धाराशिव का बड़ा फैसला: 30% गन्ना अब पशुओं के चारे के लिए आरक्षित

सूखे की मार झेल रहे महाराष्ट्र के धाराशिव जिले में पशुओं के चारे को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिला प्रशासन ने आगामी पेराई सत्र से पहले जिले की सभी चीनी मिलों को निर्देश दिया है कि वे कुल गन्ना क्षेत्र का 30 प्रतिशत हिस्सा पशुओं के चारे के लिए आरक्षित रखें। मतलब यह कि गन्ने की एक तय मात्रा अब सीधे मिल के कोल्हू में नहीं जाएगी, बल्कि सूखे में पशुओं का पेट भरने के काम आएगी।
यह आदेश 24 अक्टूबर 2026 को सामने आया। जिले में सूखे जैसे हालात और पशुओं के चारे की कमी ही इसकी वजह है। प्रशासन ने पेराई से पहले ही चारे का इंतजाम पक्का करना चाहा है।
आदेश में मिलों के लिए क्या-क्या तय हुआ
आदेश की सबसे बड़ी शर्त 30 प्रतिशत आरक्षण की है। कुल गन्ना क्षेत्र के 30 प्रतिशत हिस्से पर खड़ा गन्ना चारे के लिए सुरक्षित रखना होगा। इसके साथ ही कटाई के तरीके पर भी सख्त निर्देश दिया गया है। कुल कटाई का कम से कम 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों के हाथ से कराना होगा, मशीनों से नहीं।
गन्ने के ऊपरी हिस्से, जिसे किसान अगोला या पत्ती कहते हैं, की संभाल भी आदेश का हिस्सा है। मिलों से कहा गया है कि वे इसकी भंडारण व्यवस्था कारखाना स्तर पर करें।
हर मिल को अपने काम की साप्ताहिक रिपोर्ट जिला पशुसंवर्धन उपायुक्त और विशेष लेखापरीक्षक, वर्ग एक, सहकारी संस्थाएं (चीनी), धाराशिव को देनी होगी। निर्देश तोड़ने पर आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
बगास और मोलासिस का 30 प्रतिशत भी रुकेगा
आदेश सिर्फ खेत तक सीमित नहीं है। इसमें मिल के अंदर बनने वाले दो अहम उप-उत्पादों पर भी रोक लगाई गई है। हर सहकारी और निजी चीनी मिल को अपने कुल बगास उत्पादन का 30 प्रतिशत और मोलासिस उत्पादन का 30 प्रतिशत सूखा राहत तथा चारा और पशु आहार बनाने के लिए आरक्षित रखना होगा।
इस आरक्षित भंडार को जिला प्रशासन की अनुमति के बिना बेचा नहीं जा सकेगा और किसी दूसरे काम में भी नहीं लगाया जा सकेगा।
हाथ की कटाई पर जोर क्यों दिया गया
मशीन से कटाई होती है तो गन्ने का ऊपरी हिस्सा खेत में ही बिखर जाता है और उसे इकट्ठा करना मुश्किल हो जाता है। हाथ से कटाई में मजदूर इस हिस्से को संभालकर अलग रख सकते हैं, जिससे चारे की मात्रा बढ़ जाती है।
दूसरी वजह रोजगार है। हाथ की कटाई से स्थानीय मजदूरों को काम मिलेगा और उन्हें काम की तलाश में बाहर नहीं जाना पड़ेगा। सूखे के समय यही मजदूरी कई परिवारों का सहारा बनती है।
धाराशिव में यह सोच नई नहीं है
धाराशिव में बगास और मोलासिस को पशु आहार बनाने की सोच आदेश से पहले से चल रही थी। जिला प्रशासन की टीम ने ढोकी चीनी मिल का दौरा करके यह परखा था कि इन्हें वैज्ञानिक तरीके से पशु आहार में बदला जा सकता है या नहीं।
अधिकारियों का मानना था कि बिना उपचार के बगास ज्यादा पौष्टिक नहीं होता और उसे पचाना कठिन होता है। यूरिया, मोलासिस और खनिज मिश्रण से उपचार के बाद उसकी पौष्टिकता बढ़ जाती है। पशुपालन विभाग को इस पर एक पायलट परियोजना पर काम करने को कहा गया था। अब आया 30 प्रतिशत आरक्षण वाला आदेश उसी दिशा में बड़ा कदम है।
हिंगोली में भी यही रास्ता, सूखा पूरे राज्य में
धाराशिव अकेला जिला नहीं है। हिंगोली जिले में भी प्रशासन ने मिलों को गन्ने की 30 प्रतिशत फसल चारे के लिए आरक्षित रखने और हाथ से कटाई कराने को कहा था। वहां सभी पांच तालुका सूखाग्रस्त घोषित थे।
सितंबर 2026 में महाराष्ट्र सरकार ने 265 तालुकों को सूखा प्रक्रिया के पहले चरण में रखा था। मराठवाड़ा में बारिश की कमी सबसे ज्यादा महसूस की गई। ऐसे में चारा, पानी और रोजगार, तीनों पर एक साथ इंतजाम की जरूरत है।
UP के किसान के लिए इस खबर का मतलब क्या है
यह आदेश महाराष्ट्र के धाराशिव जिले का है। उत्तर प्रदेश में ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। फिर भी यह खबर UP के किसानों के लिए अहम है, क्योंकि यहां भी पेराई सत्र शुरू हो रहा है और कई घरों में पशुपालन गन्ने की खेती के साथ चलता है।
पेराई के समय गन्ने की पत्ती और अगोला अक्सर खेत में ही रह जाता है या जला दिया जाता है। धाराशिव का उदाहरण बताता है कि यही हिस्सा चारे की कमी के समय सबसे काम आ सकता है। किसान कटाई से पहले ही तय कर लें कि पत्ती का क्या करना है। उसे सुखाकर सुरक्षित जगह रखना और समिति या मिल से इसके इंतजाम पर बात करना, ये छोटे कदम बाद में बड़ी राहत दे सकते हैं।
ज्यादा पशु रखने वाले किसानों के लिए पेराई से पहले चारे का हिसाब लगाना और भी जरूरी है। चारा कम पड़े तो दूध उत्पादन घटता है और पशु कमजोर पड़ते हैं। पत्ती को बेकार समझकर छोड़ देना सीधा नुकसान है।
मुख्य बातें
- धाराशिव प्रशासन ने मिलों को कुल गन्ना क्षेत्र का 30 प्रतिशत पशु चारे के लिए आरक्षित रखने का आदेश दिया है।
- कुल कटाई का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा मजदूरों से कराना होगा, ताकि गन्ने का ऊपरी हिस्सा चारे के रूप में बच सके।
- बगास और मोलासिस उत्पादन का 30-30 प्रतिशत भी सूखा राहत और पशु आहार के लिए आरक्षित रहेगा, जिसे बिना अनुमति बेचा नहीं जा सकेगा।
स्रोत: पुढारी (24 अक्टूबर 2026), चिनीमंडी, टाइम्स ऑफ इंडिया
