गड़ौरा चीनी मिल को 20 नवंबर तक की मोहलत: 1.80 करोड़ न दिए तो कुर्की होगी

महराजगंज के निचलौल इलाके के गन्ना किसानों के लिए प्रशासन का एक फैसला राहत लेकर आया है। जिला प्रशासन ने गड़ौरा चीनी मिल को 1.80 करोड़ रुपये की रिकवरी का नोटिस थमा दिया है, जिसमें 20 नवंबर तक भुगतान न होने पर कुर्की की चेतावनी है।
निचलौल के एसडीएम अवनीश कुमार त्रिपाठी ने बताया है कि जिला गन्ना अधिकारी की आख्या के आधार पर डीएम कार्यालय से यह रिकवरी नोटिस जारी हुआ है। पहले विभागीय स्तर पर मिल के भुगतान की स्थिति की जांच हुई, फिर प्रशासन ने वसूली का रास्ता अपनाया।
14 दिन का नियम टूटा, तब प्रशासन सख्त हुआ
गन्ना खरीद का नियम सीधा है। मिल को गन्ना खरीदने के 14 दिन के भीतर किसान को उसका मूल्य चुकाना होता है। गड़ौरा मिल पर आरोप है कि उसने इस नियम का उल्लंघन किया। किसानों का पैसा समय पर नहीं मिला, और बकाया बढ़ता चला गया।
दैनिक जागरण की 23 अक्टूबर की खबर के अनुसार इस मिल पर किसानों का कुल 7.72 करोड़ रुपये बकाया है। रिकवरी नोटिस की 1.80 करोड़ रुपये की रकम इस कुल बकाए का एक हिस्सा है। प्रशासन ने पहले इसी हिस्से की वसूली का समय तय किया है, और चेतावनी दी है कि तय तारीख तक भुगतान न हुआ तो कुर्की होगी।
20 नवंबर एक ऐसी तारीख बन गई है जिस पर सबकी नजर रहेगी। अगर मिल ने इस तारीख तक रकम जमा कर दी, तो वसूली की कार्रवाई रुक जाएगी। अगर नहीं की, तो प्रशासन कुर्की की ओर बढ़ेगा।
इस सत्र के लिए गन्ना आवंटन भी नहीं मिला
पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना आयुक्त ने मिल के पक्ष में गन्ना आवंटन के प्रस्ताव को स्वीकृति नहीं दी है। इसका सीधा नतीजा यह हुआ कि मिल के क्षेत्र का गन्ना दूसरी मिलों को बांट दिया गया।
खबरों के अनुसार निचलौल क्षेत्र का गन्ना कुशीनगर की हाटा और रामकोला, गोरखपुर की पिपराइच और महराजगंज की सिसवा बाजार चीनी मिलों को आवंटित किया गया है।
अमर उजाला की 30 अक्टूबर की खबर के अनुसार जिन दो गैर-जनपद मिलों को निचलौल का गन्ना खरीदना है, उन्होंने अब तक निचलौल की किसी भी ग्राम पंचायत में अपना कांटा या क्रय केंद्र स्थापित नहीं किया है। निचलौल गड़ौरा मिल का मुख्य गन्ना आपूर्ति क्षेत्र रहा है।
मजबूरी में क्रशर पर 200 से 250 रुपये में बिक रहा गन्ना
जब मिल का कांटा नहीं लगता और पर्ची का भरोसा नहीं रहता, तो किसान के पास सीमित रास्ते बचते हैं। कई किसान मजबूरी में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अपना गन्ना स्थानीय क्रशर पर बेचकर अपनी जमा पूंजी निकाल रहे हैं।
यह दर सरकारी भाव से बहुत नीचे है। पिछले पेराई सत्र में अगैती प्रजाति का भाव 400 रुपये और पछेती का 390 रुपये प्रति क्विंटल था। 2026-27 सत्र का नया गन्ना मूल्य अभी घोषित नहीं हुआ है।
गड़ौरा मिल से करीब 9,038 किसान जुड़े हुए हैं और मिल के लगभग 30 क्रय केंद्र संचालित होते रहे हैं। पिछले पेराई सत्र में इस मिल को 60.73 लाख क्विंटल गन्ना आवंटित हुआ था, जबकि मिल की क्षमता 24 घंटे में 50 हजार क्विंटल गन्ना पेरने की बताई जाती है।
दो साल बंद रही थी मिल, अब फिर संकट
गड़ौरा मिल के लिए यह पहला संकट नहीं है। वर्ष 2018-19 और 2019-20 में पर्याप्त गन्ना आवंटन नहीं मिलने के कारण यह मिल दो वर्षों तक बंद रही थी। उस दौर के बाद मिल फिर चली, लेकिन भुगतान की समस्या पीछा नहीं छोड़ पाई।
जिले की कहानी भी इसी ओर इशारा करती है। एक समय महराजगंज में 40 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती थी और घुघली, सिसवा, गड़ौरा, फरेंदा चारों मिलें चलती थीं। दो मिलें बंद हो गईं, अब महज दो संचालित हैं और गन्ने का रकबा घटकर आधा रह गया है।
निचलौल के किसानों को अब क्या करना चाहिए
सबसे जरूरी बात यह है कि किसान अपनी पर्ची, तौल और भुगतान का पूरा हिसाब संभालकर रखें। ई-गन्ना ऐप पर अपना भुगतान और आवंटित मिल की स्थिति देखते रहें। अगर किसी गांव में नई मिल का कांटा या क्रय केंद्र अभी नहीं लगा है, तो इसकी जानकारी जिला गन्ना अधिकारी को लिखित में दें। सामूहिक शिकायत की आवाज अकेली शिकायत से ज्यादा असर करती है।
क्रशर पर गन्ना बेचना मजबूरी हो सकती है, लेकिन इसका लिखित हिसाब जरूर रखें। किस दर पर, कितना गन्ना, किसे बेचा, यह जानकारी बाद में बकाया के किसी दावे में काम आ सकती है। 20 नवंबर की तारीख पर नजर रखें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, और एसएमएस के लिए 51969 नंबर है।
गड़ौरा मिल का मामला अब सिर्फ एक मिल का मामला नहीं रह गया है। यह इस सवाल से जुड़ गया है कि जब मिल भुगतान न करे और आवंटन भी न मिले, तो किसान की फसल का क्या होगा।
मुख्य बातें
- गड़ौरा चीनी मिल पर 1.80 करोड़ रुपये की रिकवरी का नोटिस, 20 नवंबर तक भुगतान की मोहलत, नहीं तो कुर्की की चेतावनी।
- मिल पर किसानों का कुल 7.72 करोड़ रुपये बकाया बताया जा रहा है, और 2026-27 सत्र के लिए गन्ना आवंटन भी नहीं मिला है।
- निचलौल में नई मिलों का कांटा अभी नहीं लगा है, इसलिए कई किसान मजबूरी में 200 से 250 रुपये प्रति क्विंटल पर क्रशर को गन्ना बेच रहे हैं।
स्रोत: अमर उजाला (30 अक्टूबर 2026), दैनिक जागरण (23 अक्टूबर 2026), नवभारत टाइम्स (30 अक्टूबर 2026)
