पेराई से पहले की बंधाई: 4 काम से गन्ना खड़ा रहे, तौल-कटाई में घाटा घटे

सुबह खेत पहुंचे तो आधी रात चली तेज हवा का असर साफ दिख रहा था। दो कतारें एक तरफ झुककर लगभग जमीन को छू रही थीं। किसान भाई वहीं खड़े सोच रहे थे कि अब कटाई के वक्त यह गन्ना मशीन से कटेगा या हाथ से? हाथ से कटा, तो मजदूरी दोगुनी। और झुका हुआ गन्ना गीली जमीन पर सड़ेगा, इसका डर अलग।
अक्टूबर में यह नजारा उत्तर प्रदेश के कई खेतों में आम है। गन्ना अब 8-10 फीट का हो चुका है, पेराई सीजन बस कुछ हफ्ते दूर। इस मोड़ पर फसल को सीधा रखना ही सबसे बड़ा काम है। नीचे दिए चार काम उसी के लिए हैं, और सबसे अच्छी बात यह है कि इन्हें करने के लिए न कोई महंगा सामान चाहिए, न कोई बाहर का आदमी।
1. बंधाई की जांच करो, टूटी गांठ फिर से बांधो
बंधाई का असली समय जुलाई से सितंबर होता है। कृषि सलाह के मुताबिक पहली बंधाई तब की जाती है जब पौधा दो से ढाई मीटर का हो जाए, और दूसरी उसके करीब एक महीने बाद। अगर आपने यह काम समय पर किया है, तो अक्टूबर में करना सिर्फ इतना है कि खेत में घूमकर देखो: कहां गांठ ढीली हुई है, कहां पत्ती फट गई है, कहां एक कतार दूसरी पर लदी है। ढीली गांठ को फिर से बांधो।
जिन्होंने बंधाई बिल्कुल नहीं की, उनके लिए भी देर नहीं हुई है। सूखी पत्तियों को रस्सी की तरह बटकर दो पास की कतारों के गन्नों को आपस में बांध दो। तनों को इतना कसकर न बांधो कि वे एक-दूसरे में दब जाएं। बंधाई का मकसद सहारा देना है, गठरी बनाना नहीं। एक बात और: हरी पत्तियों का गुच्छा एक ही जगह इकट्ठा न होने दो, क्योंकि इससे धूप और हवा रुकती है और नीचे की पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं।
2. जड़ के पास मिट्टी: अब सिर्फ मरम्मत
गन्ने को गिरने से बचाने का पहला और सबसे कारगर उपाय जड़ के पास मिट्टी चढ़ाना है। कृषि विभाग की सलाह साफ है: कतार के दोनों तरफ 15 से 30 सेंटीमीटर मिट्टी दो बार चढ़ाएं। पहली बार अप्रैल-मई में और दूसरी बार मानसून से पहले जून में, दो बार गुड़ाई के साथ। इससे मिट्टी में हवा का संचार बढ़ता है, नमी टिकती है, खरपतवार दबता है और कल्लों को मजबूती मिलती है।
अक्टूबर में अब पूरी मिट्टी चढ़ाना संभव नहीं, न ही सलाह दी जाती है। लंबा गन्ना ट्रैक्टर के पहिए में फंसता है। लेकिन जहां बारिश या सिंचाई से जड़ की मिट्टी धुल गई है, वहां हाथ से कुदाल से मिट्टी चढ़ा दो। यह छोटा काम गिरने का खतरा बहुत घटा देता है। और याद रखो, अगले साल की बुवाई से ही यह गलती मत दोहराना: गन्ने की उथली बुवाई और कतारों की असमान दूरी बंधाई को मुश्किल बनाती है, यह बात खेत तैयार करते वक्त ही ध्यान में रखनी होती है।
3. सूखी पत्ती और नाली की सफाई
गिरा हुआ गन्ना सबसे ज्यादा नुकसान तब पहुंचाता है जब वह गीली जमीन या भरी नाली पर पड़ता है। सड़ा-गला हिस्सा मिल में नहीं चढ़ता, और कटाई के वक्त मजदूर उसे अलग करने में समय लगाते हैं। इसलिए तीसरा काम है नालियों की सफाई। बरसात के बाद नालियों में जमी गाद और खरपतवार निकाल दो ताकि पानी बहकर निकल जाए।
सूखी पत्तियों को लेकर दो तरह की सलाह मिलती है, दोनों का मतलब समझ लो। जो पत्तियां गन्ने पर सूखकर लटकी हैं, वे पकने की निशानी हैं, इन्हें छेड़ने की जरूरत नहीं। लेकिन जो पत्तियां नाली में गिरकर पानी रोक रही हैं, उन्हें निकालकर कतारों के बीच बिछा दो। यह बिछावन नमी बचाता है और खरपतवार भी दबाता है। एक तीर, दो निशाने।
4. ट्रैक्टर या हाथ: फैसला खेत के हिसाब से
बंधाई और मिट्टी चढ़ाने में ट्रैक्टर बनाम हाथ का फैसला अक्सर भावना से होता है, हिसाब से नहीं। सीधा नियम याद रखो। खेत छोटा है, कतारें टेढ़ी-मेढ़ी हैं या गन्ना पहले से झुका हुआ है, तो हाथ से काम करो। हाथ में कुदाल वाला मजदूर देखकर चलता है, कल्ला कटने का डर नहीं रहता।
खेत पांच एकड़ से बड़ा है, कतारें सीधी और बराबर दूरी पर हैं, तो ट्रैक्टर से चलने वाला रिजर या बंधाई का औजार समय बचाता है। एक दिन में पूरा खेत निपट जाता है। लेकिन ट्रैक्टर तभी चलाओ जब गन्ना इतना लंबा न हुआ हो कि बोनट या पहिए से टकराए। अक्टूबर में ज्यादातर खेतों में यह सीमा पार हो चुकी होती है, इसलिए इस समय हाथ का काम ही भरोसेमंद रहता है।
कटाई से पहले आखिरी नजर
यह चारों काम निपट जाएं, तो पेराई से पहले एक आखिरी चक्कर जरूर लगाओ। देखो कि कौन सी कतार सबसे पहले कटने लायक है। पकने की पहचान पुरानी और पक्की है: नीचे की पत्तियां सूखकर लटकने लगें और गन्ना मोड़ने पर गांठ से आसानी से टूटे, तो समझो फसल तैयार है। खड़ी और साफ फसल की कटाई में मजदूर भी जल्दी हाथ लगाता है और तौल केंद्र पर भी कोई बहाना नहीं चलता।
गिरता गन्ना सिर्फ फसल नहीं गिराता, किसान का भरोसा भी हिलाता है। पेराई सीजन में जब मिल का ट्रक खेत के बाहर खड़ा हो, तब यह सोचने का वक्त नहीं होता कि बंधाई कर ली होती तो अच्छा था। अक्टूबर का यह आखिरी मौका मत गंवाओ।
मुख्य बातें
- बंधाई की जांच अक्टूबर में जरूर करो: ढीली गांठ फिर बांधो, बिना बंधाई वाले खेत में सूखी पत्ती से दो कतारें आपस में बांधो।
- जड़ के पास 15-30 सेंटीमीटर मिट्टी दो बार चढ़ाना गिरने से बचाव का सबसे कारगर उपाय है, धुली जड़ पर हाथ से मिट्टी चढ़ा दो।
- नाली साफ रखो और गिरी सूखी पत्ती को कतारों के बीच बिछा दो, इससे नमी टिकती है और खरपतवार दबता है।
स्रोत: कृषि जागरण (उत्तर प्रदेश में शरदकालीन गन्ने की वैज्ञानिक खेती; गन्ने की अधिक पैदावार की विधि), किसान हेल्पलाइन (सितंबर-नवंबर में गन्ने की खेती), ट्रैक्टर जंक्शन (बसंतकालीन गन्ना खेती जानकारी)।
