गन्ना भाव ₹500 की मांग तेज: महापंचायत के बाद सरकार पर दबाव, पेराई 15 अक्टूबर से

“इस बार गन्ने का भाव कब घोषित होगा?” पश्चिमी यूपी के किसान की ये चिंता अकेली नहीं है। 15 अक्टूबर के बाद मुजफ्फरनगर की चीनी मिलों में नया पेराई सत्र शुरू होगा, लेकिन 2026-27 सत्र का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) अभी तक घोषित नहीं हुआ। ऐसे में 17 सितंबर की रात जीआईसी ग्राउंड पर हुई किसान महापंचायत ने इस सवाल को और तेज कर दिया है।
भाकियू की इस महापंचायत में राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी, और मांग न मानने पर आंदोलन की चेतावनी दी। खास बात यह रही कि मुजफ्फरनगर में किसान महापंचायत पहली बार रात के समय आयोजित की गई थी।
जीआईसी ग्राउंड की वो रात: क्या-क्या हुआ
17 सितंबर की रात जीआईसी ग्राउंड में बड़ी संख्या में किसान और भाकियू कार्यकर्ता जुटे, जिसे राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत और राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने संबोधित किया। मंच से राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार अगर किसानों की मांगें पूरी नहीं करतीं, तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
उन्होंने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी की मांग प्रमुखता से उठाई, साथ ही जमीन के सर्कल रेट बढ़ाने और कृषि भूमि की सुरक्षा की मांग भी रखी।
महापंचायत के दौरान जिला स्तर के अधिकारियों के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार को 16 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों के सामने संघर्ष के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
16 मांगों में किसान के काम की पांच बातें
ज्ञापन की 16 मांगों में से किसान के लिए सबसे अहम पांच ये हैं:
पहली और सबसे बड़ी मांग गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की है, साथ ही चीनी मिलों से बकाया भुगतान तुरंत दिलाने की। भुगतान अटकने की शिकायत हर सत्र में उठती है, और यही मुद्दा किसानों को सबसे ज्यादा परेशान करता है।
दूसरी मांग कृषि नलकूपों को निर्बाध बिजली आपूर्ति की है, क्योंकि वोल्टेज की समस्या, ट्रिपिंग और अनियंत्रित कटौती से सिंचाई बाधित होती है और फसल की सेहत पर सीधा असर पड़ता है।
तीसरी मांग डीएपी और यूरिया की पर्याप्त आपूर्ति और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई की है। रबी की बुवाई नजदीक है, और इस समय खाद की उपलब्धता किसानों की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है।
चौथी मांग आपदा मुआवजे को लेकर है: बाढ़, सूखा और ओलावृष्टि के नुकसान का तत्काल पारदर्शी मुआवजा, और फसल बीमा को सरल बनाने की बात।
पांचवीं मांग सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी है: नहरों की सफाई, टेल तक पानी की पहुंच और बंद नलकूपों को चालू करना। मंडी में पारदर्शी तौल और समयबद्ध भुगतान की मांग भी किसानों की पुरानी लड़ाई का हिस्सा है।
₹500 बनाम ₹400: जेब पर कितना फर्क पड़ेगा
पेराई सत्र 2025-26 में सरकार ने गन्ना मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद अगेती प्रजातियों के लिए 400 रुपये और सामान्य प्रजातियों के लिए 390 रुपये प्रति क्विंटल की दर तय हुई थी।
अब भाकियू की मांग 500 रुपये प्रति क्विंटल की है, यानी मौजूदा अगेती दर से पूरे 100 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर। किसान के लिए ये 100 रुपये कोई छोटी रकम नहीं। गन्ने की लागत सालभर चलती है: बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई। भाव तय होते ही पर्ची और कैलेंडर का पूरा हिसाब बनता है, इसलिए हर किसान जानता है कि 100 रुपये का फर्क साल की कमाई की दिशा तय कर देता है।
समय क्यों अहम: पेराई से पहले भाव घोषित हो
दैनिक जागरण की 20 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक मुजफ्फरनगर में नया पेराई सत्र 15 अक्टूबर के बाद शुरू होगा, जो पिछले साल से करीब 15 दिन पहले है। प्रशासन ने जिले की सभी आठ मिलों में अक्टूबर के पहले हफ्ते तक तैयारी पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
जिले के करीब सवा दो लाख किसानों को प्राथमिक गन्ना आपूर्ति कैलेंडर बांटे जा चुके हैं। किसान 30 सितंबर तक अपनी समितियों पर लगे मेलों में इंडेंट और बेसिक कोटा से जुड़ी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं, जिसके बाद पक्के कैलेंडर बांट दिए जाएंगे। यानी पर्ची का पूरा ढांचा लगभग तैयार है, बस भाव का ऐलान बाकी है।
हर साल नया SAP पेराई सत्र से पहले घोषित होता है, और इस बार भी किसान इसी का इंतजार कर रहे हैं।
अब आगे क्या
भाकियू ने साफ कहा है कि मांगें न मानी गईं तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। सरकार की ओर से महापंचायत की मांगों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि राज्य सरकार नया SAP कब और कितना घोषित करती है।
तब तक सबसे जरूरी काम कागजात दुरुस्त रखना है। 30 सितंबर से पहले समिति पर जाकर बेसिक कोटा और इंडेंट जांच लें, पर्ची-कैलेंडर की शिकायत मेलों में दर्ज कराएं, और eGanna ऐप पर सट्टा-पर्ची की स्थिति देखते रहें ताकि पेराई शुरू होते ही आपूर्ति न अटके।
मुख्य बातें
- मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउंड में 17 सितंबर की रात भाकियू की महापंचायत हुई, जिसमें गन्ने का भाव ₹500 प्रति क्विंटल करने की मांग उठी।
- 16 सूत्रीय ज्ञापन में मिलों से बकाया भुगतान, नलकूपों को बिजली, डीएपी-यूरिया की आपूर्ति और आपदा मुआवजे की मांगें भी शामिल हैं।
- मुजफ्फरनगर में 15 अक्टूबर के बाद पेराई शुरू होगी, पर नया SAP अभी घोषित नहीं हुआ; पर्ची का ढांचा तैयार, बस भाव का ऐलान बाकी है।
स्रोत: पंजाब केसरी (18 सितंबर 2026), एबीपी लाइव (18 सितंबर 2026), दैनिक जागरण (20 सितंबर 2026)
