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DM खुद खेत में उतरेंगे: 12 अक्टूबर तक फसल नुकसान का सर्वे, लेखपाल रिपोर्ट अब काफी नहीं

✍️ Aamir Raza · 🗓 08 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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DM खुद खेत में उतरेंगे: 12 अक्टूबर तक फसल नुकसान का सर्वे, लेखपाल रिपोर्ट अब काफी नहीं

पिछले दो-तीन हफ्तों में खेत में पानी खड़ा रहा और फसल बर्बाद हुई। मन में एक ही सवाल घूम रहा है: मुआवजा कब मिलेगा, और इस बार कोई चूक तो नहीं होगी?

इस सवाल के जवाब में योगी सरकार ने बाढ़ और भारी बारिश से प्रभावित किसानों के लिए सर्वे का तरीका ही बदल दिया है। राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा की और साफ निर्देश दिए हैं कि 12 अक्टूबर तक डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर फसल नुकसान का पूरा डेटा राहत पोर्टल पर दर्ज हो जाना चाहिए। इसके बाद पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता राशि दी जाएगी।

इस बार सबसे बड़ा बदलाव एक ही है: सर्वे केवल कागज पर नहीं होगा।

लेखपाल की रिपोर्ट अकेली नहीं चलेगी

अब तक की व्यवस्था में फसल नुकसान का आकलन काफी हद तक लेखपाल और कानूनगो की रिपोर्ट पर निर्भर था। किसानों की शिकायत रही है कि कई बार रिपोर्ट कागजी होती है, खेत की असली हालत उसमें नहीं दिखती।

राहत आयुक्त ने इस व्यवस्था पर सीधे सवाल उठाया है। नए निर्देश के मुताबिक जिलाधिकारी और अपर जिलाधिकारी स्वयं खेतों में जाकर सर्वे की स्थिति का निरीक्षण करेंगे। जिस खेत का नुकसान दर्ज हुआ है, वहां अधिकारी खुद जाकर सर्वे की गुणवत्ता और पारदर्शिता की जांच करेंगे।

इतना ही नहीं, उप जिलाधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार भी डिजिटल क्रॉप सर्वे के नतीजों की क्रॉस-वेरिफिकेशन करेंगे। एक ही रिपोर्ट पर तीन स्तरों की जांच होगी।

12 अक्टूबर की डेडलाइन का मतलब

सरकार ने साफ कहा है कि 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल सर्वे की फीडिंग हर हाल में पूरी हो। जिलों को प्रगति रोजाना गूगल शीट और पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।

इसका मतलब किसान के लिए सीधा है: 12 अक्टूबर के बाद ही मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जिस किसान का खेत इस सर्वे में दर्ज नहीं होगा, उसका नाम राहत सूची से छूट सकता है।

एक और अहम बात: राहत के बजट की मांग भी पोर्टल पर दर्ज वास्तविक डेटा के आधार पर ही होगी। जिस जिले का सर्वे डेटा पोर्टल पर नहीं पहुंचेगा, वहां राहत की रकम के लिए बजट मांग भी अटक सकती है। इसलिए जिला प्रशासन पर दबाव दोतरफा है।

बारिश का हिसाब अब मौसम विभाग के आंकड़ों से

कई बार विवाद इसी बात पर होता है कि गांव में कितनी बारिश हुई, इसका सबूत क्या है। गांव में एक बोलेगा बारिश कम हुई, दूसरा कहेगा ज्यादा।

इस बार सरकार ने इस विवाद को खत्म करने का रास्ता चुना है। फसल क्षति का आकलन आईएमडी (भारत मौसम विज्ञान विभाग) और एडब्ल्यूएस-एआरजी यानी ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन और ऑटोमैटिक रेन गेज के डेटा से जोड़ा जाएगा। फिर इसी वास्तविक बारिश के डेटा और डिजिटल सर्वे के नतीजों के आधार पर फसल नुकसान का निर्धारण होगा।

किसान के लिए इसका फायदा यह है कि नुकसान का आकलन अंदाजे पर नहीं, मापे गए आंकड़ों पर होगा।

सिर्फ बाढ़ नहीं, बारिश और चक्रवात का नुकसान भी

सरकार ने निर्देश दिए हैं कि बाढ़ के साथ-साथ भारी बारिश और चक्रवात से हुए नुकसान को भी दर्ज किया जाएगा। कई जिलों में फसल लगातार बारिश से खराब हुई है, कुछ जगहों पर चक्रवात से गन्ने के खेत प्रभावित हुए हैं।

संबंधित जिलों को यह सारा डेटा एक तय गूगल शीट में दर्ज करना अनिवार्य है। गड़बड़ी मिली तो संबंधित अधिकारी को स्पष्टीकरण देना होगा।

किसान के लिए: क्या करें, क्या तैयार रखें

इस सर्वे का फायदा पाने के लिए किसान को खुद भी सतर्क रहना होगा। सर्वे से पहले संबंधित खसरा और राजस्व से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाएगी, ताकि पिछले साल बोई गई फसलों की जानकारी और मौजूदा फसल का सही आकलन हो सके।

  • अपने खेत के खसरा-खतौनी के कागजात तैयार रखें, ताकि सर्वे टीम आने पर दस्तावेज दिखा सकें।
  • लेखपाल या राजस्व टीम से पता करें कि आपके प्रभावित खेत का डिजिटल सर्वे हुआ या नहीं।
  • नुकसान की हालत दिखाने के लिए प्रभावित खेत की फोटो अपने फोन में जरूर रखें, तारीख के साथ।
  • गन्ना किसान अपनी पर्ची और सट्टा संबंधी जानकारी भी संभालकर रखें, यह रिकॉर्ड काम आ सकता है।
  • अगर किसी प्रभावित खेत का सर्वे छूट गया है, तो तहसील या उप जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराएं।

पहले की शिकायतें और अब का भरोसा

फसल मुआवजे को लेकर किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यही रही है कि सूची में असली प्रभावित छूट जाते हैं। राहत आयुक्त ने कहा है कि किसान हित सर्वोपरि है और किसी भी प्रभावित किसान का अहित नहीं होना चाहिए।

डीएम के खुद खेत उतरने, तीन स्तरीय जांच और मौसम विभाग के आंकड़ों को जोड़ने से इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन किसान को भी सक्रिय रहना होगा। सर्वे टीम आपके खेत तक पहुंचे, इसके लिए आप पहले से सजग रहें।

12 अक्टूबर की डेडलाइन नजदीक है।

मुख्य बातें

  • राहत आयुक्त ने प्रभावित जिलों को 12 अक्टूबर तक राहत पोर्टल पर डिजिटल क्रॉप सर्वे की फीडिंग पूरी करने का आदेश दिया है।
  • फसल नुकसान का आकलन अब केवल लेखपाल की रिपोर्ट पर नहीं होगा; डीएम खुद खेत पर जाकर सर्वे की जांच करेंगे।
  • वास्तविक बारिश का आकलन आईएमडी और ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन के आंकड़ों से होगा।
  • बाढ़ के साथ-साथ भारी बारिश और चक्रवात से हुए नुकसान को भी दर्ज किया जाएगा।
  • मुआवजा 12 अक्टूबर के बाद पात्र किसानों को नियमानुसार मिलेगा, इसलिए समय पर सर्वे में अपना खेत दर्ज कराना जरूरी है।

स्रोत: indiapublickhabar.com (7 अक्टूबर 2026), kisantak.in (7 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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