30 साल से अटका 16 करोड़: देवरिया की बंद गौरीबाजार मिल के मजदूर-किसान फिर उठ खड़े हुए

26 अक्टूबर की दोपहर देवरिया में फिर वही मांग उठी जो तीन दशक से उठती आ रही है। गौरीबाजार की बंद चीनी मिल के मजदूरों और किसानों ने प्रशासन को मांगपत्र सौंपा और कहा कि उनका बकाया अब और नहीं टल सकता। मांगपत्र के मुताबिक मजदूरों के 14 करोड़ 73 लाख रुपये से ज्यादा और किसानों के करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये आज भी लंबित हैं। समाजवादी मजदूर सभा के जिलाध्यक्ष ऋषिकेश यादव के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठा तो आंदोलन तेज होगा। पूर्व विधायक दीनानाथ कुशवाहा ने भी भुगतान में देरी पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
यह कहानी नई नहीं है। गौरीबाजार स्थित यह मिल 1996 में बंद हुई थी। तब से इसके मजदूर और गन्ना किसान अपनी मेहनत की कमाई के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तीन दशक बीत गए, कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन भुगतान का मामला पूरी तरह हल नहीं हुआ। मई 2026 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी यही आंकड़े दर्ज थे, यानी पिछले छह महीनों में स्थिति जस की तस बनी हुई है।
आंकड़े जो तीन दशक की कहानी कहते हैं
मांगपत्र में मजदूरों का बकाया 14 करोड़ 73 लाख 3 हजार 876 रुपये 22 पैसे बताया गया है। यह रकम करीब 750 मजदूरों की है, जिनमें 185 स्थायी कर्मचारी हैं और बाकी सीजनल मजदूर। किसानों का बकाया करीब 1 करोड़ 62 लाख रुपये है और इससे जुड़े किसानों की संख्या करीब 3,500 बताई जाती है। दोनों को जोड़ें तो कुल रकम 16 करोड़ रुपये से ऊपर बैठती है।
संसद में भी यह मामला उठ चुका है। लोकसभा में देवरिया-सलेमपुर क्षेत्र के सांसद ने गौरीबाजार मिल का जिक्र करते हुए कहा था कि मिल बिक गई, लेकिन मजदूरों का 14 करोड़ 73 लाख रुपये से अधिक का बकाया आज भी बाकी है। यानी यह सिर्फ स्थानीय शिकायत नहीं, संसद के रिकॉर्ड में दर्ज एक पुराना मसला है।
बंद मिल, खुले घाव
बंद मिल के मजदूरों की मुश्किल यह है कि उनका मामला किसी चालू मिल के भुगतान चक्र में नहीं आता। चालू मिलों में पेराई सत्र शुरू होता है, चीनी बिकती है और भुगतान का रास्ता बनता है। बंद मिल के मजदूर के पास न पर्ची है, न तौल का इंतजार, सिर्फ पुराना हिसाब है। साल दर साल यह हिसाब कागजों में घूमता रहता है और परिवारों की जरूरतें बढ़ती रहती हैं।
किसानों की हालत भी अलग नहीं है। जिन किसानों ने 1996 से पहले इस मिल को गन्ना दिया था, उनमें से कई अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनके परिवार अब भी उस रकम का इंतजार कर रहे हैं जो कभी उनके खेत की कमाई थी। छोटे किसान के लिए डेढ़-दो लाख रुपये की रकम भी बड़ी होती है, और यहां तो हजारों परिवारों का मामला है।
अब फिर क्यों उठा मामला
नया पेराई सत्र 2026-27 शुरू होने के मौके पर यह मांग फिर तेज हुई है। प्रदेश की मिलें अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से चलने लगी हैं और किसान पर्ची, तौल और भुगतान की तैयारियों में लगे हैं। ऐसे में गौरीबाजार के मजदूर-किसानों का सवाल और तीखा हो जाता है कि जब नई कमाई का चक्र चल पड़ा है तो पुरानी मेहनत का हिसाब कब होगा।
मांगपत्र में प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने और बकाया राशि दिलाने की मांग की गई है। मजदूर संगठनों का कहना है कि संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी तय हो और नियमानुसार भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। आंदोलन की चेतावनी के साथ यह भी साफ है कि प्रभावित परिवार अब सिर्फ आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे।
इस खबर का असर क्या है
पहली बात, यह मामला दिखाता है कि बंद मिलों का बकाया अपने आप खत्म नहीं होता। जब तक प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय करके भुगतान का रास्ता नहीं निकलता, तब तक ऐसे मामले दशकों तक लटके रहते हैं। दूसरी बात, गौरीबाजार का मामला अकेला नहीं है। प्रदेश में कई पुरानी बंद मिलों के मजदूर-किसान इसी तरह के बकाए से जूझ रहे हैं। इसलिए इस मामले में कोई ठोस फैसला होगा तो वह बाकी जगहों के लिए भी रास्ता खोल सकता है।
प्रभावित परिवारों के लिए सबसे जरूरी काम अपने कागज संभालकर रखना है। पुरानी पर्चियां, भुगतान के रिकॉर्ड, मजदूरी के दस्तावेज और पहले दिए गए मांगपत्रों की प्रतियां, यही सबूत आगे किसी भी जांच या दावे में काम आएंगे। जिला प्रशासन और श्रम विभाग से लिखित में संपर्क बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि मामला सिर्फ मौखिक आश्वासन तक सीमित न रहे।
तीस साल लंबा इंतजार किसी भी परिवार के लिए छोटा नहीं होता। 26 अक्टूबर को सौंपा गया मांगपत्र यही याद दिलाता है कि गौरीबाजार के मजदूर-किसान अब भी अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और इस बार वे ठोस कार्रवाई चाहते हैं, सिर्फ एक और तारीख नहीं।
मुख्य बातें
- देवरिया की बंद गौरीबाजार चीनी मिल के मजदूरों का 14.73 करोड़ और किसानों का करीब 1.62 करोड़ रुपये बकाया है।
- मिल 1996 में बंद हुई थी, करीब 750 मजदूर और 3,500 किसान प्रभावित हैं।
- 26 अक्टूबर 2026 को मांगपत्र सौंपा गया, भुगतान न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।
स्रोत: Dynamite News (26 अक्टूबर 2026), JaiDesh News (26 अक्टूबर 2026), लोकसभा कार्यवाही रिकॉर्ड (eparlib)।
