पर्ची का इंतजार या तुरंत नकद? मिल, कोल्हू, भट्टी में गन्ना बेचने का ₹380-400 वाला सच

मुजफ्फरनगर के एक किसान की ट्रॉली सुबह से तैयार खड़ी है। गन्ना कट चुका है, पर पर्ची की तारीख अभी हाथ में नहीं आई है। पास में कोल्हू चल रहा है, जहां नकद पैसा उसी दिन मिल जाएगा। गांव के किनारे गुड़ की भट्टी भी गन्ना मांग रही है। सवाल एक ही है। गन्ना कहां जाए तो नुकसान कम हो और पैसा समय पर मिले।
यह सवाल इस बार और तीखा हो गया है। अक्टूबर के आखिर की बारिश ने कटाई को कम से कम एक सप्ताह पीछे धकेल दिया है। रूरल वॉयस के अनुसार मुजफ्फरनगर के किसान संजय चौधरी ने बताया कि मिलों में पेराई शुरू न होने से कोल्हू पर भाव 380 से 400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास आ गया है, जबकि सत्र की शुरुआत में यह 430 से 450 रुपये था। नवभारत टाइम्स के अनुसार वेस्ट यूपी की ज्यादातर मिलें नवंबर के पहले सप्ताह में चालू हो रही हैं, पर 2026-27 का गन्ना मूल्य अभी घोषित नहीं हुआ है।
मिल का रास्ता: पक्का भाव, पर पर्ची का इंतजार
मिल में गन्ना देने की सबसे बड़ी ताकत उसका पक्का ढांचा है। गन्ना सट्टे में दर्ज होता है, पर्ची पर तारीख और केंद्र तय होता है, तौल का कागज मिलता है और भुगतान बैंक खाते में आता है। नियमानुसार खरीद की तारीख से 14 दिन के भीतर भुगतान होना चाहिए। देरी हो तो किसान ब्याज का भी हकदार होता है।
भाव को लेकर एक बात साफ रखें। 2025-26 के लिए अगेती का एसएपी 400 रुपये और सामान्य का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। यह पिछले सत्र का भाव है। 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए पुराने आंकड़े को इस सत्र का भाव बताना गलत होगा। किसान संगठन 500 रुपये से ज्यादा की मांग कर रहे हैं, पर मांग और घोषणा में फर्क है।
मिल का कमजोर पक्ष इंतजार है। पर्ची देर से मिले तो खेत खाली नहीं होता और रबी की बुवाई पीछे खिसकती है। बारिश के बाद कीचड़ ने इस दिक्कत को और बढ़ा दिया है। इसलिए मिल का रास्ता उसी किसान के लिए ठीक है, जिसके पास कुछ दिन रुकने की गुंजाइश हो।
कोल्हू: हाथ में नकद, पर भाव हर दिन नया
कोल्हू की अपील सीधी है। पर्ची का झंझट नहीं, तौल के बाद पैसा हाथ में। मुजफ्फरनगर में 380 रुपये प्रति क्विंटल का भाव एक अन्य रिपोर्ट में भी दर्ज हुआ है, जो रूरल वॉयस के 380 से 400 रुपये के दायरे से मेल खाता है।
भाव गिरने की वजह भी साफ है। जब मिलें नहीं चलीं तो तुरंत रास्ता सिर्फ कोल्हू बचा। गन्ना ज्यादा आया, खरीदने वाले कम पड़े। कोल्हू संचालक भाव अपनी मर्जी से तय करता है, इस पर कोई सरकारी गारंटी नहीं होती। आज 400 रुपये मिल रहा है, कल 380 भी हो सकता है।
कोल्हू पर भाव पहले पक्का करें, बाद में नहीं। तौल अपनी आंखों के सामने कराएं और वजन की पर्ची जरूर लें। मुंहजबानी सौदे में बाद में शिकायत की कोई जमीन नहीं बचती।
गुड़ भट्टी: छोटे किसान का पुराना ठिकाना
वेस्ट यूपी में गुड़ और खंडसारी की भट्टियां पेराई सत्र के साथ ही चल पड़ती हैं। इनका सबसे बड़ा आकर्षण भी तुरंत नकद भुगतान है। कई छोटे किसान, जिनका गन्ना मिल के सट्टे में नहीं आता, वे भट्टी को गन्ना दे देते हैं। दूर के खेत से मिल तक ढुलाई महंगी पड़ती हो, तब भी भट्टी पास का विकल्प बन जाती है।
भट्टी के भाव का कोई तय सरकारी आंकड़ा नहीं होता। भाव उस दिन की मांग के हिसाब से बदलता है, इसलिए यहां कोई एक भाव बताना सही नहीं होगा। सौदा करने से पहले आसपास की दो भट्टियों से भाव पूछें और तौल का लिखित हिसाब जरूर लें।
तीन सवालों से अपना फैसला तय करें
कोई एक जवाब सबके लिए सही नहीं है। अपने हालात से ये सवाल पूछें।
- तुरंत पैसे की कितनी मजबूरी है? बीज या खाद के लिए नकद चाहिए तो थोड़ा गन्ना कोल्हू या भट्टी पर बेचें। पूरा गन्ना नकद में बेचना तब नुकसानदेह होगा, जब मिल से तय भाव मिलने वाला हो।
- गन्ना सट्टे में है या नहीं? सट्टे में है और कुछ दिन रुक सकते हैं तो मिल मजबूत है। सट्टे में नहीं है तो कोल्हू और भट्टी के बीच भाव की तुलना ही फैसला होगी।
- खेत खाली करने की कितनी जल्दी है? रबी की बुवाई के लिए खेत जल्दी खाली करना है तो थोड़ा गन्ना नकद में बेचें, बाकी मिल की पर्ची पर रखें।
कागज संभालें, यही बाद में काम आएगा
रास्ता कोई भी चुनें, कागज की आदत न छोड़ें। पर्ची की तारीख और केंद्र ई-गन्ना ऐप या समिति से देख लें। तौल की पर्ची संभालकर रखें, यही भुगतान का सबसे बड़ा सबूत है। 14 दिन में पैसा न आए तो समिति या जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। टोल-फ्री 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, एसएमएस शॉर्टकोड 51969 है।
मुख्य बातें
- मुजफ्फरनगर में कोल्हू पर गन्ने का भाव सत्र की शुरुआत के 430-450 रुपये से घटकर 380-400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास आ गया है।
- 2025-26 का एसएपी अगेती के लिए 400 रुपये और सामान्य के लिए 390 रुपये था, पर 2026-27 के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
- तुरंत जरूरत के लिए थोड़ा गन्ना नकद में बेचें और बाकी मिल की पर्ची पर रखें, तौल की पर्ची हर हाल में संभालकर रखें।
स्रोत: रूरल वॉयस, इंडिया टुडे हिंदी, नवभारत टाइम्स
