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गन्ने के साथ सरसों-आलू: 120 सेमी चौड़ी पंक्ति में खाली जगह से 4 महीने में अतिरिक्त फसल

✍️ GannaUP डेस्क · 🗓 08 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गन्ने के साथ सरसों-आलू: 120 सेमी चौड़ी पंक्ति में खाली जगह से 4 महीने में अतिरिक्त फसल

अक्टूबर में गन्ना बोने वाले किसान की सबसे बड़ी दिक्कत पता है क्या? गन्ना तो पूरे साल खेत में रहेगा, लेकिन शुरुआती तीन-चार महीने वह खेत की आधी जगह खाली पड़ी रहती है। गन्ना धीरे अंकुरित होता है, पंक्तियों के बीच धूप भी खूब आती है। इसी खाली जगह पर खरपतवार पहले कब्जा करता है, और किसान उसे निराई-गुड़ाई में पैसा खर्च करके हटाता है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ का कहना है कि इसी खाली जगह पर छोटी अवधि की फसल ले ली जाए तो खरपतवार दबता भी है और जेब में अतिरिक्त कमाई भी आती है।

सबसे कारगर जोड़ी कौन सी? शरदकालीन गन्ने के साथ सरसों या आलू। दोनों रबी की फसलें हैं, अक्टूबर में बुवाई का समय भी एक जैसा है, और 3-4 महीने में कट भी जाती हैं। गन्ना तब तक छोटा रहता है, इसलिए दोनों में धूप-पानी की लड़ाई नहीं होती।

पंक्ति की दूरी ही पूरा खेल है

आम गन्ना 75 से 90 सेमी की पंक्तियों पर बोया जाता है। इस दूरी पर बीच में कोई दूसरी फसल ठीक से पनप नहीं पाती। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश है कि अंतरवर्ती फसल लेनी है तो गन्ने की पंक्तियां कम से कम 120 सेमी चौड़ी रखी जाएं। IISR लखनऊ 120 से 150 सेमी की चौड़ी पंक्ति व्यवस्था की सलाह देता है, जिसके बीच एक या दो पंक्तियां सरसों की लगाई जा सकती हैं।

120 सेमी पर गन्ना बोने से किसानों को एक डर सताता है कि गन्ने की उपज घट जाएगी। यहां समझने वाली बात यह है कि चौड़ी पंक्ति में धूप और हवा पौधों को बेहतर मिलती है, टिलरिंग (कल्ले फूटना) अच्छी होती है, और सिंचाई-गुड़ाई में मशीन या बैल चलाना आसान हो जाता है। अंतरवर्ती फसल से जो अतिरिक्त उपज मिलती है, वह इस प्रयोग को आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाती है। फिर भी अपनी मिट्टी, गन्ने की किस्म और सिंचाई की सुविधा के हिसाब से नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें।

सरसों वाली जोड़ी: सबसे कम झंझट

सरसों अंतरवर्ती फसल के रूप में सबसे आसान विकल्प है। बुवाई का समय अक्टूबर का पहला पखवाड़ा है, जो गन्ने की शरदकालीन बुवाई के साथ मेल खाता है। 120 सेमी चौड़ी गन्ने की पंक्तियों के बीच एक या दो पंक्तियों में सरसों बो दें। सरसों करीब 110 से 120 दिन में पक जाती है, यानी फरवरी तक खेत से निकल जाती है।

सरसों का एक फायदा जो अक्सर नजरअंदाज होता है, वह है मधुमक्खी पालन के साथ तालमेल। जहां सरसों के फूल खिलते हैं, वहां मधुमक्खी के डिब्बे रखकर शहद भी लिया जा सकता है। कुछ किसान इस तीन फसलों वाले मॉडल (गन्ना + सरसों + शहद) को अपना रहे हैं। जरूरी नहीं कि हर कोई डिब्बे लगाए, लेकिन जिनके पास यह सुविधा है, उनके लिए यह अतिरिक्त आय का रास्ता है।

खाद का हिसाब साधारण रखें। दोनों फसलों की पोषण जरूरत अलग है, इसलिए गन्ने की बुवाई के समय दी जाने वाली आधार खाद के साथ सरसों की पंक्तियों में उसकी जरूरत का उर्वरक भी डालें। दोनों फसलें साथ होने पर यह ध्यान रखें कि अंतरवर्ती फसल के कारण गन्ने के पोषण और पानी पर बुरा असर न पड़े।

आलू वाली जोड़ी: मेहनत ज्यादा, रिटर्न भी ज्यादा

आलू के साथ गन्ना उगाना पुरानी और आजमाई हुई विधि है। कृषि विज्ञान के मानक प्रयोगों के अनुसार अक्टूबर के पहले सप्ताह में 90 सेमी की दूरी पर गन्ना लगाया जाता है और बुवाई के समय प्रति हेक्टेयर 75 किलोग्राम नाइट्रोजन दी जाती है। आलू की खुदाई के बाद गन्ने में फिर से 75 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर की दर से टॉप ड्रेसिंग की जाती है। यही वह बिंदु है जहां किसान अक्सर चूकता है: आलू निकलने के बाद गन्ना भूखा रह जाता है, और उपज घट जाती है।

एक अखबार की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के सीवान जिले के एक किसान ने पांच कट्ठे में गन्ने के साथ आलू बोया था। गन्ने को दो से तीन फीट की दूरी पर बोकर बीच में एक से दो पंक्तियों में आलू लगाया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि आलू से प्रति एकड़ 35 से 40 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी मिली। यह एक किसान का अनुभव है, हर खेत में यही नतीजा निकलेगा इसकी गारंटी नहीं, लेकिन यह बताता है कि विधि सही हो तो फायदा ठोस होता है।

आलू की जड़ें मिट्टी को भुरभुरी करती हैं, जिससे गन्ने की जड़ों को भी फायदा मिलता है। बस एक सावधानी: आलू की खुदाई के समय गन्ने के नए कल्लों को चोट न लगे, इसलिए खुदाई सावधानी से करवाएं।

खरपतवार पर सीधा असर

गन्ने की शुरुआती अवस्था में खाली जमीन पर खरपतवार सबसे तेजी से बढ़ता है। IISR का कहना है कि पंक्तियों के बीच की जगह में अंतरवर्ती फसल लगाने से वह जगह खरपतवार के लिए नहीं बचती। इसका मतलब है निराई-गुड़ाई पर होने वाला खर्च और मेहनत दोनों घटते हैं। यानी अंतरवर्ती फसल सिर्फ कमाई नहीं देती, खर्च भी बचाती है।

इन तीन गलतियों से बचें

पहली गलती: देर से बुवाई। अक्टूबर का पहला पखवाड़ा निकल जाए तो सरसों और आलू दोनों की पैदावार पर असर पड़ता है। दूसरी गलती: अंतरवर्ती फसल को खाद न देना। गन्ने की खाद से काम चलाने की सोच में दोनों फसलें कमजोर होती हैं। तीसरी गलती: बहुत लंबी अवधि वाली फसल चुनना। अंतरवर्ती फसल हमेशा ऐसी होनी चाहिए जो गन्ने की मिट्टी चढ़ाने (अर्थिंग अप) से पहले खेत से निकल जाए, वरना गन्ने की बढ़वार रुकती है।

मुख्य बातें

  • गन्ने की पंक्तियां 120 सेमी चौड़ी रखें, बीच में एक-दो पंक्ति सरसों या आलू बोएं; अक्टूबर का पहला पखवाड़ा बुवाई का सही समय है।
  • आलू की खुदाई के बाद गन्ने में नाइट्रोजन की टॉप ड्रेसिंग न भूलें, वरना गन्ना कमजोर होगा।
  • अंतरवर्ती फसल खरपतवार दबाती है और 3-4 महीने में अतिरिक्त आमदनी देती है; लंबी अवधि वाली फसल कभी न चुनें।

स्रोत: भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (IISR), लखनऊ; कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशें; किसन तक और ट्रैक्टर जंक्शन की रिपोर्टें।

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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