गन्ना बीज उपचार: 10 मिनट की तैयारी से रेड रॉट जैसी बीमारियों से बचेगी फसल

पिछले साल अक्टूबर में लखीमपुर के एक किसान ने छह एकड़ में गन्ना बोया। बीज खेत से सीधा काटकर कतार में डाल दिया, बिना किसी उपचार के। दिसंबर में अंकुरण अच्छा दिखा, लेकिन फरवरी आते-आते खेत में जगह-जगह खाली पट्टियां नजर आने लगीं। जांच हुई तो पता चला कि बीज के साथ ही रेड रॉट खेत में आ गया था। जिस खर्च से एक बार बीज का उपचार हो जाता, उसी से तीन गुना खर्च बाद में दवाइयों में चला गया।
यह कहानी लखीमपुर तक सीमित नहीं है। गन्ने के कई रोग, खासकर रेड रॉट, स्मट और विल्ट, बीज के जरिए ही खेत में फैलते हैं। कुशीनगर में कुछ हफ्ते पहले कृषि विशेषज्ञों ने खेतों का दौरा किया तो पाया कि को.0238 प्रजाति में रेड रॉट का प्रकोप है और विल्ट के शुरुआती लक्षण वाले खेतों से बीज न लेने की सलाह दी गई। विशेषज्ञों की एक ही सीधी बात थी, बुवाई से पहले बीज का उपचार जरूरी है। बुवाई से पहले दस-पंद्रह मिनट की यह तैयारी फसल की नींव तय करती है।
सही बीज का चुनाव: उपचार से पहले का काम
उपचार तभी काम करेगा जब बीज ही ठीक हो। बुवाई के लिए आठ से दस महीने की स्वस्थ फसल से बीज चुनें। जिस गन्ने पर फूल आ गए हों, आंख अंकुरित हो गई हो या जड़ें निकल आई हों, उसे बीज के लिए इस्तेमाल न करें। काटते समय तेज धार वाला औजार इस्तेमाल करें और ध्यान रखें कि आंख के ऊपर वाला हिस्सा एक तिहाई और नीचे वाला दो तिहाई रहे।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीज केवल रोगमुक्त और स्वस्थ नर्सरी प्लॉट से लें। कुशीनगर दौरे के दौरान विशेषज्ञों ने रोगरोधी उन्नत प्रजातियों जैसे को.0118, को.लख.14201, को.16202, को.शा.18231, को.लख.94184 और को.शा.13235 को प्राथमिकता देने की सलाह दी। साथ ही यह भी कहा कि रोग के लक्षण वाले खेत से बीज कभी न लें, बीज की सेहत ही फसल की सेहत है।
रसायनिक उपचार: सबसे भरोसेमंद तरीका
बीज उपचार के दो रसायनिक तरीके खेतों में आम हैं। पहला तरीका प्रति एकड़ के हिसाब से है। इसमें 100 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम (बाविस्टिन), 300 मिलीलीटर क्लोरोपायरीफॉस, 2 किलो यूरिया और 1 किलो चूना मिलाकर घोल बनाएं। गन्ने के टुकड़ों को इस घोल में 10 मिनट तक डुबोकर रखें। यह घोल बीज पर लगे फफूंद और कीट के अंडों, दोनों पर काम करता है।
दूसरा तरीका छोटी मात्रा में है। 10 लीटर पानी में थिरम 3 ग्राम या कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर की दर से मिलाएं। इसके साथ क्लोरोपायरीफॉस 5 मिलीलीटर या इमिडाक्लोप्रिड 5 मिलीलीटर (गाउचो) या फिप्रोनिल 5 मिलीलीटर डालें। इस घोल में बीज के टुकड़ों को 15 से 20 मिनट तक डुबोकर रखें, फिर बुवाई करें। दो में से कोई एक तरीका अपनाएं, दोनों एक साथ करने की जरूरत नहीं है।
जैविक उपचार: रसायन के बाद वाला कदम
रसायनिक उपचार के बाद टुकड़ों को थोड़ी देर सुखा लें, फिर जैविक उपचार करें। प्रति एकड़ के हिसाब से 100 लीटर पानी में 1 लीटर एजोटोबैक्टर और 1 लीटर पीएसबी मिलाएं। सूखे हुए बीज के टुकड़ों को इस घोल में 30 मिनट तक डुबोकर रखने के बाद बुवाई करें।
इस क्रम का ध्यान रखना जरूरी है, पहले रसायनिक उपचार, फिर जैविक। दोनों को एक ही घोल में मिलाकर करने की गलती न करें। रसायनिक दवा जैविक जीवाणुओं को भी मार देगी। विशेषज्ञ बुवाई से पहले भूमि शोधन के लिए ट्राइकोडर्मा के प्रयोग की भी सलाह देते हैं, ताकि मिट्टी में मौजूद रोग भी दब जाएं।
बुवाई के समय दो छोटी सावधानियां
उपचारित बीज की बुवाई करते समय गन्ने के टुकड़ों को कतार में इस तरह रखें कि आंखें बगल की तरफ हों, ऊपर या नीचे की तरफ न हों। इसके बाद 2 से 3 इंच मिट्टी से टुकड़ों को दबा दें। इससे अंकुरण एकसमान होता है और टिलरिंग भी अच्छी आती है।
दूसरी सावधानी घोल की ताजगी को लेकर है। घोल उसी दिन बनाएं और उसी दिन इस्तेमाल करें। बचा हुआ घोल दूसरे दिन दोबारा इस्तेमाल करने में दवा की असर क्षमता घट जाती है। इतनी छोटी सी सावधानी से भी उपचार का असर कई गुना बढ़ जाता है।
कुल मिलाकर बीज उपचार में खर्च न के बराबर है, एक एकड़ पर दवा का खर्च कुछ सौ रुपये से ज्यादा नहीं बैठता। लेकिन बिना उपचार के रेड रॉट या स्मट लग जाए तो नुकसान कई हजार का हो जाता है। बुवाई से पहले दस-पंद्रह मिनट निकालकर यह काम कर लें, बाकी सीजन का मन शांत रहेगा।
मुख्य बातें
- बीज केवल 8-10 महीने की स्वस्थ, रोगमुक्त फसल से लें; फूल वाली या अंकुरित आंख वाली गन्ना बीज में न इस्तेमाल करें।
- रसायनिक उपचार में कार्बेन्डाजिम 100 ग्राम + क्लोरोपायरीफॉस 300 मिली प्रति 100 लीटर पानी में 10 मिनट डुबोएं, या थिरम/कार्बेन्डाजिम के छोटे घोल में 15-20 मिनट रखें।
- रसायनिक उपचार के बाद टुकड़े सुखाकर एजोटोबैक्टर + पीएसबी के जैविक घोल में 30 मिनट डुबोएं; भूमि शोधन में ट्राइकोडर्मा भी लगाएं।
स्रोत: कृषिजागरण (हिंदी), न्यूज़ट्रैक (कुशीनगर कृषि विशेषज्ञों की सलाह, सितंबर 2026)
