शरद बुआई में कौन सी किस्म? नई CoS 23232 देगी 9.44% ज्यादा उपज

अक्टूबर की धूप में जब खेत हल चलकर तैयार हो जाता है, तो हर गन्ना किसान के सामने एक ही सवाल खड़ा होता है। पुरानी को.0238 लगाएं या कुछ नया आजमाएं। पिछले कुछ सालों में कई जिलों के किसानों ने अपनी आंखों से देखा है कि खड़ी फसल में लाल सड़न का धब्बा फैला और पूरा प्लॉट बर्बाद हो गया। ऐसे में किस्म चुनना सिर्फ बीज खरीदने का काम नहीं रह जाता, पूरे साल की कमाई का फैसला बन जाता है। शरद बुआई के इस मौसम में नई किस्मों की पूरी जानकारी समझ लीजिए।
को.0238 की मुसीबत: लाल सड़न
को.0238 दस साल से ज्यादा समय से यूपी के खेतों पर छाई हुई थी। मीठा रस, मोटी पोरियां और अच्छी उपज। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसमें लाल सड़न (रेड रॉट) का प्रकोप बढ़ता गया। गोंडा समेत कई जिलों में किसानों की फसल इसी बीमारी से प्रभावित हुई। कृषि विभाग ने भी माना कि को.0238 वाले खेतों में अब रोग का दबाव ज्यादा है। यही वजह है कि किसान लगातार एक नई, रोग-प्रतिरोधी किस्म की मांग कर रहे थे।
29 सितंबर को मिलीं 4 नई किस्में
गन्ना आयुक्त की अध्यक्षता में 29 सितंबर को हुई उत्तर प्रदेश बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की बैठक में चार नई किस्मों को खेती के लिए अनुमोदित किया गया। इनमें उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की तीन किस्में को.शा.23232, को.शा.19235 और को.शा.18232 तथा भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की को.लख.21201 शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने बैठक में इन किस्मों की उपज, पोल प्रतिशत और रोग-प्रतिरोधक क्षमता के आंकड़े पेश किए।
को.शा.23232: सबसे चर्चित विकल्प
शाहजहांपुर की अगेती किस्म को.शा.23232 को दस साल के परीक्षणों के बाद तैयार किया गया है। शोध परिषद के आंकड़ों के मुताबिक इसकी पहली फसल की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई, जो मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। चीनी की रिकवरी में भी यह आगे है। नवंबर, जनवरी और मार्च में इसमें पोल प्रतिशत क्रमशः 13.10, 13.77 और 14.31 पाया गया, जो को.0238 से बेहतर है। पेड़ी की उपज 80.57 टन प्रति हेक्टेयर रही, जो को.0238 के मुकाबले 3.16 प्रतिशत अधिक है।
इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लाल सड़न रोग के प्रति रोगरोधी है। इसे मादा जनक को.शा.8119 और नर जनक को.775 से तैयार किया गया है। शोध परिषद के निदेशक के अनुसार इसमें पेड़ी की अच्छी क्षमता है। 9 अक्टूबर को जब इस किस्म की ऑनलाइन बुकिंग शुरू हुई, तो महज पांच मिनट में दो लाख बड्स बुक हो गए। किसानों का यह उत्साह खुद बताता है कि खेतों में नई किस्म की मांग कितनी गहरी है।
को.लख.21201: पूरे प्रदेश के लिए मंजूर
लखनऊ के भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान की अगेती किस्म को.लख.21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो को.0238 के लगभग बराबर है। इसमें पोल प्रतिशत 13.94 पाया गया, जबकि को.0238 में यह 13.71 था। प्रेस नोट के अनुसार इस किस्म में लाल सड़न के प्रति उच्च प्रतिरोधक क्षमता है और पेड़ी की क्षमता भी अच्छी है। इसे पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अनुमोदित किया गया है, यानी आपके जिले में भी इसकी खेती की अनुमति है।
किस्म चुनते समय ध्यान रखने वाली बातें
सबसे पहले अपने क्षेत्र की चीनी मिल की प्राथमिकता जानें। मिलें किस्म-वार खरीद की योजना बनाती हैं, इसलिए जिस किस्म को आपकी समिति या मिल आसानी से उठाती है, वही लगाना समझदारी है। नई किस्म में गन्ना बेचने की दिक्कत न हो, यह पहले ही स्पष्ट कर लें।
दूसरी बात, एक ही किस्म को बार-बार न बोएं। गोंडा के कृषि अधिकारियों ने किसानों को साफ सलाह दी है कि फसल चक्र अपनाएं। एक ही किस्म लगातार लगाने से मिट्टी में रोग के कीटाणु बढ़ जाते हैं और अगली फसल कमजोर होती है। अगर पिछले साल 0238 लगाया था, तो इस बार नई किस्म आजमाना बेहतर विकल्प है।
तीसरी बात, बीज हमेशा प्रामाणिक स्रोत से लें। शोध परिषद, कृषि विभाग या मान्यता प्राप्त नर्सरी से लिया गया बीज ही बोएं। नई किस्मों की मांग ज्यादा है, इसलिए बाजार में नकली बीज भी घूम सकता है। बुकिंग की रसीद और किस्म का नाम लिखकर रखें।
चौथी बात, बुआई से पहले बीज को ट्राइकोडर्मा या फफूंदनाशक दवा से उपचारित करें। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बीज उपचार से लाल सड़न समेत कई रोगों का खतरा कम हो जाता है। यह छोटा सा खर्च पूरी फसल की बीमा पॉलिसी जैसा काम करता है।
पांचवीं बात, बुआई के समय के हिसाब से किस्म चुनें। को.शा.23232 अगेती किस्म है और वैज्ञानिकों के अनुसार इसे देर से बुआई में भी लगाया जा सकता है, जिससे देरी से बुआई करने वाले किसानों को भी फायदा मिलेगा।
मुख्य बातें
- 29 सितंबर को उप समिति ने को.शा.23232, को.शा.19235, को.शा.18232 और को.लख.21201 को मंजूरी दी।
- को.शा.23232 की उपज 95.56 टन/हेक्टेयर (को.0238 से 9.44% ज्यादा) और यह लाल सड़न के प्रति रोगरोधी है।
- नई किस्म लगाएं तो प्रामाणिक बीज लें, बीज उपचार जरूर करें और एक ही किस्म बार-बार न बोएं।
स्रोत: कृषक जगत, किसान तक, नारद संवाद, News18 हिंदी; उपज व चीनी रिकवरी के आंकड़े उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद के प्रेस नोट पर आधारित।
