एथेनॉल से तेज होगा गन्ना भुगतान? छाता में ₹200 करोड़ प्लांट को मंजूरी

15 सितंबर को लखनऊ में हुई योगी कैबिनेट की बैठक में एक ऐसा फैसला हुआ, जिसकी गूंज सीधे गन्ना किसानों की जेब तक जाएगी। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में 23 प्रस्तावों को मंजूरी मिली, और उनमें सबसे अहम था मथुरा की छाता चीनी मिल में एथेनॉल प्लांट लगाने का प्रस्ताव। 19 साल से बंद पड़ी यह मिल अब फ्यूल बनाने के काम आएगी।
छाता में क्या-क्या बनेगा
गन्ना विकास मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण ने बैठक के बाद बताया कि छाता चीनी मिल परिसर में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट हर साल 3.96 करोड़ लीटर एथेनॉल बनाएगा। परियोजना की लागत ₹200 करोड़ से ज्यादा आंकी गई है। खास बात यह है कि प्लांट साल में 11 महीने चलेगा। गन्ने की पेराई के सीजन में गन्ने से एथेनॉल बनेगा, और जब गन्ना उपलब्ध नहीं होगा तो मक्का और धान से उत्पादन होगा।
मिल के पास 96 एकड़ जमीन उपलब्ध है, जहां वेयरहाउस और अन्य सुविधाएं भी बनेंगी। मंत्री के मुताबिक परियोजना से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, और इसका शिलान्यास इस साल के अंत तक मुख्यमंत्री द्वारा होने की संभावना है।
गन्ना भुगतान से क्या नाता है
छाता क्षेत्र में गन्ने की उपलब्धता अभी मिल की क्षमता के हिसाब से कम है। इसलिए सरकार ने पहले एथेनॉल प्लांट लगाने का रास्ता चुना है। मंत्री का कहना है कि जब क्षेत्र में गन्ना रकबा बढ़ेगा, तो चीनी मिल का संचालन भी शुरू किया जाएगा। इलाके में पिछले दो साल से तीन गन्ना क्रय केंद्र पहले से चल रहे हैं।
सवाल यह है कि इससे किसान को क्या मिलेगा? एथेनॉल से मिल की कमाई का एक नया रास्ता खुलता है। चीनी के दाम में उतार-चढ़ाव के भरोसे न रहकर मिल साल के ज्यादातर समय उत्पादन करेगी। जब मिल की जेब भरी रहेगी, तो किसानों का बकाया चुकाना उसके लिए आसान होगा। यही वजह है कि एथेनॉल विस्तार को गन्ना भुगतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
पिपराइच: गोरखपुर के किसानों को भी उम्मीद
पूर्वांचल की तरफ भी खबर अच्छी है। गोरखपुर की पिपराइच चीनी मिल में 120 KLPD क्षमता की डिस्टिलरी लगाने का प्रस्ताव है, जिसके लिए 2026-27 के राज्य बजट में ₹25 करोड़ का प्रावधान रखा गया है। रिपोर्टों के मुताबिक इस डिस्टिलरी से गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनेगा और इसका मकसद किसानों को तेज भुगतान सुनिश्चित करना है।
पिपराइच मिल का ट्रैक रिकॉर्ड भी उत्साहजनक है। चालू पेराई सत्र में मिल ने रिकॉर्ड पेराई की है और किसानों के ₹139 करोड़ के बकाये का 93 प्रतिशत हिस्सा पहले ही चुका दिया है। ऐसे में डिस्टिलरी से मिलने वाली अतिरिक्त आमदनी भुगतान की रफ्तार को और तेज कर सकती है।
यूपी: देश का एथेनॉल हब बनने की राह पर
एक नजर बड़े पैमाने पर डालें तो उत्तर प्रदेश एथेनॉल के मामले में देश में सबसे आगे चल रहा है। राज्य की वार्षिक एथेनॉल उत्पादन क्षमता 2017 के करीब 42 करोड़ लीटर से बढ़कर 2025-26 में 175 करोड़ लीटर से ज्यादा हो गई है। 40 से अधिक चीनी मिलों में अब एथेनॉल डिस्टिलरी लगी हुई है या लगाई जा रही है। नवंबर 2025 तक राज्य में करीब 182 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन भी दर्ज किया जा चुका है।
सरकारी आकलन के मुताबिक एथेनॉल में विविधीकरण से चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। चीनी के दाम पर निर्भरता कम हुई है और आमदनी का एक स्थायी स्रोत बना है। इसका सीधा असर गन्ना किसानों के भुगतान की समयबद्धता पर पड़ता है।
किसान के लिए इसका मतलब
मोटे तौर पर बात साफ है। मिलें सिर्फ चीनी बेचने पर निर्भर नहीं रहेंगी। एथेनॉल, बिजली और अन्य उत्पादों से सालभर कमाई होगी तो पर्ची के बाद पैसा अटकने की शिकायतें कम होनी चाहिए। लेकिन किसान संगठनों की एक मांग को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। छाता इलाके के किसानों की मांग रही है कि बंद चीनी मिल को चीनी मिल के तौर पर ही चलाया जाए। सरकार ने कहा है कि गन्ना उपलब्धता बढ़ने पर यह चरण आएगा। किसान को फिलहाल शिलान्यास और काम शुरू होने की तारीख पर नजर रखनी चाहिए।
मुख्य बातें
- योगी कैबिनेट ने 15 सितंबर को छाता (मथुरा) की 19 साल से बंद चीनी मिल में ₹200 करोड़ से ज्यादा के एथेनॉल प्लांट को मंजूरी दी; 3.96 करोड़ लीटर वार्षिक क्षमता, साल में 11 महीने चलेगा।
- पिपराइच (गोरखपुर) में 120 KLPD डिस्टिलरी के लिए 2026-27 बजट में ₹25 करोड़ का प्रावधान; तेज भुगतान का लक्ष्य।
- यूपी की एथेनॉल क्षमता 42 करोड़ लीटर (2017) से बढ़कर 175 करोड़ लीटर से ज्यादा; एथेनॉल आमदनी से मिलों की वित्तीय हालत सुधरने पर गन्ना बकाया समय पर मिलने की उम्मीद।
स्रोत: द स्टेट्समैन (15-09-2026), मनीकंट्रोल/PTI (15-09-2026), फ्री प्रेस जर्नल (16-09-2026), चीनीमंडी, एग्रीइनसाइट, न्यूज24 ऑनलाइन।
