने सरकार से गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति कुंतल तय करने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि अगले माह से पेराई सत्र शुरू होगा, लेकिन मूल्य अभी तक घोषित नहीं हुआ है।
इससे कुछ दिन पहले बुलंदशहर में ही भाकियू टिकैत ने ट्रैक्टर मार्च निकालकर कलेक्ट्रेट पर धरना दिया था। उस धरने में भी गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग सबसे आगे रखी गई थी। संगठन के युवा प्रदेश अध्यक्ष मंटू चौधरी ने कहा था कि जब तक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।
हापुड़ में हुई गन्ना समिति की बैठक में ₹500 प्रति क्विंटल की मांग उठी थी। यानी कहीं किसान ₹500 पर अड़े हैं, तो कहीं ₹600 की बात हो रही है। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने हाल में कहा कि मूल्य ₹600 किया जाए, कम से कम ₹500 करना तो जरूरी है। उनका तर्क है कि डीएपी के दाम डेढ़ गुना हो गए, यूरिया, डीजल और बीज महंगे हुए, बिजली की दरें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में मौजूदा भाव से लागत भी नहीं निकलती।
भाव का गणित: FRP तय, SAP का इंतजार
केंद्र सरकार ने 2026-27 गन्ना सत्र के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। यह भाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू हो गया है। पिछले सत्र की तुलना में इसमें 2.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। सरकार के मुताबिक गन्ने की उत्पादन लागत ₹182 प्रति क्विंटल आंकी गई है।
लेकिन उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलने वाला असली भाव राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) से तय होता है। 2025-26 सत्र के लिए सरकार ने अगेती गन्ने का SAP ₹400 और सामान्य गन्ने का ₹390 प्रति क्विंटल रखा था। 2026-27 सत्र का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है। किसान इसी घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।
इस बीच पेराई की तैयारियां भी चल रही हैं। शामली के डीएम ने जिले की तीनों चीनी मिलों को 15 अक्टूबर 2026 तक नए पेराई सत्र का संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। किसान चाहते हैं कि पेराई शुरू होने से पहले भाव तय हो जाए। किसी को यह डर है कि गन्ना मिल में चला जाएगा और भाव बाद में तय होगा।
किसान के लिए इसका मतलब
जिस किसान का सट्टा है, उसके लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस बार पर्ची किस भाव पर कटेगी। अगर SAP ₹400 पर ही टिका रहा तो गन्ना मिल में डालने के बाद भाव बढ़ने का फायदा नहीं मिलेगा। पुराना बकाया भी कई जगह अटका है। कांठ के ज्ञापन में पुराने भुगतान पर ब्याज की मांग इसी दर्द से निकली है।
दूसरी तरफ मिलों का कहना होता है कि चीनी के दाम और रिकवरी के हिसाब से ही भुगतान संभव है। यही खींचतान हर सत्र की शुरुआत में दिखती है। इस बार फर्क यह है कि मांग एक साथ कई जिलों से उठ रही है और आंदोलन की चेतावनी के साथ आ रही है। अब सबकी नजर सरकार की SAP घोषणा पर टिकी है।
मुख्य बातें
- 1 अक्टूबर को बुलंदशहर के औरंगाबाद और मुरादाबाद के कांठ में भाकियू टिकैत की पंचायतों में गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग उठी।
- औरंगाबाद में 20 अक्टूबर तक गन्ना सत्र शुरू करने की मांग भी रखी गई; एसडीएम ने एक सप्ताह में डीएम से वार्ता का आश्वासन दिया।
- 2026-27 सत्र का FRP ₹365 (1 अक्टूबर से लागू) तय है, लेकिन UP का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है।
स्रोत: पीड़ित मानव (1 अक्टूबर 2026), वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ (1 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (25 सितंबर 2026), नवभारत टाइम्स, चिनीमंडी।
