बीज खरीदने जा रहे हैं? पहले जान लें कौन सी 8 किस्में खेती से बाहर हो रहीं

शरदकालीन बुवाई के लिए बीज गन्ना खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो एक मिनट रुककर यह सूची देख लीजिए। उत्तर प्रदेश की बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति ने 29 सितंबर को गन्ना एवं चीनी आयुक्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में आठ पुरानी किस्मों को खेती से बाहर करने का रास्ता दिखा दिया है। इनमें से छह किस्मों को ‘अनुपयुक्त’ घोषित करते हुए अगले दो वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाने का निर्णय लिया गया, जबकि दो किस्मों को अस्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू करने पर सहमति बनी।
मतलब साफ है: इन पुरानी किस्मों का प्रमाणित बीज दो साल में मिलना मुश्किल हो जाएगा, और विभागीय नर्सरियों-योजनाओं से भी इनका समर्थन सिमटेगा।
ये 8 किस्में खेती से बाहर: पूरी सूची
बैठक के फैसले के मुताबिक अलोकप्रिय, नगण्य क्षेत्रफल वाली और पुरानी छह किस्मों को अनुपयुक्त घोषित किया गया है:
- को.शा.95255
- को.शा.97264
- को.शा.96275
- को.शा.97261
- को.से.96436
- को.शा.98231
इन छह के अलावा दो और किस्मों, को.शा.96246 और को.शा.98231, को अस्वीकृत करने की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इस तरह कुल आठ पुरानी किस्में मुख्यधारा की खेती से बाहर होने जा रही हैं।
क्यों हटाई जा रही हैं ये किस्में
समिति की नजर में इन किस्मों का रकबा अब नगण्य है और किसान इन्हें लगाना लगभग छोड़ चुके हैं। पुरानी किस्मों की दिक्कत यही होती है: साल दर साल उपज घटती जाती है और बीमारियों के प्रति कमजोरी बढ़ती जाती है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण को.0238 है, जो कभी यूपी की सबसे लोकप्रिय किस्म थी और अब लाल सड़न से बुरी तरह प्रभावित है। किसान बरसों से इसके विकल्प का इंतजार कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि रोगरोधी नई किस्मों की ओर बढ़ना ही सबसे सस्ता और टिकाऊ रास्ता है। न दवा का अतिरिक्त खर्च, न खेती की विधि बदलनी पड़ती है, सिर्फ अधिकृत स्रोत से स्वस्थ बीज लेना होता है।
आपकी मौजूदा फसल पर क्या असर पड़ेगा
सबसे अहम बात: यह फैसला एक झटके में लागू नहीं होगा। दो साल की चरणबद्ध अवधि इसीलिए दी गई है ताकि किसान नई बुवाई की योजना बदल सकें। जिन खेतों में इन किस्मों की पेड़ी खड़ी है, उनके लिए घबराने की वजह नहीं है। प्रक्रिया चरणबद्ध है, इसलिए मौजूदा फसल पर इसका तत्काल असर नहीं पड़ेगा।
लेकिन नई बुवाई में इन किस्मों को लगाना अब समझदारी नहीं। अनुपयुक्त घोषित होने का सीधा मतलब है कि इन किस्मों के प्रमाणित बीज की उपलब्धता धीरे-धीरे खत्म होगी। गन्ना समितियों और विभागीय नर्सरियों में अब प्राथमिकता नई अनुमोदित किस्मों को मिलेगी।
इनकी जगह आईं 12 नई किस्में
उसी 29 सितंबर की बैठक में किसानों के लिए 12 नई किस्मों के विकल्प भी मंजूर हुए हैं। चार किस्में उत्तर प्रदेश के अपने शोध केंद्रों की हैं और आठ केंद्र सरकार से नोटिफाइड किस्में प्रदेश में खेती के लिए अंगीकृत की गई हैं।
को.शा.23232, को.शा.19235 और को.शा.18232 उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर की हैं। यह परिषद 1912 से काम कर रही है और अब तक 250 से ज्यादा किस्में विकसित कर चुकी है। चौथी नई किस्म को.लख.21201 भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, लखनऊ की है।
आंकड़ों की बात करें तो को.शा.23232 की औसत उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो मानक किस्म को.0238 से 9.44 प्रतिशत अधिक है। यह किस्म लाल सड़न के प्रति रोगरोधी बताई गई है। को.लख.21201 की औसत उपज 86.57 टन प्रति हेक्टेयर और पोल प्रतिशत 13.94 दर्ज हुआ। मध्य और देर से पकने वाली को.शा.19235 ने 87.58 टन प्रति हेक्टेयर उपज दी, जो मानक किस्म को.शा.767 से 11.81 प्रतिशत ज्यादा है। को.शा.18232 की औसत उपज 92.38 टन प्रति हेक्टेयर रही, यानी मानक किस्म से 26.51 प्रतिशत अधिक।
केंद्र से नोटिफाइड जिन आठ किस्मों को प्रदेश में अपनाया गया है, वे हैं: को.16030, को.17018, को.पी.18122, को.पी.11438, को.लख.16466, को.पी.17215, को.पी.18109 और को.पी.18213। इनमें अगेती, मध्य और देर से पकने वाली तीनों तरह की किस्में हैं, जिन्हें प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से अंगीकृत किया गया है।
बीज खरीदते समय ये 6 बातें ध्यान रखें
- अपनी किस्म का नाम सूची से मिलाएं: ऊपर दी गई आठ किस्मों में से कोई किस्म आप लगा रहे हैं तो इस बार बीज बदलने की योजना बनाएं।
- अधिकृत स्रोत से ही बीज लें: गन्ना समिति, विभागीय नर्सरी या प्रमाणित बीज उत्पादक से खरीदें। बिना स्रोत वाले बीज में रोग का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।3. किस्म का नाम पर्ची पर लिखवाएं: बीज लेते समय किस्म का नाम और लॉट की जानकारी जरूर लें। बाद में किसी विवाद में यही काम आएगी।
- रोगरोधी नई किस्मों को तरजीह दें: लाल सड़न प्रभावित इलाकों में नई रोगरोधी किस्में पुरानी किस्मों से बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।
- सट्टे में सही किस्म दर्ज कराएं: समिति में सट्टा बंधवाते समय खेत में लगी असली किस्म ही लिखवाएं। गलत किस्म दर्ज होने पर पर्ची और भुगतान में अड़चन आ सकती है।
मुख्य बातें
- 29 सितंबर की उप समिति बैठक में 8 पुरानी गन्ना किस्मों को दो साल में चरणबद्ध तरीके से खेती से बाहर करने का फैसला हुआ है।
- नई बुवाई में इन किस्मों का बीज लगाना अब समझदारी नहीं; प्रमाणित बीज और विभागीय समर्थन धीरे-धीरे सिमटेगा।
- विकल्प के तौर पर 12 नई किस्में मंजूर हुई हैं, जिनमें को.शा.23232 की उपज 95.56 टन प्रति हेक्टेयर और लाल सड़न के प्रति रोगरोधिता दर्ज है।
स्रोत: किसान तक (1 अक्टूबर 2026), कृषक जगत (2 अक्टूबर 2026), रूरल वॉइस (2 अक्टूबर 2026) — उप्र बीज गन्ना एवं गन्ना किस्म स्वीकृति उप समिति की 29 सितंबर 2026 की बैठक के प्रेस नोट के आधार पर।
