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नवंबर में बीज गन्ना ऐसे संभालें, फरवरी की बुवाई में अंकुरण कम नहीं होगा

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 04 Nov 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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नवंबर में बीज गन्ना ऐसे संभालें, फरवरी की बुवाई में अंकुरण कम नहीं होगा

नवंबर की सुबह खेत से ट्रॉली भरकर मिल की ओर जा रही है और उसी खेत के एक कोने में किसान कुछ गन्ना अलग रख रहा है। मिल वाला गन्ना आज का काम है, अलग रखा गन्ना फरवरी का काम है। यही फर्क कई बार अगले साल की फसल तय कर देता है। बीज के लिए रखा गन्ना अगर नवंबर से फरवरी के बीच सूख गया, पाले में झुलस गया या अंदर से रोग पकड़ गया, तो बुवाई के समय आंखें फूटेंगी ही नहीं और खेत में जगह खाली रह जाएगी।

बीज गन्ने की असली परीक्षा बुवाई के दिन नहीं, भंडारण के तीन महीनों में होती है। गन्ने की आंख को नमी चाहिए, लेकिन पानी में डूबना नहीं चाहिए, और ठंड से बचाव चाहिए, लेकिन बंद जगह में सड़न नहीं चाहिए।

बीज के लिए कौन सा गन्ना चुनें

बीज हमेशा पौधा फसल से लीजिए, पेड़ी से नहीं, क्योंकि पेड़ी में पिछली फसल के रोग बीज के रास्ते अगली फसल में पहुंच सकते हैं। गन्ना सीधा, स्वस्थ और 8 से 10 महीने पुराना हो तो अंकुरण बेहतर रहता है। 11 से 12 महीने से ज्यादा पुराने गन्ने की आंखों की फूटने की ताकत घट जाती है।

गन्ने के ऊपरी एक तिहाई से आधे हिस्से को बीज के लिए सबसे अच्छा माना गया है, क्योंकि इस हिस्से की कलियां युवा होती हैं। नीचे का हिस्सा चीनी से भरा होता है और देर से फूटता है, इसलिए उसे मिल के लिए रखिए। लाल सड़न, सूखी या काली आंख और तने पर छेद वाला गन्ना बीज के ढेर में मत आने दीजिए।

कटाई के दिन ही बीज अलग कीजिए

बीज का गन्ना कटाई के दिन ही अलग छांट लीजिए, बाद में बचा-खुचा गन्ना ढूंढना सबसे आम गलती है। पत्तियां हाथ से साफ कीजिए, आंखों को खुरचिए मत।

नवंबर में बीज को टुकड़ों में काटकर मत रखिए। पूरे डंठल के रूप में भंडारण बेहतर रहता है, क्योंकि कटा हुआ सिरा सूखता है और वहीं से सड़न शुरू होती है। टुकड़े, यानी सेट्स, बुवाई से कुछ दिन पहले ही काटिए। तब तक गन्ना अपने डंठल में अपनी नमी संभालकर रखता है। नवंबर में ही सेट्स काट दिए तो तीन महीने में उनका रस सूखेगा और फरवरी तक आंखें कमजोर पड़ जाएंगी।

भंडारण की जगह: छाया, हवा और हल्की नमी

बीज गन्ना ऐसी जगह रखिए जहां सीधी धूप न पड़े और हवा आती-जाती रहे। पेड़ की छाया, छप्पर के नीचे या खेत के किनारे ऊंची जगह ठीक रहती है। निचली जगह मत चुनिए, जहां पानी भरकर ठहर जाए। बंडल बनाकर रखिए, लेकिन ढेर इतना ऊंचा मत कीजिए कि नीचे के गन्ने दबकर टूट जाएं।

ढेर के ऊपर गन्ने की सूखी पत्तियों, यानी ट्रैश, की मोटी परत डाल दीजिए। यह धूप और ठंडी हवा से बचाती है और नमी टिकाए रखती है। हर 7 दिन में ढेर खोलकर देखिए, सड़ रहा या फफूंद लगा गन्ना तुरंत अलग कर दीजिए, वरना वह बगल वाले गन्ने को भी खराब करेगा।

नमी के लिए समय-समय पर हल्का पानी छिड़किए, लेकिन ढेर को गीला मत कीजिए, वरना सड़न लगेगी। दिसंबर-जनवरी में पाले की रातों में ट्रैश की परत और मोटी कर दीजिए, क्योंकि जमी हुई आंख फरवरी में नहीं फूटती।

दीमक और चूहों से भी बचाव जरूरी है

तीन महीने में दीमक ढेर के नीचे से गन्ने को खोखला कर सकती है और चूहे आंखों को कुतर सकते हैं। इसलिए ढेर जमीन से सीधे सटाकर मत रखिए, नीचे सूखी पत्तियों की परत रखिए। हफ्ते की जांच में नीचे के गन्ने भी पलटकर देखिए। दीमक दिखे तो कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह लेकर ही उपाय कीजिए।

बुवाई से एक हफ्ता पहले: सेट्स काटिए और उपचार कीजिए

फरवरी में बसंतकालीन बुवाई का अच्छा समय 15 फरवरी से 15 मार्च तक माना गया है। इससे करीब एक हफ्ता पहले बीज गन्ने को सेट्स में काटिए। हर सेट 30 से 40 सेंटीमीटर लंबा और तीन आंख वाला रखिए। तीन आंख वाले सेट ज्यादा भरोसेमंद रहते हैं, क्योंकि अगर एक आंख खराब भी निकले तो बाकी से पौधा बन जाता है। धारदार औजार इस्तेमाल कीजिए, ताकि आंख के पास का हिस्सा कुचले नहीं।

काटने के बाद बीज उपचार कीजिए। सामान्य सलाह के अनुसार प्रति लीटर पानी में 2 ग्राम कार्बेंडाजिम घोलकर सेट्स को 15 से 20 मिनट तक भिगोया जाता है। मात्रा पैकेट के निर्देश से मिलाकर तय कीजिए और उपचार के बाद सेट्स को छाया में थोड़ा सुखाकर ही बोइए।

बुवाई से पहले सेट्स को 12 से 24 घंटे तक साफ पानी में भिगोकर रखना भी अंकुरण में मदद करता है। खेत की हालत में अंकुरण 7 से 10 दिन में शुरू होता है और करीब 30 से 35 दिन तक चलता है। अंकुरण के लिए सबसे अच्छा तापमान 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास माना गया है और 12 डिग्री से नीचे अंकुरण थम सा जाता है। फरवरी की ठंड में अंकुरण धीमा दिखे तो घबराकर दोबारा बुवाई मत कीजिए, पहले 30 दिन तक इंतजार कीजिए। खेत की हालत में करीब 60 प्रतिशत अंकुरण को भी संतोषजनक माना गया है।

कितना बीज चाहिए, पहले से हिसाब लगा लीजिए

बुवाई के समय बीज कम पड़ना सबसे महंगी गलती है। प्रति हेक्टेयर करीब 40 हजार तीन आंख वाले सेट्स की जरूरत पड़ती है, इसलिए यह हिसाब नवंबर में ही लगा लीजिए। आखिरी समय में बाजार से बीज खरीदना महंगा पड़ता है और किस्म की शुद्धता का भरोसा भी नहीं रहता।

मुख्य बातें

  • बीज पौधा फसल से लीजिए, 8 से 10 महीने पुराना और ऊपरी एक तिहाई हिस्सा चुनिए, पेड़ी और रोगी गन्ना बीज के लिए मत रखिए।
  • नवंबर में गन्ना पूरा डंठल रखिए, छाया में ट्रैश की परत के नीचे संभालिए, हर 7 दिन में जांचिए और ढेर को गीला किए बिना हल्की नमी बनाए रखिए।
  • बुवाई से एक हफ्ता पहले 30 से 40 सेंटीमीटर के तीन आंख वाले सेट्स काटिए, कार्बेंडाजिम से उपचार कीजिए और 15 फरवरी से 15 मार्च के बीच बोइए।

स्रोत: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ से जुड़े अंकुरण मार्गदर्शन, कृषि जागरण की गन्ना खेती सलाह और किसान तक की बसंत बुवाई संबंधी जानकारी।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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