13 अक्टूबर से हाईवे जाम: दिल्ली बैठक बेनतीजा, अब ₹60/किलो चीनी की मांग

मंगलवार, 13 अक्टूबर की सुबह 11 बजे। कर्नाटक के किसान संगठनों ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर जाम की घोषणा कर दी है। इसकी वजह साफ है: 12 अक्टूबर को दिल्ली में हुई बैठक हाथ खाली लौटी। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ तीन घंटे चली बैठक में किसानों की मांगों पर कोई फैसला नहीं हुआ।
स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने कोल्हापुर से सीधे कहा है कि महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा के कोगनोली टोल प्लाजा पर अनिश्चितकालीन हाईवे जाम 13 अक्टूबर से शुरू होगा। कर्नाटक में तो कर्नाटक राज्य रायथा संघ और हसीरू सेना ने राज्य के हर जिले में हाईवे रोकने का ऐलान किया है।
दिल्ली की बैठक में क्या हुआ
बैठक सोमवार शाम दिल्ली में हुई। किसान प्रतिनिधिमंडल में राजू शेट्टी समेत कई किसान नेता शामिल थे। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ तीन घंटे तक चर्चा चली, लेकिन नतीजा शून्य।
पुणे पल्स की 13 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने मुद्दों पर विचार के लिए एक समिति बनाने का आश्वासन दिया है, जो एक महीने के भीतर सिफारिश देगी। किसान नेता इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हुए। बैठक के बाद शेट्टी ने कहा कि सरकार साल-दर-साल FRP बढ़ाती है, लेकिन खाद, कीटनाशक, मजदूरी, कटाई और ढुलाई की बढ़ती लागत को ध्यान में नहीं रखती। किसान संगठनों ने साफ कर दिया है कि जब तक ठोस फैसला नहीं आता, आंदोलन जारी रहेगा।
किसानों की बड़ी मांगें
आंदोलन की मांगें सिर्फ गन्ना भाव तक सीमित नहीं हैं। सबसे बड़ी मांग चीनी के न्यूनतम विक्रय मूल्य (MSP) की है। चीनी का MSP फरवरी 2019 से ₹31 प्रति किलो पर टिका हुआ है। महाराष्ट्र के किसान इसे बढ़ाकर ₹50 प्रति किलो करने की मांग कर रहे हैं, जबकि कर्नाटक के किसान नेता चुनप्पा पुजेरी ने ₹60 प्रति किलो की मांग रखी है। उनका तर्क है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी ₹55 प्रति किलो तक पहुंच गई है, तो किसानों को बेहतर दाम क्यों नहीं मिले?
इसके अलावा किसानों ने मांग रखी है कि सीजन में जल्दी पेराई शुरू करने वाली मिलों को ₹500 प्रति टन की सब्सिडी मिले, ताकि जल्दी कटाई और ढुलाई में होने वाले चीनी-रिकवरी के नुकसान की भरपाई हो सके। चीनी फैक्ट्रियों के पूरे इथेनॉल उत्पादन की सरकारी खरीद की मांग भी उठी है।
गन्ने का भाव भी केंद्र में है। कर्नाटक में ₹5,500 प्रति टन यानी ₹550 प्रति क्विंटल की मांग चल रही है। कर्नाटक के किसानों ने UP, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और बिहार की तर्ज पर FRP के ऊपर अलग से राज्य सलाहकारी मूल्य (SAP) की मांग भी की है। सूखे से जूझ रहे कर्नाटक में किसानों की माली हालत खराब है, और सितंबर 29 से हुब्बल्ली में धरना भी चल रहा है।
उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
कर्नाटक और महाराष्ट्र देश के दूसरे और तीसरे सबसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्य हैं। उत्तर प्रदेश नंबर एक है। इन राज्यों का आंदोलन UP के किसानों से सीधे जुड़ा है, और वो भी दो वजहों से।
पहली वजह: चीनी का भाव। अगर चीनी का MSP बढ़ता है, तो पूरे देश में चीनी का दाम-ढांचा सुधरेगा। इसका सीधा फायदा UP की मिलों और किसानों को मिलेगा, क्योंकि चीनी महंगी बिकी तो मिलों की भुगतान-क्षमता भी बढ़ेगी।
दूसरी वजह: भाव का पैमाना। कर्नाटक में ₹550 प्रति क्विंटल की मांग के सामने UP में 2025-26 का SAP ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) और ₹390 प्रति क्विंटल (सामान्य) रहा है, और 2026-27 का SAP अभी घोषित होना बाकी है। वहीं केंद्र ने 2026-27 सीजन के लिए FRP ₹365 प्रति क्विंटल तय किया है। अगर महाराष्ट्र-कर्नाटक में किसान बड़ी बढ़त हासिल करते हैं, तो UP में भी गन्ना भाव बढ़ाने का दबाव तेज होगा। पश्चिमी UP में 20 अक्टूबर के आसपास पेराई शुरू होने की उम्मीद है, ऐसे में ये आंदोलन समय से पहले गर्म हो रहा है।
मुख्य बातें
- 12 अक्टूबर को दिल्ली में हुई तीन घंटे की बैठक में कोई फैसला नहीं हुआ; केंद्र ने समिति बनाने का आश्वासन दिया
- 13 अक्टूबर से कर्नाटक के सभी जिलों में हाईवे जाम, कोगनोली टोल प्लाजा पर अनिश्चितकालीन जाम का ऐलान
- चीनी MSP ₹31/किलो से बढ़ाकर ₹50-₹60/किलो, गन्ना ₹5,500/टन और ₹500/टन सब्सिडी की मांग
स्रोत: AgriInsite, Deccan Herald, Pune Pulse (13 अक्टूबर 2026)
