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एथेनॉल टेंडर में गन्ना बाहर होते ही चीनी शेयर 13% टूटे, यूपी की 122 मिलों की कमाई पर सवाल

✍️ Aamir Raza · 🗓 20 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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एथेनॉल टेंडर में गन्ना बाहर होते ही चीनी शेयर 13% टूटे, यूपी की 122 मिलों की कमाई पर सवाल

सोमवार की सुबह शेयर बाजार खुला और चीनी मिलों के निवेशकों के चेहरे उतर गए। विश्वराज शुगर का शेयर 13 प्रतिशत टूटकर ₹5.06 पर आ गया। श्री रेणुका शुगर्स 6.3 प्रतिशत, बजाज हिंदुस्थान शुगर 7.5 प्रतिशत और द्वारिकेश शुगर 7 प्रतिशत फिसलीं। मवाना शुगर्स 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट में अटक गई।

खबर शेयर बाजार की है, लेकिन इसका हिसाब यूपी के खेत तक पहुंचता है। शेयर टूटने का मतलब है कि बाजार को मिलों की आने वाली कमाई पर भरोसा नहीं रहा, और मिलों की कमाई से सबसे सीधा जुड़ा मामला गन्ना किसान का भुगतान है। आइए समझते हैं कि गिरावट के पीछे कौन सा फैसला है और किसान पर इसका क्या बीतेगा।

16 अक्टूबर का टेंडर: गन्ने का रस और बी-हेवी शीरा बाहर

भारतीय पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) ने 16 अक्टूबर को तेल विपणन कंपनियों की ओर से एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 (नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027) का टेंडर जारी किया। यह पहले चक्र के लिए लगभग 1100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद का टेंडर है, ताकि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को पूरा किया जा सके। टेंडर दस्तावेज़ में सरकारी निर्देश दर्ज है: एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में चीनी का डायवर्जन शून्य रहेगा। नतीजा यह कि गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए कोई प्रस्ताव मांगा ही नहीं गया।

बीपीसीएल ने सिर्फ मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम के अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए बोलियां मांगी हैं। यहां समझ लीजिए: बी-हेवी शीरा वह शीरा है जिसमें चीनी ज्यादा होती है और जिससे मिलों को अच्छा मार्जिन मिलता था। सी-हेवी शीरा चीनी बनाने का अंतिम बचा उत्पाद है, जिससे एथेनॉल बनाना अभी भी अनुमत है। यानी एथेनॉल कारोबार बंद नहीं हुआ, लेकिन कमाई वाला रास्ता बंद हो गया है।

मक्के का दाम भी घटा: ₹71.86 से ₹68.86

मक्के से बने एथेनॉल की खरीद कीमत भी ₹71.86 से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर कर दी गई है, यानी ₹3 प्रति लीटर की सीधी कटौती। इसके साथ मक्के वाले एथेनॉल पर मिलने वाला अतिरिक्त प्रोत्साहन भी ₹5.79 से घटाकर ₹2.79 प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे डिस्टिलरियों की प्रति लीटर कमाई घटेगी।

बाजार की घबराहट की जड़: मिलों की कमाई का गणित

अब सवाल है कि शेयर 13 प्रतिशत तक क्यों टूटे। जवाब मिलों की कमाई के गणित में है। मिलें गन्ने और शीरे को उस दिशा में मोड़ती थीं, जहां ज्यादा मार्जिन मिले। इस छूट के खत्म होने से कमाई का एक बड़ा स्रोत बंद हो गया। जिन मिलों ने डिस्टिलरी प्लांट में बड़ा निवेश किया था, उसका रिटर्न भी घट सकता है। सरकार का तर्क है कि घरेलू चीनी की उपलब्धता बनी रहे और दाम न बढ़ें। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश से गन्ना उत्पादन घटने की आशंका के बाद सरकार यह संतुलन साध रही है।

यूपी के 122 मिलों की सेहत पर नजर

उत्तर प्रदेश में 122 चीनी मिलें हैं और पेराई सत्र बस शुरू होने वाला है। सवाल वाजिब है: क्या इससे गन्ना भुगतान फंस सकता है?

ईमानदार जवाब दो हिस्सों में है। पहला, तत्काल कोई सीधा खतरा नहीं दिखता। गन्ने के मूल्य का भुगतान 14 दिन के भीतर करने का नियम बना हुआ है। चीनी के दाम मजबूत रहने से मिलों को चीनी बेचकर आय होती रहेगी। सी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाना अनुमत है, यानी डिस्टिलरी कारोबार पूरी तरह ठप नहीं होगा।

दूसरा, दबाव का पक्ष नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मिलों की एथेनॉल से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से आता था। उस रास्ते के बंद होने से मिलों की कुल आय पर असर पड़ेगा और पेराई सत्र में उनकी वित्तीय सेहत पर नजर रखनी होगी।

ध्यान रहे, 2026-27 सत्र के गन्ना मूल्य (एसएपी) की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र 2025-26 में अगेती किस्म का एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल था। मिलों की कमाई पर दबाव और एसएपी की घोषणा, दोनों आने वाले हफ्तों में गन्ना भाव की दिशा तय करेंगी।

किसान के लिए अभी की 5 जरूरी बातें

शेयर बाजार की खबर से घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना समझदारी है। गन्ना सर्वे का रिकॉर्ड, कृषक कोड, बैंक खाता और आधार लिंक की जांच कर लें। पेराई के वक्त पर्ची और तौल की रसीद संभालकर रखें, यही भुगतान के विवाद में आपका सबूत है।

भुगतान की निगरानी करना न भूलें। 14 दिन के भीतर भुगतान न आए तो अपनी सहकारी गन्ना समिति से संपर्क करें। रिकॉर्ड दुरुस्त होने पर शिकायत में देर नहीं होती। 2026-27 सत्र के एसएपी की घोषणा पर नजर रखें, यही आपके इस साल के गन्ने की कीमत तय करेगी। पेराई शुरू होने पर अपनी मिल की घोषणा और समिति के नोटिस बोर्ड पर ध्यान दें।

मुख्य बातें

  • 19 अक्टूबर को चीनी मिलों के शेयर 13% तक टूटे: विश्वराज 13% गिरकर ₹5.06, रेणुका 6.3%, बजाज 7.5%, द्वारिकेश 7%। वजह बीपीसीएल के 16 अक्टूबर वाले टेंडर में गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे पर रोक।
  • एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में लगभग 1100 करोड़ लीटर की खरीद: मक्के का दाम ₹71.86 से घटकर ₹68.86 प्रति लीटर, प्रोत्साहन ₹5.79 से घटकर ₹2.79।
  • यूपी की 122 मिलों की एथेनॉल कमाई पर दबाव, लेकिन भुगतान का 14-दिन नियम और चीनी बिक्री की आय बनी हुई है। 2026-27 एसएपी की घोषणा अभी बाकी।

स्रोत: ET Now (19 अक्टूबर 2026), Financial Express (19 अक्टूबर 2026), The Shillong Times/PTI (18 अक्टूबर 2026), NDTV (18 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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