5 मिनट में बिक गया नई किस्म का बीज: मिठास मेले में मिलेगा चूकने वालों को अगला मौका

शुक्रवार 9 अक्टूबर को सुबह 10 बजे जो किसान अपने मोबाइल पर गन्ना विभाग के पोर्टल enquiry.caneup.in को खोलकर बैठे थे, उन्हें अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। नई अगेती गन्ना किस्म को.शा. 23232 के बीज की बुकिंग खुलते ही स्क्रीन पर आवेदन आने लगे, और दस बजकर पांच मिनट होते-होते वितरण के लिए रखा गया पूरा स्टॉक समाप्त हो गया। दो लाख सिंगल बड। महज पांच मिनट में। हिंदुस्तान और रूरल वॉयस की रिपोर्ट के मुताबिक इतनी बड़ी संख्या में किसान पोर्टल पर आए कि पहले आओ, पहले पाओ के नियम से बहुत से किसान वंचित रह गए।
सवाल यह है कि इस किस्म के बीज के पीछे इतनी मारामारी क्यों है? और अगर आप उन किसानों में हैं जो बुकिंग से चूक गए, तो अब अगला मौका कहां है?
परिषद ने पहली बार किया ऐसा काम
उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर के निदेशक अभिषेक आनंद ने हिंदुस्तान को बताया है कि यह पहली बार हो रहा है जब परिषद की ओर से विकसित किसी नई गन्ना किस्म का बीज उसके अवमुक्त होने के एक माह के भीतर किसानों को उपलब्ध कराया जा रहा है। को.शा. 23232 को सितंबर 2026 में ही प्रदेश में खेती के लिए जारी किया गया था, यानी किस्म जारी होने के कुछ सप्ताह के भीतर ही उसका बीज किसानों तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई।
परिषद ने इस वर्ष मिनी सीड किट योजना के तहत दो नई किस्मों के सिंगल बड देने का ऐलान किया था। को.शा. 23232 के 2 लाख सिंगल बड और को.शा. 19231 के 1 लाख सिंगल बड। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार कुल 3,000 किट तैयार की गई हैं। इनमें को.शा. 23232 की 2,000 और को.शा. 19231 की 1,000 किट शामिल हैं। हर किट में 100 बड रखे गए हैं और एक किट की कीमत 200 रुपये रखी गई है। बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन थी और एक किसान अपने कृषक कोड से सिर्फ एक ही किट बुक करा सकता था।
को.0238 का विकल्प तलाश रहे किसान
किस्म के जनक और परिषद के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार को.शा. 23232 तेजी से बढ़ने वाली अगेती किस्म है। उन्होंने बताया कि इसमें जमाव, कल्लों की संख्या, मिल योग्य गन्नों की संख्या, उपज क्षमता और शर्करा प्रतिशत सभी बेहतर हैं। डॉ. कुमार ने उम्मीद जताई है कि यह किस्म प्रदेश में प्रचलित को.0238 का उपयोगी विकल्प साबित हो सकती है।
को.0238 लंबे समय से यूपी का सबसे लोकप्रिय किस्म रहा है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में इसमें लाल सड़न रोग का प्रकोप भारी पड़ा है। इसी वजह से किसान एक ऐसी अगेती किस्म तलाश रहे हैं जो लाल सड़न का मुकाबला कर सके और ज्यादा शर्करा भी दे। रूरल वॉयस की रिपोर्ट के मुताबिक परिषद को उम्मीद है कि को.शा. 23232 बेहतर उपज और शर्करा प्रतिशत के साथ को.0238 का विकल्प बन सकती है। पांच मिनट में दो लाख बड का बुक हो जाना इस उम्मीद की पुष्टि करता है।
बुकिंग करा चुके किसानों के लिए अगला कदम
जिन किसानों ने 9 अक्टूबर को बुकिंग कराई, उन्हें बुकिंग के समय मिला चार अंकों का पंजीकरण नंबर संभालकर रखना होगा। बीज वितरण अक्टूबर में होने वाले मिठास मेला-2026 के दौरान किया जाएगा। किसानों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर किट वितरण की तारीख एसएमएस से भेजी जाएगी। तय तारीख पर किसान को संबंधित संस्थान पहुंचकर किट स्वयं लेनी होगी। चीनीमंडी की रिपोर्ट के अनुसार, वितरण के समय पंजीकरण नंबर और आधार कार्ड की मूल प्रति दिखानी होगी, दस्तावेजों के सत्यापन के बाद टोकन मिलेगा और फिर निर्धारित काउंटर से किट दी जाएगी।
चूकने वाले किसानों के लिए क्या तैयारी है
जिन किसानों को बीज नहीं मिला, उनके लिए भी रास्ता बंद नहीं हुआ है। परिषद के निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि नई किस्म का बीज तेजी से बढ़ाने के लिए सिंगल बड और टिशू कल्चर जैसी आधुनिक तकनीकों से संवर्धन किया जा रहा है। लक्ष्य है कि आगामी बुवाई सत्र में अधिक से अधिक किसानों को इस किस्म का बीज मिल सके। नारद संवाद की रिपोर्ट के मुताबिक, परिषद अब बीज गुणन के प्रयास तेज कर रही है और अक्टूबर में होने वाले किसान मेलों के माध्यम से शुरुआती बुकिंग से वंचित किसानों तक मिनी सीड किट पहुंचाई जाएंगी।
किसानों के लिए इसका मतलब साफ है। पहली खेप सिर्फ शुरुआत थी। जिन्हें बीज नहीं मिला, वे अपने क्षेत्र के गन्ना कार्यालय या जिला गन्ना अधिकारी से नई किस्म के बीज की उपलब्धता पर नजर रखें। मिठास मेला-2026 की तारीख और बीज वितरण की जानकारी परिषद एसएमएस और अन्य माध्यमों से देगी।
मुख्य बातें
- 9 अक्टूबर को enquiry.caneup.in पर खुली बुकिंग में को.शा. 23232 के 2 लाख सिंगल बड 5 मिनट में बुक हो गए।
- कुल 3,000 मिनी सीड किट में 23232 की 2,000 और 19231 की 1,000 किट शामिल, कीमत 200 रुपये प्रति किट।
- बीज वितरण मिठास मेला-2026 में होगा, किसानों को तारीख एसएमएस से मिलेगी; आधार कार्ड और पंजीकरण नंबर साथ ले जाना होगा।
स्रोत: हिंदुस्तान (शाहजहांपुर, 10 अक्टूबर 2026), रूरल वॉयस (10 अक्टूबर 2026), एबीपी लाइव (8 अक्टूबर 2026)
