देश में 152 मिलें चलीं, यूपी में सिर्फ 3: बारिश ने रोका पेराई का पहिया

चीनी सत्र 2026-27 के पहले महीने का हिसाब आ गया है, और यह हिसाब उत्तर प्रदेश के किसान के लिए एक अजीब तस्वीर दिखाता है। 31 अक्टूबर 2026 तक देश भर की 152 चीनी मिलों में गन्ने की पेराई शुरू हो चुकी थी। इन मिलों ने 105.43 लाख टन गन्ना पेरा और 8.45 लाख टन चीनी बनाई। पर इसी तारीख तक उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3 मिलें चल रही थीं, जबकि महाराष्ट्र अकेले 123 मिलों के साथ दौड़ रहा है।
यह आंकड़ा नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड, यानी एनएफसीएसएफ, की ताजा रिपोर्ट से आया है। समाचार एजेंसी भाषा की खबर में भी यही आंकड़े दर्ज हैं। पिछले साल इसी अवधि में देश में सिर्फ 31 मिलें चालू थीं और उत्पादन करीब 1 लाख टन था।
आंकड़ों में पूरा सत्र
31 अक्टूबर तक का राज्यवार हिसाब कुछ यों है। महाराष्ट्र में 123 मिलों ने 91.14 लाख टन गन्ना पेरकर 7.20 लाख टन चीनी बनाई। वहां चीनी की औसत रिकवरी 7.90 प्रतिशत रही। कर्नाटक में 7 मिलों ने 8.33 लाख टन गन्ना पेरा और 80 हजार टन चीनी बनाई। पूरे देश की औसत रिकवरी 8.01 प्रतिशत रही, जो पिछले साल की 8.44 प्रतिशत से कम है। उत्तर प्रदेश की 3 मिलों का उत्पादन आंकड़ा रिपोर्ट जारी होने तक उपलब्ध नहीं हुआ था।
रिकवरी का मतलब सीधा है। सौ किलो गन्ने से कितनी चीनी निकली, यही रिकवरी बताती है। सत्र की शुरुआत में गन्ना पूरी तरह पकता नहीं है, इसलिए शुरुआती रिकवरी आमतौर पर कम रहती है।
महाराष्ट्र एक महीना पहले क्यों चल पड़ा
महाराष्ट्र में गन्ने की पेराई आमतौर पर 15 नवंबर के आसपास शुरू होती है। इस बार मिलें करीब एक महीना पहले चल पड़ीं। एनएफसीएसएफ के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवारे ने इसका कारण पानी की कमी बताया है। उनका कहना है कि जल्दी पेराई शुरू होने से उन किसानों को राहत मिली है, जिनकी फसल पानी की कमी के कारण सूखने के खतरे में थी।
यहां फर्क साफ है। महाराष्ट्र में मिलें जल्दी इसलिए चलीं क्योंकि वहां गन्ना बचाना था। उत्तर प्रदेश में मिलें देर से इसलिए चलीं क्योंकि वहां खेतों में पानी भरा था।
यूपी में बारिश ने क्या बिगाड़ा
उत्तर प्रदेश में अक्टूबर के दौरान हुई बेमौसम बारिश ने पेराई कार्यक्रम को सीधे प्रभावित किया। खेतों में पानी भरने से गन्ने की कटाई कम से कम एक सप्ताह पिछड़ गई, और कटाई पिछड़ी तो मिलों का चलना भी पिछड़ा। पिछले साल इसी अवधि में उत्तर प्रदेश की 10 मिलें पेराई कर रही थीं। इस बार वह संख्या 3 पर आ गई।
जमीनी तस्वीर धीरे धीरे बदल रही है। अमर उजाला की खबर के मुताबिक सहारनपुर जिले की नानौता, गंगोह और सरसावा स्थित चीनी मिलों में हवन पूजन के साथ पेराई सत्र का शुभारंभ हुआ है। उद्योग संगठन इस्मा ने भी पहले कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पेराई जल्द शुरू होगी, फिर मध्य और उसके बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश की मिलें चलेंगी। यानी यूपी का सत्र रुका नहीं है, वह बस महाराष्ट्र से करीब दो से तीन सप्ताह पीछे चल रहा है।
किसान पर इसका सीधा असर क्या पड़ेगा
सबसे बड़ा सवाल यही है कि गन्ना कब तुलेगा और पैसा कब मिलेगा। मिल देर से चलेगी तो पर्ची का कैलेंडर भी आगे खिसकेगा। जिन किसानों का गन्ना तैयार खड़ा है, उनके लिए इंतजार का हर हफ्ता भारी पड़ता है। खड़ा गन्ना सूखता है, वजन घटता है और अगली फसल की बुवाई भी लेट हो जाती है।
दूसरा पहलू दाम का है। 2026-27 के लिए गन्ने का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है। पर उत्तर प्रदेश के किसानों को मिलने वाला राज्य परामर्श मूल्य, यानी एसएपी, 2026-27 के लिए अभी घोषित नहीं हुआ है। पिछला सत्र का एसएपी इस सत्र का दाम नहीं है, इस बात को लेकर भ्रम न रखें। महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान बेहतर दाम की मांग को लेकर विरोध भी कर रहे हैं, और केंद्र सरकार ने इन शिकायतों के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है।
यूपी के किसान अब क्या करें
पहला काम अपनी मिल और अपने क्रय केंद्र का ताजा कार्यक्रम पता करना है। पर्ची कब जारी होगी, तौल किस दिन होगी, यह जानकारी केंद्र पर जाकर या समिति से पक्की करें। अफवाह पर गन्ना काटकर ट्रॉली खड़ी करना नुकसान का सौदा हो सकता है।
दूसरा काम यह है कि कटा हुआ गन्ना ज्यादा दिन खुले में न रखा जाए। धूप और हवा में रखा गन्ना वजन खोता है, और वजन घटा तो भुगतान भी घटा। अगर मिल का कैलेंडर अभी दूर है तो कटाई उसी हिसाब से आगे बढ़ाएं। सट्टा और पर्ची के कागज भी संभालकर रखें, क्योंकि पेराई शुरू होने के बाद केंद्रों पर भीड़ बढ़ेगी।
आगे क्या देखना है
नवंबर का दूसरा सप्ताह उत्तर प्रदेश के लिए निर्णायक होगा। अगर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बड़ी मिलें इस दौरान पूरी क्षमता से चल पड़ीं तो यूपी का आंकड़ा तेजी से बदलेगा। एनएफसीएसएफ की अगली रिपोर्ट बताएगी कि यूपी की चालू मिलों की संख्या 3 से बढ़कर कितनी हुई है।
महाराष्ट्र की तेज शुरुआत ने देश का उत्पादन बढ़ा दिया है, पर उत्तर प्रदेश के किसान के लिए कहानी अभी शुरू हुई है। उसके खेत में गन्ना तैयार है, और अब उसे अपनी मिल के चलने का इंतजार है।
मुख्य बातें
- 31 अक्टूबर तक देश की 152 मिलों में पेराई शुरू हुई, 8.45 लाख टन चीनी बनी; यूपी में सिर्फ 3 मिलें चलीं।
- महाराष्ट्र 123 मिलों के साथ सबसे आगे रहा, जबकि अक्टूबर की बारिश ने यूपी की कटाई और पेराई पीछे धकेल दी।
- 2026-27 का एफआरपी 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है, पर यूपी के एसएपी की घोषणा अभी बाकी है।
स्रोत: एनएफसीएसएफ रिपोर्ट पर आधारित रूरल वॉयस (2 नवंबर 2026), भाषा समाचार एजेंसी की रिपोर्ट (आईबीसी24, 2 नवंबर 2026), अमर उजाला, सहारनपुर (2 नवंबर 2026)।
