ताज़ा ख़बर

1100 करोड़ लीटर के टेंडर में गन्ने का रस बाहर: UP किसानों के लिए क्या मतलब

✍️ Aamir Raza · 🗓 19 Oct 2026 · ⏱ 4 मिनट में पढ़ें

Google पर हमें फ़ॉलो करें
1100 करोड़ लीटर के टेंडर में गन्ने का रस बाहर: UP किसानों के लिए क्या मतलब

पश्चिमी यूपी का गन्ना किसान इस बार मिल में गन्ना डालते हुए एक ही सवाल पूछ रहा है: उसके गन्ने का रस बनेगा चीनी या जाएगा एथेनॉल में? 16 अक्टूबर को भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने जो टेंडर निकाला है, उसका जवाब सीधा है। नए आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस से बना एक भी लीटर एथेनॉल पेट्रोल में मिलाने के लिए नहीं खरीदा जाएगा। देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश और यहां की 122 चीनी मिलों के लिए यह इस पेराई सत्र की सबसे बड़ी खबर है।

टेंडर पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की ओर से BPCL ने जारी किया है। नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक चलने वाले एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद का लक्ष्य रखा गया है। इसका मकसद पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की जरूरत पूरी करना है।

टेंडर दस्तावेज़ में क्या दर्ज है

निविदा दस्तावेज में सरकार का निर्देश सीधे शब्दों में लिखा है: 2026-27 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए चीनी का डायवर्जन शून्य किया जाए। “इस मात्रा आधारित खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी या चीनी की चाशनी और बी-हेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं।”

इसके बजाय बोलियां इन स्रोतों से मांगी गई हैं: मक्का, टूटा चावल, भारतीय खाद्य निगम का अधिशेष चावल और सी-हेवी शीरा। मतलब पेट्रोल में मिलाया जाने वाला एथेनॉल इस बार लगभग पूरी तरह अनाज और सी-हेवी शीरे के भरोसे चलेगा। दो हफ्ते पहले जो रोक सिर्फ आशंका थी, वह अब कागज़ पर उतर चुकी है।

मक्का किसानों के लिए भी खबर है

टेंडर में मक्के से बने एथेनॉल की खरीद दर भी घटा दी गई है। पहले यह 71.86 रुपये प्रति लीटर थी, अब 68.86 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। प्रोत्साहन राशि 5.79 रुपये से घटकर 2.79 रुपये प्रति लीटर रह गई है।

जो किसान मक्का बेचकर एथेनॉल आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े थे, उनकी कमाई पर इसका सीधा असर पड़ेगा। सरकार का संकेत साफ है: एथेनॉल तो बनेगा, लेकिन सस्ते अनाज से, महंगे शीरे से नहीं।

सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा

वजह घरेलू चीनी की उपलब्धता है। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश की वजह से उत्पादन घटने का खतरा बन गया है। सरकार पहले से ही निर्यात पर रोक और स्टॉक सीमा जैसे कदम उठा चुकी है।

सीधे शब्दों में कहें तो सरकार नहीं चाहती कि चीनी के भंडार खाली हों और रसोई में चीनी महंगी हो। जब उत्पादन कम होने की आशंका हो, तो गन्ने का रस ईंधन में झोंकना सरकार को मंजूर नहीं। इसलिए पूरे आपूर्ति वर्ष के लिए गन्ना आधारित एथेनॉल का रास्ता बंद कर दिया गया।

UP के गन्ना किसान पर इसका असर

उत्तर प्रदेश की 122 मिलों के लिए इसका मतलब साफ है: पूरा गन्ना चीनी बनेगी। चीनी सत्र 2026-27 में मिलों को अपनी पेराई योजना सिर्फ चीनी उत्पादन को ध्यान में रखकर बनानी होगी। बी-हेवी शीरे का रास्ता बंद है, लेकिन सी-हेवी शीरे से बना एथेनॉल अभी भी खरीदा जाएगा, इसलिए मिलों की डिस्टलरी पूरी तरह खाली नहीं बैठेंगी।

किसान के लिहाज से दो बातें ध्यान देने लायक हैं। पहली, मिलों की पूरी कमाई अब चीनी की बिक्री से होगी। चीनी के भाव घरेलू बाजार में ऊंचे चल रहे हैं, इसलिए मिलों की नकदी स्थिति सुधर सकती है। नकदी सुधरी तो गन्ना भुगतान में तेजी की उम्मीद बंधती है, जो हर साल का सबसे बड़ा सवाल होता है।

दूसरी बात, यह फैसला पूरे सत्र के लिए है, सिर्फ एक-दो महीने के लिए नहीं। अक्टूबर 2027 तक गन्ने का रस एथेनॉल में नहीं जाएगा। यानी मिल प्रबंधन और किसान दोनों को लंबे समय तक एक ही व्यवस्था के हिसाब से योजना बनानी है। पर्ची, तौल और सट्टे की व्यवस्था पर इसका कोई सीधा असर नहीं है, लेकिन मिल की कुल आमदनी का गणित बदल गया है।

पेट्रोल में मिलावट जारी रहेगी

एक सवाल यह भी उठ सकता है कि क्या पेट्रोल में एथेनॉल मिलना बंद हो जाएगा? जवाब है नहीं। मक्का, टूटा चावल और FCI के अधिशेष चावल से बने एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी। बीते आपूर्ति वर्ष में कुल जरूरत का 74 प्रतिशत एथेनॉल पहले ही अनाज से बना था, जबकि गन्ना आधारित स्रोतों से सिर्फ 26 प्रतिशत आया था। यानी एथेनॉल का बड़ा खेल पहले से ही अनाज के सहारे चल रहा था, अब वह पूरी तरह अनाज आधारित हो जाएगा।

मुख्य बातें

  • BPCL ने 16 अक्टूबर को 2026-27 आपूर्ति वर्ष के लिए 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीद का टेंडर जारी किया।
  • गन्ने के रस, चीनी, सिरप और बी-हेवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए कोई बोली नहीं मांगी गई; चीनी का डायवर्जन शून्य होगा।
  • मक्का एथेनॉल की खरीद दर 71.86 से घटकर 68.86 रुपये प्रति लीटर, प्रोत्साहन 5.79 से घटकर 2.79 रुपये।

स्रोत: पीटीआई/एनडीटीवी (18 अक्टूबर 2026), मिंट (18 अक्टूबर 2026), अमर उजाला (19 अक्टूबर 2026)

#गन्ना #एथेनॉल टेंडर #बीपीसीएल #चीनी मिल #गन्ना भुगतान #चीनी सत्र 2026-27

Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

और पढ़ें

बिना कर्ज लिए 20 हजार किसान दिवालिया की कगार पर, सिंभावली का 148 करोड़ वाला सच ताज़ा ख़बर बिना कर्ज लिए 20 हजार किसान दिवालिया की कगार पर, सिंभावली का 148 करोड़ वाला सच हापुड़ की सिंभावली शुगर मिल से जुड़े किसानों पर 148.59 करोड़ के पुराने कर्ज का बोझ बढ़कर 300 करोड़ से ज्यादा हो गया है। सीबीआई जांच के बाद भी मामला हाईकोर्ट में लंबित है और 20 हजार से ज्यादा किसान डिफॉल्टर माने जाने की कगार पर हैं। मेरठ के 2.22 लाख किसानों के लिए खुशखबरी: 1 नवंबर से चलेंगी 6 चीनी मिलें ताज़ा ख़बर मेरठ के 2.22 लाख किसानों के लिए खुशखबरी: 1 नवंबर से चलेंगी 6 चीनी मिलें मेरठ जिले की छह चीनी मिलें 1 से 4 नवंबर के बीच पेराई सत्र 2026-27 शुरू करेंगी। किनौनी मिल 1 नवंबर को चलेगी, मवाना, नंगलामल और दौराला 2 नवंबर को, मोहिउद्दीनपुर और सकौती 4 नवंबर को। बेलगावी बैठक बेनतीजा: ₹5500 की मांग अटकी, 29 अक्टूबर को दिल्ली की समिति तय करेगी रास्ता ताज़ा ख़बर बेलगावी बैठक बेनतीजा: ₹5500 की मांग अटकी, 29 अक्टूबर को दिल्ली की समिति तय करेगी रास्ता कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की बेलगावी में किसान नेताओं और मिल मालिकों से हुई बैठक बिना फैसले के खत्म हुई। गन्ने के ₹5500 प्रति टन दाम की मांग अब 29 अक्टूबर को आने वाली केंद्रीय समिति के सामने रखी जाएगी।