मिलें 20 अक्टूबर से चालू, भाव की घोषणा नहीं — किसान बोले: 25 को गन्ना जलाएंगे

ट्रॉली खेत में खड़ी है, मिल का बॉयलर गरम हो रहा है और बीच में एक अजीब सी खामोशी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चीनी मिलें 20 अक्टूबर के आसपास चलने की तैयारी में जुटी हैं, लेकिन इस सत्र के गन्ने का भाव अभी तक घोषित ही नहीं हुआ। किसान पूछ रहा है कि जिस गन्ने की तौल दो हफ्ते बाद होने वाली है, उसका दाम तय कब होगा।
यह सवाल अब प्रदर्शन की शक्ल ले रहा है। अमरोहा में किसानों ने साफ कह दिया है कि 20 अक्टूबर तक भाव की घोषणा नहीं हुई तो 25 अक्टूबर को वे गन्ना जलाकर विरोध करेंगे। यानी अब यह बहस सिर्फ मांगपत्रों तक सीमित नहीं रही, इसमें तारीखें जुड़ गई हैं।
20 अक्टूबर की डेडलाइन: अमरोहा से आई चेतावनी
अमरोहा में नेशनल हाईवे पर अतरासी पुल के नीचे भारतीय किसान यूनियन (चौधरी करतार सिंह गुट) की महापंचायत हुई, जिसमें संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी महावीर सिंह ने कहा कि 2026-27 पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव ₹600 प्रति क्विंटल तय किया जाए, वह भी मिलें चलने से पहले। उनकी चेतावनी सीधी थी: अगर 20 अक्टूबर तक भाव घोषित नहीं हुआ तो 25 अक्टूबर को किसान गन्ना जलाकर विरोध दर्ज कराएंगे।
अक्टूबर के तीन अहम दिन: 12, 23 और 25
अक्टूबर का महीना गन्ना राजनीति के लिहाज से असाधारण रूप से व्यस्त रहने वाला है। तीन तारीखें खास तौर पर नोट कर लीजिए।
12 अक्टूबर: केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने कर्नाटक के आंदोलनरत गन्ना किसानों को दिल्ली में बातचीत के लिए बुलाया है। यह मामला कर्नाटक का है, लेकिन इसका असर यूपी पर भी पड़ेगा क्योंकि केंद्र-राज्य के भाव तय करने के पूरे ढांचे पर इसी महीने चर्चा हो रही है।
23 अक्टूबर: भारतीय किसान यूनियन ने लखनऊ में गन्ना मुद्दों पर एक विशेष कार्यक्रम की घोषणा की है। यह फैसला मुजफ्फरनगर के राजकीय इंटर कॉलेज मैदान में हुई रात महापंचायत में लिया गया, जहां नेताओं ने गन्ने का भाव ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल करने की मांग रखी।
25 अक्टूबर: अमरोहा की चेतावनी वाला दिन। अगर भाव घोषित हो गया तो यह तारीख बेमानी हो जाएगी, वरना पश्चिमी यूपी में विरोध की नई लहर उठ सकती है।
₹400 का पुराना भाव, ₹600 की नई मांग
अब भाव की गणित समझ लीजिए, क्योंकि इसमें उलझन सबसे ज्यादा है।
पहली बात: 2026-27 सत्र का यूपी एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है। जो ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) का भाव आप सुन रहे हैं, वह 2025-26 सत्र का है। जब तक नया एसएपी घोषित नहीं होता, किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें।
दूसरी बात: केंद्र ने 2026-27 के लिए एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय कर दी है (10.25 प्रतिशत रिकवरी पर)। यह पिछले सत्र से 2.81 प्रतिशत ज्यादा है और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग के ₹182 प्रति क्विंटल के उत्पादन लागत अनुमान से दोगुने से भी ऊपर है। एफआरपी वह न्यूनतम भाव है जो मिलों को देना ही होता है, लेकिन यूपी जैसे राज्यों में एसएपी इससे ऊपर तय होता है।
तीसरी बात: किसानों की मांगें अब ₹600 तक पहुंच गई हैं। मुजफ्फरनगर महापंचायत में ₹500 से ₹600 की बात हुई, अमरोहा में ₹600 की मांग रखी गई, और हापुड़ में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन करके ₹600 प्रति क्विंटल भाव के साथ बकाया भुगतान समय पर करने की मांग उठाई।
मांग के पीछे तर्क सीधा है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज, कीटनाशक, डीजल और मजदूरी सब महंगा हुआ है, लेकिन गन्ने का दाम उस रफ्तार से नहीं बढ़ा।
बिना भाव के पेराई: किसान की जेब पर क्या असर
इस बार पेराई सत्र पिछले साल से करीब 10 दिन पहले शुरू होने की उम्मीद है। सहारनपुर के उप गन्ना आयुक्त ओपी सिंह के मुताबिक प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं, जिनमें कम से कम 71 पश्चिमी यूपी में हैं। मिलों ने मरम्मत का काम तेज कर दिया है और बॉयलर पूजा व स्टीम ट्रायल अक्टूबर के पहले हफ्ते तक पूरे होने की उम्मीद है।
इस बीच गन्ने का रकबा भी 47,000 हेक्टेयर घटकर 28.4 लाख हेक्टेयर रह गया है। किसानों का कहना है कि बढ़ती लागत और देर से भुगतान इसकी वजह हैं।
पेराई से पहले दो काम तुरंत कर लें: गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड (रकबा और किस्म) जांच लें, और बैंक खाता सक्रिय रखकर उसे पहचान दस्तावेजों से लिंक कराएं ताकि भुगतान में देरी न हो। भाव की घोषणा कब होगी, यह लखनऊ के फैसले पर टिका है, लेकिन 20 अक्टूबर की डेडलाइन अब कैलेंडर पर लिखी जा चुकी है।
मुख्य बातें
- पश्चिमी यूपी की मिलें 20 अक्टूबर के आसपास चल सकती हैं, लेकिन 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ है (₹400 का भाव 2025-26 सत्र का है)।
- अमरोहा के किसानों की चेतावनी: 20 अक्टूबर तक भाव नहीं तो 25 अक्टूबर को गन्ना जलाकर विरोध; BKU का लखनऊ कार्यक्रम 23 अक्टूबर को।
- केंद्र ने 2026-27 का एफआरपी ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है; किसान संगठन ₹500 से ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं।
स्रोत: टाइम्स ऑफ इंडिया (मेरठ/आगरा संस्करण), हिंदुस्तान (चाइनीमंडी के हवाले), दैनिक भास्कर (चाइनीमंडी के हवाले), दक्कन हेराल्ड, बिजनेस स्टैंडर्ड
