इथेनॉल से ₹1,40,000 करोड़ का दावा, पर शामली के किसान का भुगतान 9 महीने लेट क्यों?

27 अक्टूबर को दक्षिण गोवा में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि E20 पेट्रोल से देश को ₹1,60,000 करोड़ की बचत हुई, और इसमें से ₹1,40,000 करोड़ किसानों को वापस मिले। सवाल सिर्फ इतना है कि यह रकम खेत तक पहुंची भी या नहीं।
शामली जिले के गन्ना किसान कपिल खतियान की कहानी इस दावे से टकराती है। उनके परिवार के पास करीब 17 एकड़ जमीन है। 1996 से वे हर साल 1,000 से 1,500 क्विंटल गन्ना नजदीकी मिल को दे रहे हैं। जब 2018 के बाद इथेनॉल की नीति आई, तो उन्हें लगा कि गन्ने की मांग और दाम दोनों सुधरेंगे। मिल ने इथेनॉल प्लांट भी लगाया। मगर भुगतान की रफ्तार नहीं बदली।
9 महीने, फिर 5 महीने: भुगतान का हिसाब
पिछले पेराई सत्र की कहानी सबसे साफ है। सत्र अप्रैल में खत्म हुआ, भुगतान जनवरी में मिला। यानी करीब 9 महीने की देरी। इस बार हालत कुछ सुधरी, लेकिन बहुत नहीं। सत्र खत्म होने के बाद भुगतान सितंबर में मिला, यानी करीब 5 महीने बाद। मिल के एक अधिकारी ने खुद माना कि इथेनॉल बेचने से मिली कमाई को भुगतान में लगाने से देरी कुछ कम हुई है। मतलब, इथेनॉल की कमाई से किसान को फायदा तब हुआ जब वह भुगतान की लाइन में खड़ा था, दाम की लाइन में नहीं।
कानून की किताब में यह देरी जायज नहीं है। मिल को गन्ना लेने के 14 दिन के भीतर भुगतान करना होता है। देरी पर 15 प्रतिशत सालाना ब्याज का नियम है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिसंबर 2021 में यही व्यवस्था दोहराई थी, और सुप्रीम कोर्ट ने 6 अक्टूबर 2026 के आदेश में राज्य सरकार की चुनौती खारिज करते हुए 14 दिन और 15 प्रतिशत ब्याज को किसानों के लिए अनिवार्य सुरक्षा बताया था। इसके बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि फरवरी 2026 तक उत्तर प्रदेश में 121 मिलों पर किसानों का करीब ₹3,300 करोड़ बकाया था।
गन्ने से नहीं, अनाज से बन रहा ज्यादातर इथेनॉल
इथेनॉल की कहानी में एक और पेंच है। अगस्त 2026 तक देश में 895 करोड़ लीटर इथेनॉल बना, जिसमें से करीब 70 प्रतिशत अनाज, मुख्य रूप से मक्का, से बना। गन्ने का हिस्सा बाकी 30 प्रतिशत में सिमट गया।
कीमत का फर्क भी इसी तरफ इशारा करता है। जुलाई में लोकसभा में दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक तेल कंपनियां मक्के से बने इथेनॉल के लिए ₹71.86 प्रति लीटर दे रही थीं, जबकि गन्ने से बने इथेनॉल के लिए ₹65.61 प्रति लीटर। जब अनाज से ज्यादा कमाई हो, तो मिल अनाज की तरफ ही जाएगी। शामली की मिल ने भी यही किया। इथेनॉल प्लांट लगने के बाद से उसने इथेनॉल के लिए अनाज का इस्तेमाल किया, और किसानों का गन्ना चीनी बनाने में गया। किसान की शिकायत सीधी है। उसके गन्ने से इथेनॉल नहीं बना, तो इथेनॉल की कमाई में उसका हिस्सा कहां से आएगा।
बाजार में इथेनॉल की भरमार, फिर भी किसान को राहत नहीं
16 अक्टूबर को सरकार ने एक और फैसला लिया। तेल कंपनियां 2026-27 में गन्ने के रस, सिरप और कुछ तरह के शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। साथ ही मक्के से बने इथेनॉल का खरीद मूल्य ₹71.86 से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर कर दिया गया। मकसद चीनी की घरेलू आपूर्ति बचाना बताया गया। मगर इससे गन्ने से इथेनॉल का रास्ता और सिकुड़ गया है।
इसका पुराना इलाज 2012 की रंगराजन समिति की रिपोर्ट में दर्ज है। समिति ने कहा था कि चीनी और उसके तीन प्रमुख उप-उत्पादों, खोई, शीरा और प्रेसमड, से मिलने वाली कीमत का 70 प्रतिशत किसानों को मिलना चाहिए। महाराष्ट्र और तमिलनाडु ने यह फार्मूला अपनाया भी, लेकिन जमीन पर वह ज्यादातर कागज पर ही रहा।
यूपी के किसान के लिए इसका मतलब क्या है
2025-26 सत्र में यूपी का SAP ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था। 2026-27 सत्र के लिए SAP की घोषणा का इंतजार अभी जारी है, और पेराई शुरू हो चुकी है। ऐसे में इथेनॉल की कमाई किसान के काम तभी आएगी जब वह समय पर भुगतान और सही दाम में बदले। वरना E20 की बचत का आंकड़ा भाषण में अच्छा लगेगा, खेत में नहीं।
किसान के पास इस वक्त तीन चीजें देखने लायक हैं। पहली, पर्ची मिलने के 14 दिन के भीतर भुगतान आया या नहीं, और देरी पर 15 प्रतिशत ब्याज का हिसाब मांगा गया या नहीं। दूसरी, रमेश चंद समिति की सिफारिशें, जो चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य, तौल और रिकवरी जांच की पारदर्शिता पर विचार कर रही है। तीसरी, अपनी मिल का भुगतान रिकॉर्ड ई-गन्ना ऐप और समिति से जांचते रहना। देरी दिखे तो जिला गन्ना अधिकारी से शिकायत करें। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 और 1800-180-5129 पर भी मदद मिलती है, और एसएमएस के लिए 51969 नंबर है।
इथेनॉल की नीति गलत नहीं है। गलती वहां है जहां उसकी कमाई किसान तक पहुंचने से पहले ही रुक जाती है। जब तक भुगतान 14 दिन में नहीं होगा, तब तक किसान के लिए इथेनॉल सिर्फ मिल की एक और कमाई का जरिया रहेगा, अपनी कमाई का नहीं।
मुख्य बातें
- मंत्री का दावा: E20 से ₹1,60,000 करोड़ की बचत, ₹1,40,000 करोड़ किसानों को मिले।
- शामली के किसान को पिछले सत्र का भुगतान 9 महीने देर से, इस बार 5 महीने देर से मिला।
- अगस्त 2026 तक बने 895 करोड़ लीटर इथेनॉल में करीब 70 प्रतिशत अनाज से बना, गन्ने से नहीं।
स्रोत: Scroll (28 अक्टूबर 2026), PTI/Business Standard (27 अक्टूबर 2026), The Times of India (Scroll की रिपोर्ट में उद्धृत)
