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यूरोप जाएगी यूपी की चीनी: 5,841 टन निर्यात कोटा मंजूर, किसानों को क्या फायदा?

✍️ Aamir Raza · 🗓 12 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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यूरोप जाएगी यूपी की चीनी: 5,841 टन निर्यात कोटा मंजूर, किसानों को क्या फायदा?

9 अक्टूबर को केंद्र सरकार ने एक ऐसा आदेश जारी किया है जिसका सीधा संबंध चीनी मिलों की आमदनी और किसानों के भुगतान से है। विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने पब्लिक नोटिस संख्या 32/2026-2027 के जरिए यूरोपीय संघ (EU) को 5,841 मीट्रिक टन चीनी के निर्यात कोटे को अधिसूचित कर दिया है। यह कोटा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए है और अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक की अवधि को कवर करेगा।

पहली नजर में यह खबर सिर्फ निर्यातकों की लग सकती है, लेकिन यूपी के गन्ना किसानों के लिए इसमें एक अहम संकेत है। चीनी का हर नया बाजार मिलों की आर्थिक सेहत से जुड़ा होता है, और सेहतमंद मिल का मतलब है गन्ना भुगतान की बेहतर स्थिति।

TRQ कोटा आखिर है क्या

टैरिफ रेट कोटा (TRQ) एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौता है जिसमें यूरोपीय संघ भारत से एक तय मात्रा तक चीनी कम या शून्य आयात शुल्क पर लेता है। कोटे से ज्यादा निर्यात पर भारी शुल्क लग जाता है। इसलिए यह 5,841 टन का कोटा उन निर्यातकों के लिए कीमती है जो यूरोपीय बाजार में चीनी बेचना चाहते हैं।

DGFT के नोटिस के मुताबिक, HS कोड 17010000 के तहत यूरोपीय संघ को होने वाला यह निर्यात “मुक्त” (Free) श्रेणी में रहेगा, लेकिन उस पर 20 अप्रैल 2015 के अधिसूचना संख्या 03/2015-20 में तय शर्तें लागू होंगी। यानी निर्यात तो खुलेगा, पर तय प्रक्रिया का पालन करना होगा।

कोटे के संचालन की जिम्मेदारी APEDA को

सरकार ने कोटे के क्रियान्वयन के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA), नई दिल्ली को नोडल एजेंसी बनाया है। APEDA तय करेगी कि कौन से निर्यातक पात्र हैं और किसे कितनी मात्रा मिलेगी।

अधिसूचना के मुताबिक तरजीही निर्यात के लिए जरूरत पड़ने पर मूल प्रमाणपत्र (Certificate of Origin) मुंबई के अतिरिक्त विदेश व्यापार महानिदेशक जारी करेंगे, APEDA की सिफारिश पर। निर्यातकों को 2015 की अधिसूचनाओं के तहत तय रिपोर्टिंग शर्तें भी पूरी करनी होंगी।

निर्यात पर पाबंदी के बीच यह छूट क्यों खास है

इस कोटे की अहमियत समझने के लिए पृष्ठभूमि जाननी जरूरी है। DGFT ने चीनी के सामान्य निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक रोक लगाई हुई है। घरेलू उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखकर सरकार ने रॉ शुगर, व्हाइट शुगर और रिफाइंड शुगर, तीनों के निर्यात को “निषिद्ध” श्रेणी में डाल रखा है।

लेकिन इस पाबंदी से दो रास्ते बाहर रखे गए हैं। पहला, यूरोपीय संघ और अमेरिका को TRQ व्यवस्था के तहत होने वाला निर्यात, और दूसरा, खाद्य सुरक्षा के लिए सरकार से सरकार को होने वाला निर्यात। यानी जब बाकी सारे निर्यात के दरवाजे बंद हैं, तब EU कोटा चीनी मिलों के लिए एक वैध और खुला रास्ता है। इसी वजह से 9 अक्टूबर का नोटिस चीनी उद्योग में चर्चा में है।

UP के गन्ना किसानों पर इसका असर

सबसे बड़ा सवाल यह है कि 5,841 टन चीनी का कोटा यूपी के लाखों गन्ना किसानों की जेब तक कैसे पहुंचेगा। ईमानदारी से कहें तो यह मात्रा देश के कुल चीनी उत्पादन के मुकाबले छोटी है, इसलिए गन्ना भाव या भुगतान पर सीधा और तुरंत असर की उम्मीद न करें।

फिर भी किसान इसे नजरअंदाज न करें। ब्राजील में भारी बारिश के कारण गन्ने की कटाई धीमी है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी उत्पादन में कमी की आशंका है। ऐसे माहौल में भारतीय चीनी को विदेशी बाजार में अच्छी कीमत मिलने की संभावना है। निर्यात से मिलों की आमदनी बढ़ेगी, और मजबूत मिल का मतलब है समय पर गन्ना भुगतान।

पिछले साल भी यूरोपीय संघ के लिए ठीक इतना ही, 5,841 टन का कोटा जारी हुआ था। यह एक नियमित वार्षिक व्यवस्था है। लेकिन इस साल इसकी टाइमिंग खास है, क्योंकि पेराई सत्र शुरू होने वाला है और मिलें नए सत्र की तैयारी में जुटी हैं। नवंबर से पहले गन्ना तौल की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। ऐसे समय में निर्यात का एक खुला चैनल मिलों के लिए राहत की खबर है।

किसानों के लिए समझने लायक बात

किसान भाइयों के लिए इस खबर का सार यह है कि सरकार ने चीनी उद्योग के लिए विदेशी बाजार का एक दरवाजा खुला रखा है। यह दरवाजा छोटा जरूर है, पर ऐसे समय में खुला है जब घरेलू निर्यात पर पाबंदी है। मिलों की बिक्री का एक अतिरिक्त साधन मिलना गन्ना भुगतान की लड़ाई में एक छोटी जीत जैसा है।

अपने हितों की रक्षा के लिए किसानों को पेराई सत्र के दौरान तौल पर्ची, वजन और भुगतान की तारीखों पर नजर रखनी चाहिए। eGanna ऐप पर अपनी पर्ची और भुगतान की स्थिति समय-समय पर जांचते रहें। कोई भी दिक्कत हो तो गन्ना समिति या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करें।

मुख्य बातें

  • DGFT ने 9 अक्टूबर 2026 को पब्लिक नोटिस 32/2026-2027 जारी कर EU को 5,841 टन चीनी निर्यात कोटा अधिसूचित किया, जो अक्टूबर 2026 से सितंबर 2027 तक लागू रहेगा।
  • कोटे का संचालन APEDA करेगी; मूल प्रमाणपत्र मुंबई के अतिरिक्त DGFT जारी करेंगे। निर्यात “मुक्त” श्रेणी में रहेगा, पर तय शर्तों के साथ।
  • सामान्य चीनी निर्यात पर 30 सितंबर 2026 तक पाबंदी है, लेकिन EU/US को TRQ निर्यात इस पाबंदी से बाहर है। यूपी के किसानों के लिए इसका लाभ अप्रत्यक्ष पर अहम है: मिलों की आय बढ़ेगी तो भुगतान की स्थिति सुधरेगी।

स्रोत: A2Z Taxcorp (DGFT पब्लिक नोटिस 32/2026-2027 विवरण), ChiniMandi

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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