मंत्री बोले: मिलें चीनी ₹31 से ऊपर बेच रहीं, फिर ₹60 MSP की मांग क्यों? CM बेलगावी जाएंगे

“अगर चीनी मिलें ₹31 से ऊपर, ₹49-50 प्रति किलो में चीनी बेच रही हैं, तो ₹60 MSP की मांग क्यों?” कर्नाटक के गन्ना किसानों के आंदोलन के बीच केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार (17 अक्टूबर) को किसानों के सबसे बड़े नारे पर ही तीखा सवाल खड़ा कर दिया। उनका तर्क सुनने लायक है, क्योंकि यहीं वह उलझन है जो सालों से किसानों को परेशान करती आ रही है।
उसी दिन दूसरी बड़ी खबर आई। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने पत्रकारों से कहा कि वह खुद बेलगावी जाकर आंदोलन कर रहे गन्ना किसानों से मिलेंगे। उनकी दिक्कतें समझेंगे और संभव सहायता पर विचार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ कर्नाटक की समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह करीब दोपहर 3:30 बजे तक बेलगावी पहुंच जाएंगे।
MSP का असली मतलब, जो मंत्री ने समझाया
बहुत से किसान MSP को समर्थन मूल्य समझते हैं। जोशी ने इस भ्रम को साफ किया। उनके शब्दों में: MSP का मतलब “मिनिमम सपोर्ट प्राइस” नहीं है। यह चीनी का “मिनिमम सेलिंग प्राइस” है। यानी वह न्यूनतम दर, जिससे नीचे चीनी मिलें चीनी नहीं बेच सकतीं। यह मिलों के लिए फ्लोर प्राइस है, किसान का भाव नहीं।
किसान का भाव है एफआरपी। केंद्र ने 2026-27 सत्र के लिए गन्ने का एफआरपी ₹3,650 प्रति टन (₹365 प्रति क्विंटल, 10.25 प्रतिशत रिकवरी पर) तय किया है। जोशी ने आगे राज्य सरकार की जिम्मेदारी भी उठाई। उनके मुताबिक केंद्र किसी राज्य को SAP घोषित करने से नहीं रोकता। पांच राज्यों ने SAP दिया है, लेकिन कर्नाटक ने नहीं।
यहां एक मोड़ भी है। कर्नाटक के किसान संगठन अब खुद उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार की तर्ज पर SAP की मांग कर रहे हैं। यानी जिस व्यवस्था को यूपी में किसान अपना हक मानते हैं, उसी की मांग अब दक्षिण में भी उठ रही है।
आंदोलन इस वक्त कहां खड़ा है
आंदोलन की शुरुआत मंगलवार (13 अक्टूबर) को बेलगावी से हुई। बुधवार तक यह गोकाक, मुदलगी, गुरलापुर और मुन्नोली तक फैल गया। जगह-जगह रास्ता रोको हुआ। बेलगावी-हुबली हाईवे पर करीब 32 घंटे जाम रहा। गुरुवार को हजारों किसानों ने हट्टर्गी टोल प्लाजा से हुबली की ओर पैदल मार्च शुरू किया। लक्ष्य है केंद्रीय मंत्री जोशी के हुबली आवास के सामने प्रदर्शन। पहले 25 किलोमीटर में ही यात्री सुवर्ण विधान सौध तक पहुंच गए।
मांगें दोहराई जा चुकी हैं, पर लिस्ट साफ है। गन्ने का मूल्य ₹5,500 प्रति टन। चीनी का MSP ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो। मिलों में तौल और रिकवरी मापन में पारदर्शिता। फैक्ट्रियों से बने एथनॉल की पूरी खरीद, बिना किसी शर्त के। और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना।
महाराष्ट्र में भी 2026-27 पेराई सत्र शुरू होते ही किसानों का आंदोलन तेज हुआ है। वहां भी चीनी के MSP में संशोधन और गन्ने के मूल्य बढ़ाने की मांग उठ रही है।
रमेश चंद समिति क्या करेगी
आंदोलन के दबाव के बीच केंद्र ने बुधवार (14 अक्टूबर) को एक समिति गठित की है। अध्यक्ष हैं पूर्व नीति आयोग सदस्य प्रो. रमेश चंद। इसमें कृषि आयुक्त, चीनी संयुक्त सचिव और विधिक माप विज्ञान के संयुक्त सचिव शामिल हैं।
यह समिति 12 अक्टूबर को पूसा परिसर में हुई बैठक के बाद बनी। उस बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी और कर्नाटक-महाराष्ट्र के करीब 80-90 किसान प्रतिनिधि शामिल हुए थे। समिति गन्ना किसानों के पारिश्रमिक भुगतान, एक्स-मिल MSP संशोधन, रिकवरी जांच व्यवस्था, मिलों में तौल और मशीन से कटाई पर वजन कटौती जैसे मुद्दों पर विचार करेगी। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, मिल संघों, राज्य सरकारों और विशेषज्ञों से चर्चा के बाद रिपोर्ट “जल्द से जल्द” सौंपने को कहा गया है।
यूपी के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
यह खबर उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए इसलिए अहम है, क्योंकि यहां का SAP अब पूरे देश में मॉडल की तरह देखा जा रहा है। कर्नाटक के किसान यूपी की तर्ज पर SAP मांग रहे हैं। यानी वह व्यवस्था जिसकी लड़ाई यूपी के किसान सालों से लड़ते आए हैं, आज दूसरी मंडियों में भी उदाहरण बन रही है।
उत्तर प्रदेश में 2025-26 सत्र का SAP अगेती गन्ने के लिए ₹400 प्रति क्विंटल था। 2026-27 सत्र की SAP घोषणा अभी बाकी है। यूपी में 122 चीनी मिलें हैं, जो देश में सबसे ज्यादा हैं। पेराई सत्र से पहले तीन बातें याद रखें। मिल में गन्ना देते समय वजन पर्ची संभालकर रखें। e-Ganna ऐप या enquiry.caneup.in पर अपना सट्टा और परची कैलेंडर जांच लें। तौल या भुगतान में गड़बड़ी पर टोल-फ्री 1800-121-3203 या 1800-180-5129 पर शिकायत करें।
मुख्य बातें
- केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी: चीनी का MSP किसानों का समर्थन मूल्य नहीं, मिलों के लिए फ्लोर प्राइस है; मिलें ₹31 के बजाय ₹49-50 में बेच रही हैं
- CM डीके शिवकुमार बेलगावी जाकर आंदोलनकारी किसानों से मिलेंगे; इसे राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बताया
- रमेश चंद समिति (14 अक्टूबर) FRP, MSP, तौल और रिकवरी पर “जल्द से जल्द” रिपोर्ट देगी; कर्नाटक के किसान यूपी-तर्ज पर SAP मांग रहे हैं
स्रोत: एएनआई (एशियानेट न्यूज़ेबल, आवाज़ द वॉयस, डेवडिस्कोर्स), 17 अक्टूबर 2026; द हिंदू बिज़नेसलाइन, 17 अक्टूबर 2026; द इकोनॉमिक टाइम्स, 14 अक्टूबर 2026; डेक्कन हेराल्ड, 15 अक्टूबर 2026; द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 15 अक्टूबर 2026।
