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गड़ौरा मिल का आवंटन रद्द: पर्ची अब इन 4 मिलों से मिलेगी, 3000 किसानों को खड्डा से राहत

✍️ Aamir Raza · 🗓 23 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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गड़ौरा मिल का आवंटन रद्द: पर्ची अब इन 4 मिलों से मिलेगी, 3000 किसानों को खड्डा से राहत

महराजगंज के गड़ौरा क्षेत्र के गन्ना किसानों के लिए इस बार पर्ची का पता बदल जाएगा। बकाया भुगतान के चलते गन्ना आयुक्त ने जेएचवी शुगर मिल, गड़ौरा का पेराई सत्र 2026-27 का गन्ना आवंटन प्रस्ताव ही खारिज कर दिया है। सीधा मतलब यह है कि इस सीजन गड़ौरा मिल को गन्ना नहीं मिलेगा और क्षेत्र के किसानों को अपना गन्ना चार दूसरी मिलों के क्रय केंद्रों के जरिए देना होगा।

पिछले पेराई सत्र में जिस मिल को 60.73 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित हुआ था, इस बार उसी मिल के सामने संचालन का संकट खड़ा हो गया है। विभाग की ओर से कहा गया है कि किसानों का बकाया गन्ना मूल्य अब तक लंबित है, मिल की मौजूदा स्थिति को लेकर असमंजस है और पुराने बकाए के भुगतान की जिम्मेदारी भी स्पष्ट नहीं हुई। इन्हीं तीन कारणों से आयुक्त ने आवंटन प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार किया।

यह रुख विभाग का अचानक नहीं है। इसी पेराई सत्र की शुरुआत से पहले बरेली क्षेत्र की एक चीनी मिल के खिलाफ भी बकाया रखने पर इसी तरह की कार्रवाई हुई थी। साफ संकेत है कि विभाग इस साल भुगतान को लेकर कोई ढील नहीं देगा।

आपका गन्ना अब कहां जाएगा: केंद्रवार नई व्यवस्था

गन्ना आयुक्त के आदेश के अनुसार गड़ौरा क्षेत्र का गन्ना कुशीनगर की हाटा और रामकोला, गोरखपुर की पिपराइच तथा महराजगंज की ही सिसवा बाजार चीनी मिलों को क्रय केंद्रवार बांट दिया गया है। प्रमुख केंद्रों का आवंटन इस प्रकार है:

क्रय केंद्रगन्ना (लाख क्विंटल)अब किस मिल को
जयश्री प्रथम1.84पिपराइच (गोरखपुर)
जयश्री द्वितीय1.20हाटा (कुशीनगर)
पिपराकाजी प्रथम व द्वितीय0.78रामकोला (कुशीनगर)
मिश्रौलिया द्वितीय1.20रामकोला (कुशीनगर)

इसके अलावा लेदी, बजहा प्रथम, मिश्रौलिया प्रथम, बैठवलिया और झुलनीपुर केंद्रों का कुल 8.55 लाख क्विंटल गन्ना हाटा मिल को मिलेगा। डोमा फार्म, बहुआर, बजही और बजहा द्वितीय केंद्रों से 7.70 लाख क्विंटल गन्ना सिसवा बाजार मिल को दिया गया है। गड़ौरा मिलगेट के 12.84 लाख क्विंटल गन्ने की आपूर्ति पिपराइच, हाटा और रामकोला मिलें संयुक्त रूप से कराएंगी।

महराजगंज जिले में करीब 20 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है। प्रति हेक्टेयर 715 क्विंटल के संभावित औसत उत्पादन के आधार पर इस वर्ष जिले से करीब 1.43 करोड़ क्विंटल गन्ना पैदा होने का अनुमान है। विभाग ने केंद्रवार सूची पहले से जारी कर दी है, ताकि पेराई शुरू होते ही आपूर्ति पटरी पर रहे।

खड्डा रेता के करीब 3000 किसानों को अलग से राहत

इसी बीच कुशीनगर के खड्डा रेता क्षेत्र के करीब 3000 किसानों के लिए भी बड़ी खबर आई है। इस क्षेत्र के शिवपुर, मरिचहवा, बसंतपुर, नारायणपुर, हरिहरपुर और भैंसहा के बालगोविंद छपरा में गन्ना उगाने वाले किसानों का गन्ना अब गड़ौरा मिल के बजाय आईपीएल चीनी मिल खड्डा को आवंटित किया गया है।

किसान लंबे समय से इसकी मांग कर रहे थे। वजह दो थी। पहली, गड़ौरा मिल पर पिछले पेराई सत्र का भुगतान बकाया था। दूसरी, गड़ौरा मिल क्षेत्र के किसानों को दूर स्थित केंद्रों पर गन्ना पहुंचाने में परेशानी हो रही थी। खड्डा चीनी मिल क्षेत्र के नजदीक है, इसलिए भाड़ा और समय दोनों बचेंगे।

इस मांग को लेकर किसान रमेश शुक्ला, इजहार अंसारी, सुचिन्द्र सिंह, ब्रह्मा यादव और नर्वदेश्वर सिंह समेत कई किसानों ने सांसद विजय दुबे, विधायक विवेकानंद पांडेय और केन यूनियन चेयरमैन सुप्रियमय मालवीय से मुलाकात की थी। फैसले के बाद किसानों ने जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार जताया है।

पुराने बकाए का क्या होगा

आवंटन रद्द होने का मतलब यह नहीं कि पुराना बकाया माफ हो गया। पिछले पेराई सत्र का गन्ना मूल्य चुकाने की जिम्मेदारी अभी भी गड़ौरा मिल की ही है। ऐसे में गड़ौरा क्षेत्र के किसानों के लिए तीन काम जरूरी हैं।

पहला, अपनी पुरानी भुगतान पर्चियों और रसीदों को संभालकर रखें। बकाया वसूली के लिए यही सबसे बड़ा सबूत होगा। दूसरा, नई मिल के क्रय केंद्र से जारी पर्ची और आपूर्ति कैलेंडर पर नजर रखें। पर्ची अब पुरानी मिल के नाम पर नहीं आएगी। तीसरा, ई-गन्ना पोर्टल पर अपने केंद्र की नई स्थिति की पुष्टि जरूर कर लें, ताकि पेराई शुरू होने पर गन्ना ले जाने में देरी न हो।

किसान के लिए इसका मतलब

इस सीजन गड़ौरा क्षेत्र का गन्ना जिन चार मिलों को जाएगा, वे सभी नियमित भुगतान करने वाली मिलें मानी जाती हैं। किसान संगठनों का कहना है कि जो मिल समय पर भुगतान नहीं करती, उससे नाता टूटना किसानों के हक में ही होता है। हाटा और रामकोला जैसी मिलों के क्रय केंद्रों से पर्ची जारी होने की व्यवस्था पिछली बार से बेहतर रहने की उम्मीद है।

महराजगंज के गन्ना किसान ध्यान रखें कि केंद्र बदलने की वजह से शुरुआत में आपूर्ति में थोड़ी उलझन हो सकती है। पर्ची मिलते ही समय पर गन्ना पहुंचाएं और किसी भी असमंजस में अपने क्षेत्र के गन्ना विकास कार्यालय से संपर्क करें।

मुख्य बातें

  • गन्ना आयुक्त ने बकाया भुगतान के चलते जेएचवी शुगर मिल गड़ौरा का 2026-27 का गन्ना आवंटन प्रस्ताव खारिज किया
  • गड़ौरा क्षेत्र का गन्ना अब हाटा, रामकोला, पिपराइच और सिसवा बाजार मिलों के क्रय केंद्रों को आवंटित होगा
  • खड्डा रेता के करीब 3000 किसानों का गन्ना गड़ौरा मिल से हटाकर आईपीएल चीनी मिल खड्डा को दिया गया
  • पुराने सत्र का बकाया भुगतान अभी भी गड़ौरा मिल की जिम्मेदारी है, रसीदें संभालकर रखें

स्रोत: जागरण, चिनीमंडी, लाइव हिन्दुस्तान

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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