बुवाई से पहले बीज का ये 5-स्टेप उपचार, जमाव में दिखेगा फर्क

अक्टूबर का महीना है और पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में शरदकालीन गन्ने की बुवाई शुरू हो चुकी है। बुवाई के दिन खेत में खड़े हर किसान की सबसे बड़ी चिंता एक ही होती है: जमाव कैसा आएगा? अगर पोरियों का जमाव कमजोर रहा, तो खेत में खाली जगहें रह जाएंगी, और पूरे सीजन की मेहनत आधी रह जाएगी।
खराब जमाव की सबसे आम वजह बीज में छिपी बीमारियां हैं। लखनऊ स्थित भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) के शोध के मुताबिक महज 2 प्रतिशत संक्रमित बीज पोरियां भी लाल सड़न जैसी बीमारी की महामारी फैलाने के लिए काफी हैं। अच्छी खबर यह है कि बुवाई से पहले बीज का सही उपचार इन बीमारियों को खेत तक पहुंचने से रोक देता है। नीचे पांच स्टेप में पूरी विधि दी गई है।
1. बीज गन्ना सही चुनें
बीज वही गन्ना लें जो रोगमुक्त हो और उम्र में 8-10 महीने का हो। गन्ने के ऊपरी एक तिहाई हिस्से का जमाव नीचे के हिस्से की तुलना में बेहतर होता है, इसलिए बीज के लिए ऊपरी हिस्सा प्राथमिकता से काटें। कलियां मोटी, हरी और स्वस्थ दिखनी चाहिए। सूखी, काली या चोटिल कलियों वाले गन्ने को बीज के लिए बिल्कुल न लें। अगर चीनी मिल की नर्सरी या प्रमाणित बीज फार्म से बीज मिल रहा है, तो वही सबसे सुरक्षित विकल्प है।
2. पोरियों को सही तरीके से काटें
गन्ने को दो या तीन आंख वाली पोरियों में काटें। काटने के लिए धारदार औजार इस्तेमाल करें, ताकि कलियां कुचले नहीं। दबे-कुचले हुए सेट्स में फफूंद जल्दी लगती है और जमाव गिर जाता है। प्रति हेक्टेयर करीब 35-40 हजार तीन आंख वाली या 50-60 हजार दो आंख वाली पोरियों की जरूरत पड़ती है। एक एकड़ के हिसाब से यह लगभग 35-45 क्विंटल बीज गन्ना बैठता है। काटने के बाद पोरियों को धूप में न सुखाएं, छांव में रखें।
3. रासायनिक घोल में डुबोकर उपचार करें
यह सबसे आसान और असरदार तरीका है। 100 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम घोलें और पोरियों को इस घोल में 5 मिनट तक डुबोकर निकाल लें। इतना घोल करीब 35 क्विंटल बीज गन्ने के उपचार के लिए पर्याप्त है।
उत्तर प्रदेश के लिए सुझाई गई एक और विधि में 1000 लीटर पानी में 500 ग्राम कार्बेन्डाजिम, 2000 मिलीलीटर मैलाथियान और 5-7 किलो यूरिया मिलाकर पोरियों को कम से कम 15 मिनट तक भिगोया जाता है। मैलाथियान दीमक और अन्य कीटों से बचाव देता है, जबकि यूरिया कलियों को फूटने में मदद करता है। उपचार के बाद पोरियों को छांव में हल्का सुखाकर उसी दिन बुवाई कर दें।
4. गर्म पानी या भाप से उपचार (नर्सरी बीज के लिए)
अगर आप अगले साल का बीज तैयार करने के लिए नर्सरी लगा रहे हैं, तो गर्म उपचार सबसे भरोसेमंद है। IISR लखनऊ ने नमी युक्त गर्म वायु उपचार (मॉइस्ट हॉट एयर ट्रीटमेंट) विकसित किया है, जिसमें बीज गन्ने को 54 डिग्री सेल्सियस तापमान और 95-99 प्रतिशत आर्द्रता पर ढाई घंटे रखा जाता है। इससे बीज में छिपे रोगजनक खत्म हो जाते हैं।
नर्सरी वाले बीज के लिए 54 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी में एक घंटे का उपचार भी सुझाया गया है। ग्रासी शूट बीमारी के प्राथमिक संक्रमण को रोकने के लिए 50 डिग्री सेल्सियस की वातित भाप में एक घंटे का उपचार असरदार पाया गया है। तापमान इससे ज्यादा न बढ़ाएं, वरना कलियां मर सकती हैं।
5. उपचार के बाद की सावधानियां
उपचार की गई पोरियों को 24 घंटे के भीतर बो देना सबसे अच्छा है। बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी होनी चाहिए, सूखे खेत में उपचार का पूरा फायदा नहीं मिलता। शरदकालीन बुवाई का सही समय सितंबर के दूसरे पखवाड़े से अक्टूबर के पहले पखवाड़े तक है, इसलिए देर न करें। उपचार के बाद बची पोरियों को कभी दोबारा घोल में न डुबोएं, और घोल बनाने में दस्ताने जरूर पहनें।
मुख्य बातें
- महज 2% संक्रमित बीज पोरियां भी लाल सड़न की महामारी फैला सकती हैं, इसलिए उपचार जरूरी है
- 100 लीटर पानी में 100 ग्राम कार्बेन्डाजिम का घोल पोरियों को 5 मिनट डुबोकर उपचार करें, या 1000 लीटर वाले मिश्रण से 15 मिनट का उपचार करें
- नर्सरी बीज के लिए 54 डिग्री पर गर्म पानी या भाप का उपचार सबसे भरोसेमंद है; उपचार के बाद 24 घंटे के भीतर बुवाई करें
स्रोत: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR) लखनऊ, विजन 2050 प्रकाशन; कृषि जागरण, उत्तर प्रदेश में शरदकालीन गन्ने की वैज्ञानिक खेती।
