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₹365 मिले या ₹400? गन्ना बेचने पर किसान की जेब में क्या बचता है

✍️ Aamir Raza · 🗓 05 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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₹365 मिले या ₹400? गन्ना बेचने पर किसान की जेब में क्या बचता है

पश्चिमी यूपी के एक किसान ने पिछले हफ्ते ट्रॉली खाली करके बैठकर हिसाब लगाया। पर्ची पर भाव लिखा था, खाते में पैसा भी आया, लेकिन जो बचा वह उम्मीद से कम था। भाव सुनने में तो अच्छा लगता है, ₹365 प्रति क्विंटल। लेकिन खाद महंगी हुई, मजदूरी बढ़ी और मिल ने भुगतान दो किश्तों में दिया। ऐसे में असली सवाल यही है: 1 क्विंटल गन्ना बेचने पर हाथ में बचता क्या है? नया पेराई सत्र शुरू हो चुका है, तो इसी सीजन के ताजा आंकड़ों से पूरा हिसाब निकालते हैं।

₹365: केंद्र ने तय किया, लेकिन यह न्यूनतम भाव है

5 मई 2026 को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने चीनी सत्र 2026-27 के लिए गन्ने का उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल तय किया। पिछले सत्र 2025-26 में यह ₹355 था, यानी ₹10 यानी 2.81 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यह भाव 1 अक्टूबर 2026 से लागू है और 10.25 प्रतिशत की मूल चीनी रिकवरी पर आधारित है।

रिकवरी से भाव सीधा जुड़ा है: हर 0.1 प्रतिशत अतिरिक्त रिकवरी पर ₹3.56 प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलेगा। अगर किसी मिल की रिकवरी 9.5 प्रतिशत से कम रही, तो किसान के भाव में कोई कटौती नहीं होगी और उसे ₹338.3 प्रति क्विंटल मिलेगा।

FRP देश भर की मिलों के लिए न्यूनतम खरीद मूल्य है। इससे कम पर कोई मिल गन्ना नहीं खरीद सकती, लेकिन राज्य सरकार इससे ऊपर अपना SAP तय कर सकती है। यूपी में सालों से यही होता आया है, इसलिए यहां किसान की नजर हमेशा SAP की घोषणा पर रहती है।

यूपी का SAP: पिछले सत्र में ₹400 मिला, इस सत्र की घोषणा बाकी

पेराई सत्र 2025-26 के लिए यूपी सरकार ने SAP में ₹30 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की थी। नए रेट थे: अगेती प्रजाति के लिए ₹400, सामान्य प्रजाति के लिए ₹390 और अनुपयुक्त प्रजाति के लिए ₹355 प्रति क्विंटल। सरकार के दावे के मुताबिक इस फैसले से राज्य के करीब 46 लाख गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी हुई। यूपी में गन्ने का रकबा भी 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है।

यहां एक जरूरी स्पष्टता: यह 2025-26 सत्र का SAP था। पेराई सत्र 2026-27 के लिए यूपी सरकार ने अभी तक SAP की घोषणा नहीं की है। यानी किसान को या तो FRP ₹365 मिलेगा या नई SAP घोषणा के बाद उससे ऊपर का भाव। अगेती और सामान्य किस्म के बीच का अंतर आपकी किस्म के चुनाव को सीधा प्रभावित करेगा, इसलिए घोषणा पर नजर रखें।

इस बीच एक राहत की खबर भी है। गन्ना समिति की सदस्यता की अंतिम तारीख सरकार ने बढ़ाकर 10 अक्टूबर 2026 कर दी है। बारिश और बाढ़ से फसल को नुकसान के बाद किसानों की मांग पर यह फैसला लिया गया। सदस्यता लेने वाले किसान ही मौजूदा सत्र में सरकारी भाव पर मिल को गन्ना दे पाएंगे।

कागज पर ₹183 का अंतर, जमीन पर असलियत

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने सत्र 2026-27 के लिए गन्ने की उत्पादन लागत (A2+FL) ₹182 प्रति क्विंटल आंकी है। इसमें बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और मशीन पर हुआ नकद खर्च, साथ ही परिवार के श्रम का अनुमानित मूल्य शामिल है। इस हिसाब से FRP ₹365 पर ₹183 का अंतर बनता है, जो लागत से 100.5 प्रतिशत ज्यादा है।

कागज का यह गणित सही है, लेकिन असलियत में तीन पेंच हैं। पहला: लागत का आंकड़ा राष्ट्रीय औसत है। किराये की मशीन चलाने, मजदूरी पर कटाई कराने और दो बार कीट छिड़काव करने वाले किसान की असली लागत ₹182 से ऊपर भी जा सकती है। दूसरा: यह गणित तभी सधता है जब भुगतान समय पर मिले। देर से आए भुगतान पर ब्याज का दावा नियम में है, लेकिन जेब में पैसा देर से आने का नुकसान अलग है। तीसरा: भाव का पूरा लाभ तभी मिलता है जब गन्ना समय पर, सही किस्म का और अच्छी रिकवरी वाला हो। गिरा, सूखा या देर से दिया गया गन्ना वजन और भाव दोनों घटाता है।

यही वजह है कि कई किसान कहते हैं: भाव बढ़ा, लेकिन हाथ में उतना नहीं आया। भाव और जेब के बीच का यह फासला भरना काफी हद तक किसान के अपने हाथ में भी है।

प्रति क्विंटल कमाई बढ़ाने के चार असली तरीके

1. अगेती किस्म को तरजीह दें: पिछले सत्र में अगेती पर ₹400 मिला और सामान्य पर ₹390। अगेती किस्में जल्दी पकती हैं और इनकी रिकवरी भी बेहतर रहती है। बीज बदलते समय रिकवरी वाली किस्म चुनना सीधे जेब पर असर डालता है।

2. पेराई शुरू होते ही आपूर्ति करें: शुरुआती गन्ने में रिकवरी अच्छी रहती है और पर्ची में प्राथमिकता भी मिलती है। देर से दिया गया गन्ना अक्सर गिरा या सूखा होता है, जो भाव और वजन दोनों घटाता है।

3. रिकवरी के प्रीमियम को समझें: हर 0.1 प्रतिशत अतिरिक्त रिकवरी पर ₹3.56 का प्रीमियम सीधे किसान की जेब में जुड़ता है। अगर कोई मिल 11 प्रतिशत रिकवरी पर चल रही है, तो उसे गन्ना देने वाले किसान को 10.25 प्रतिशत वाली मिल की तुलना में करीब ₹26-27 प्रति क्विंटल ज्यादा मिलता है।

4. समिति सदस्यता न चूकें: 10 अक्टूबर 2026 तक गन्ना समिति की सदस्यता जरूर लें। बिना सदस्यता के सरकारी भाव पर मिल को गन्ना बेचना मुश्किल हो जाता है।

मुख्य बातें

  • केंद्र ने सत्र 2026-27 के लिए FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है (10.25% रिकवरी आधार); यह न्यूनतम भाव है, कोई मिल इससे कम नहीं दे सकती।
  • यूपी में 2025-26 का SAP था: अगेती ₹400, सामान्य ₹390, अनुपयुक्त ₹355; 2026-27 के SAP की घोषणा अभी बाकी है।
  • CACP लागत ₹182 के मुकाबले कागज पर ₹183 का अंतर बनता है, लेकिन असली बचत समय पर भुगतान, सही किस्म और अच्छी रिकवरी पर टिकी है।

स्रोत: The Hindu (5 मई 2026), PTI, TractorJunction, Drishti IAS, किसानइंडिया

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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